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भक्तों ने माँ दुर्गा की विशेष पूजा कुष्मांडा रूप में की : डॉ.सुरेश मिश्रा

ब्यूरो चीफ – संजीव कुमारी

कुरुक्षेत्र : श्री दुर्गा देवी मन्दिर पिपली (कुरुक्षेत्र ) के पीठाधीश ज्योतिष आचार्य डॉ. सुरेश मिश्रा ने बताया कि आज चौथे नवरात्र के अवसर पर श्रद्धालु भक्तों ने माँ दुर्गा की विशेष पूजा कुष्मांडा रूप में की। माँ दुर्गा की नौ शक्तियों में से चौथा रूप कुष्मांडा देवी है। देवी कुष्मांडा जिनका मुखमंडल सैकड़ों सूर्य की प्रभा से प्रदिप्त है उस समय प्रकट हुई उनके मुख पर बिखरी मुस्कुराहट से सृष्टि की पलकें झपकनी शुरू हो गयी और जिस प्रकार फूल में अण्ड का जन्म होता है उसी प्रकार कुसुम अर्थात फूल के समान मां की हंसी से सृष्टि में ब्रह्माण्ड का जन्म हुआ। अत: यह देवी कुष्मांडा के रूप में विख्यात हुई। इस देवी का निवास सूर्यमण्डल के मध्य में है और यह सूर्य मंडल को अपने संकेत से नियंत्रित रखती है।
जो साधक कुण्डलिनी जागृत करने की इच्छा से देवी आराधना में समर्पित है उन्हें दुर्गा पूजा के चौथे दिन माता कुष्मांडा की सभी प्रकार से विधिवत पूजा अर्चना करनी चाहिए फिर मन को अनाहत चक्र में स्थापित करने हेतु मां का आशीर्वाद लेना चाहिए और साधना में बैठना चाहिए। इस प्रकार जो साधक प्रयास करते है उन्हें भगवती कुष्मांडा सफलता प्रदान करती है जिससे व्यक्ति सभी प्रकार के भय से मुक्त हो जाता है और मां का अनुग्रह प्राप्त करता है I
श्री दुर्गा देवी मन्दिर पिपली के पुजारी पंडित राहुल मिश्रा द्वारा विशेष पूजा अर्चना वैदिक मन्त्रों द्वारा मुख्य यजमान चम्पा देवी धर्मपत्नी डॉ. ईश्वर गुप्ता ने परिवार सहित श्रद्धा भाव से करवाई। सायंकालीन भगवती दुर्गा संकीर्तन में आशा क्वात्रा,सुरेन्द्र कौर, निशा अरोड़ा, सोनू, पायल सैनी, फूल कली,सुमित्रा पाहवा, शिमला देवी, सरोज शर्मा और भक्त सुशील तलवाड़ आदि ने माँ दुर्गा की सुन्दर-सुन्दर भेंटें श्रद्धा पूर्वक गाई।
सम्पूर्ण विश्व कल्याण हेतु श्री दुर्गा चालीसा का सामूहिक पाठ किया गया I
माँ दुर्गा के कीर्तन और आरती के पश्चात् श्रद्धा पूर्वक प्रसाद वितरण किया गया I

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