ई जिनीगीया त खिलौना हो गईल – गोपालपुरी

आजमगढ जनपद मुख्यालय के मारवाडी धर्मशाला, पुरानी सब्जीमण्डी, कटरा, में हिन्दी उर्दू साहित्य मंच द्वारा हिन्दी पखवारा दिवस के अवसर पर कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया । उक्त कार्यक्रम मे प्रतापगढ़ से पधारे रवि कुमार मुखर ने मां स्वरसती वंदना प्रस्तुत कर कवि सम्मेलन की शुरुआत
” मां अपने वीणा का झनकार दे। तार ताल की आवाज दे ” से किया। वही लखनऊ से पधारे जितेन्द्र राही से हिन्दी पखवारा दिवस पर प्रकाश डालते हुए कहां ” हिन्दुस्तान की जान व पहचान हैं हिन्दी। हिन्दुस्तान की शान हैं हिन्दी।। “
गाजीपुर से पधारे कवि गड़बड़ ने कवि सम्मेलन में कुछ इस प्रकार में गड़बड़ी फैलाया ” हिन्दुस्तान की आन बान ही हिन्दी हैं। हिन्दी हमारे देश की पहचान हैं। गीतकार
ईश्वर चन्द त्रिपाठी ने आपनी गीत से लोगो को सोचने के लिए कुछ इस प्रकार विवश किया। जान हथेली पर लिए देश की बात करता हूं. देश के दुश्मनो से हिन्दी मे बात करता हू हिन्दुस्तान का निवासी हूं . हिन्दी में बात करता हूं।।
कवि सम्मेलन के माहौल को बदलते हुए शायर ताज आजमी ने अपनी गज़ल से लोगो को देश व हिन्द
भाषा पर कुछ इस प्रकाश डाला, “न भूलो कि ऐ हैं हिन्दुस्तान , मेरी हैं पहचान, हिन्दी से हैं हिन्दुस्तान, विश्व ऐ जान रहा हैं।। वही रमाकान्त गोपालपुरी ने उपस्थित लोगो को वर्तमान परिवेश की दिनचर्य को रेखांकित करते करते हुए कहा, ई जिनीगीया त खिलौना हो गईल, मेहरी खेले बेटवा खेले, खेले ले बहूरीया,, ई जिनगी खिलौना हो गईल ।।
कवि सम्मेलन का शुभारंभ मुख्य विकास अधिकारी आजमगढ़ परीक्षित खटाना नें मां स्वरसती के चित्र पर माल्यार्पण व दीप प्रज्जवलित कर कार्यक्रम का शुभारम्भ किया गया। उक्त कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्य विकास आधिकारी नें कहा कि इस प्रकार के आयोजन सें समाज मे समरसता का भाव पैदा होता है साथ ही साथ मातृ भाषा हिन्दी के प्रति समाज मे जागरुकता भी पैदा होती हैं हिन्दी भाषा हि हिन्दुस्तान की पहचान है। संजय पाण्डेय सरस ने आपनी गीत व गजलों से लोगों को मंत्रमुग्ध कर दिया ।




