“परमात्मा प्रेम का रंग ही सच्ची होली”: राजयोगिनी ब्रह्माकुमारी सरोज बहन

हरियाणा संपादक – वैद्य पण्डित प्रमोद कौशिक दूरभाष – 94161 91877
कुरुक्षेत्र : होली का वास्तविक अर्थ- बाहरी रंगों से अधिक आंतरिक परिवर्तन में निहित है। यह प्रेरणादायक संदेश प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय के कुरुक्षेत्र सेवा केंद्र पर आयोजित अलौकिक स्नेह मिलन समारोह में सेंटर इंचार्ज राजयोगिनी ब्रह्माकुमारी सरोज बहन ने दिया।
होली महोत्सव हर्षोल्लास एवं आध्यात्मिक उमंग के साथ मनाया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ प्रभु प्रेम के गीत से हुआ, जिसके पश्चात सभी भाई-बहनों ने एक-दूसरे पर पुष्प वर्षा कर शुभकामनाएँ दीं। वातावरण आनंद और प्रेम से सराबोर हो उठा।
सरोज बहन ने होली पर्व की हार्दिक शुभकामनाएं देते हुए कहा कि होली केवल रंगों का पर्व नहीं, बल्कि आत्मशुद्धि और आंतरिक परिवर्तन का पर्व है। ईश्वरीय संग के रंग में रंगना ही सच्ची आध्यात्मिक होली है। हम सब ‘होलीएस्ट बाप’ के होली बच्चे हैं, इसलिए पुराने संस्कारों के वश न होकर निश्चिंत भाव से जीवन जीना चाहिए। जो बीत चुका, उस पर बिंदी लगाकर आगे बढ़ना ही बुद्धिमानी है। जब हम स्वयं को परमपिता की संतान समझकर निश्चय बुद्धि से रहते हैं, तब संकल्प, कर्म और वाणी से पुराने संस्कार समाप्त होने लगते हैं और हमारे मूल, दिव्य संस्कार प्रकट होने लगते हैं।
उन्होंने आगे कहा कि एक प्रभु के रंग में रंगकर संपूर्ण विश्व एक परिवार बन सकता है। ईर्ष्या, द्वेष, नफरत, अहंकार और क्रोध को त्यागकर ही सच्ची अलौकिक होली मनाई जा सकती है। यह पर्व परिवर्तन शक्ति से आगे बढ़ने का संदेश देता है।
कार्यक्रम में कुमारी गौरी ने प्रभावशाली मोनो एक्टिंग के माध्यम से समझाया कि जैसे मोबाइल को चार्ज करने के लिए चार्जर आवश्यक है, वैसे ही मन की बैटरी को चार्ज करने के लिए परमात्मा से संबंध जोड़ना आवश्यक है। मेडिटेशन की अनुभूति कराते हुए बताया कि मौन में बैठकर मन-बुद्धि को सांसारिक बातों से हटाने पर अद्भुत शांति और शक्ति का अनुभव होता है।
बी.के. निशा बहन एवं मुकेश भाई (युगल) ने लघु नाटिका द्वारा जीवन का सुंदर संदेश दिया। मुकेश भाई ने कहा, “मैं भगवान का बच्चा हूँ, इसलिए गुस्सा नहीं करूंगा,” परंतु निशा बहन ने अनेक तर्क वितर्क के द्वारा यह बात मानने को तैयार नहीं हुई। निशा बहन ने स्पष्ट किया कि केवल कहने से प्रभु का रंग नहीं चढ़ता। सच्चा रंग सेवा, सरलता, दूसरों को आगे बढ़ाने और अहंकार त्यागने से ही चढ़ता है।
बी.के. गौरव ने भी प्रेरणादायक छोटी छोटी गतिविधियों के माध्यम से परमात्मा के संग का रंग लगाने अर्थात पवित्र एवं श्रेष्ठ जीवन जीने की प्रेरणा दी।
समापन से पूर्व सभी भाई-बहनों ने फूलों की वर्षा एवं आध्यात्मिक नृत्य के साथ प्रेममय होली का आनंद लिया। इस अवसर पर उपस्थित सभी ने समाज में शांति, प्रेम और सद्भाव का संदेश फैलाने का संकल्प लिया।



