सुहेलदेव वि0वि0 परिसर में दो दिवसीय विज्ञान मंथन का आगाज

वि0वि0 की छात्राओं की वैज्ञानिक पकड़ काबिले तारीफ
प्रो0 अजय तनेजा
विज्ञान का व्याख्यान रियल लाइफ से जोड़कर प्रस्तुत करें शिक्षक,
कुलपति
आजमगढ़। महाराजा सुहेलदेव विश्वविद्यालय आजमगढ़ परिसर में आज विज्ञान दिवस के अवसर पर विज्ञान मंथन का भव्य आगाज विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो0 संजीव कुमार एवं ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती भाषा विश्वविद्यालय लखनऊ से मुख्य अतिथि के रूप में पधारे कुलपति प्रो0 अजय तनेजा ने संयुक्त रूप से मां सरस्वती के चित्र पर पुष्प अर्पित कर एवं दीप प्रज्वलन के साथ किया।
वि0वि0 के मीडिया प्रभारी ने बताया कि आज विज्ञान दिवस के अवसर पर विश्वविद्यालय परिसर के प्राध्यापकों एवं छात्र-छात्राओं तथा संबद्ध महाविद्यालय से आए हुए प्राध्यापकगण व छात्र-छात्राएं पूर्व निर्धारित प्रतियोगिता में प्रतिभाग करने के लिए सुबह से ही अपना पंजीकरण कराकर अपने अपने स्टॉल पर पहुंचकर बेहतरीन एवं मुकम्मल तैयारी करते दिखे। विज्ञान मंथन में प्रतिभाग करने वाले छात्र-छात्राओं का उत्साह देखते ही बन रहा था, बच्चे अपने विश्वविद्यालय के मुखिया के प्रति यह कहते हुए आभार व्यक्त कर रहे थे कि अबकी बार कुलपति जी ने और बेहतर मंच प्रदान किया है। हम सभी प्रतिभागी यथासंभव इस अवसर का लाभ उठाकर विज्ञान के क्षेत्र में नवाचार की प्रस्तुति करेंगे।
मुख्य अतिथि प्रो0 अजय तनेजा ने अपने संबोधन में कहा कि विश्वविद्यालय परिवार का आभार कि आपने मुझे इतने बेहतरीन कार्यक्रम में सम्मिलित होने के लिए आमंत्रित किया, मुझे यहां आना इसलिए अच्छा लगा क्योंकि मैं विज्ञान का विद्यार्थी हूं तथा सीखने का आदी हूं। रमन इफेक्ट पर सन 1930 में जब प्रथम एशियाई साइंटिस्ट के रूप में सी0वी0 रमन जी को नोबेल पुरस्कार मिला तो विज्ञान के क्षेत्र में इसे नई क्रांति के रूप में लिया गया। विज्ञान का हर प्रेमी सी0 वी0 रमन जी को अपना आदर्श मानता है ।हालांकि हमारे पास सीमित संसाधन है बावजूद इसने विश्व फलक पर हिंदुस्तान ने अलग पहचान बनाई है। मुझे सबसे अधिक खुशी इस बात की रही है कि इस विश्वविद्यालय में बेटियां पूरी ऊर्जा के साथ अपना प्रेजेंटेशन दे रही हैं। आप सभी आज विज्ञान की जो खोज करेंगे वही कल की टेक्नोलॉजी होगी। बेसिक साइंस को कदापि इग्नोर ना करें क्योंकि यही वर्तमान AI है। अमोनिया की खोज नहीं होती तो फर्टिलाइजर नहीं बन पाते ना तो हम खाद्यान्न उत्पादन में आत्मनिर्भर हो पाते। भारत का किसान जुगाड़ के माध्यम से नित नये कीर्तिमान स्थापित कर रहा है ।आप प्रश्न पूछने की जिज्ञासा को जिस दिन जन्म देंगे सबसे बड़े वैज्ञानिक कहलाएंगे।
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे वि0वि0 के कुलपति प्रो0 संजीव कुमार ने कहा की नई पीढ़ी के लिए विज्ञान वरदान से कम नहीं है। यह सामान्य प्रक्रिया है कि हमारे अंदर फाइव सेंस पहले से ही मौजूद हैं उसे कंप्यूटर ने एहसास कराना प्रारंभ कर दिया है। हमें ऐसी मशीन व तकनीकी प्रस्तुत करनी है जो प्रत्येक प्रश्न का उत्तर दे सके। विज्ञान के शिक्षक कक्षा में यदि छात्रों को समझाने में दिक्कत महसूस करें तो रियल लाइफ से जोड़कर अपने व्याख्यान की प्रस्तुति करें। कभी-कभी छात्र हो या आम इंसान असहाय के रूप में जब बातें करने लगे तो विज्ञान उन्हें अभिभावक के रूप में सम्भालता है और व्यक्ति के भीतर पुनः जीने की लालसा प्रस्फुटित हो जाती है। छात्र यह ध्यान दें कि विज्ञान का नवीन से नवीन प्रस्तुत करें । वर्तमान में AI जैसे काम करता है एवं इससे बेहतर कार्य कर सकता है उसपर शोध कर समाज के सामने प्रस्तुत करें।
कार्यक्रम की संयोजिका डॉ0 प्रियंका सिंह ने मुख्य अतिथि प्रो0 अजय तनेजा एवं कार्यक्रम के सूत्रधार प्रो0 संजीव कुमार, कुलसचिव डॉ0 अंजनी कुमार मिश्र, परीक्षा नियंत्रक आनंद कुमार मौर्य ,सहायक कुल सचिव महेश श्रीवास्तव, प्राचार्यगण प्राध्यापक गण गैर शिक्षक कर्मचारी एवं परिसर तथा महाविद्यालय से प्रतिभाग करने आए छात्र-छात्राओं के प्रति आभार व्यक्त किया ।सहसंयोजक डॉ0 अंकुर चौबे ने विज्ञान मंथन के उद्देश्य से अवगत कराया। अंत में कुलसचिव महोदय ने आए हुए अतिथियों एवं प्रतिभागियों के प्रति आभार व्यक्त किया। विज्ञान मंथन कार्यक्रम में डॉ0 अनुराग ,डॉ0 सचिन, डॉ0 दिव्या ,आसिफ, धीरज ,अंकुर ,पल्लवी, उमाश्री, सपना, पूजा, शिवांगी, वैशाली ,निधि आदि उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन डॉ0 दीक्षा व डॉ0 अर्चना ने समेकित रूप से किया।




