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सास मेरी मटकनी ने, दामन लिया पहर कै बुढ्ढी न्यूं मटके

हरियाणवी लोक गीतों ने बांधा समा।

कुरुक्षेत्र, वैद्य पण्डित प्रमोद कौशिक 29 अक्टूबर : सास मेरी मटकनी ने, दामन लिया पहर कै बुढ्ढी न्यूं मटके, मेरी री सास के पांच पुत्तर थे, दो देवर दो जेठ सुनियो.., गोकुल गढ़ ले चली गुजरिया… रौवे न ऐ मेरी राज दुलारी आदि हरियाणवी लोक गीतों को गाकर युवा कलाकारों ने समा बांध दिया। आरके सदन में आयोजित लोक गीत प्रतियोगिता में मुख्यातिथि के रूप में डॉ. अनिल सोनी व विशिष्ट अतिथि के रूप में डॉ.किरण कपूर ने भाग लिया और उन्होंने युवा कलाकारों का हौंसला बढाया। डॉ. अनिल सोनी ने कहा कि रत्नावली में ऐसे रत्न है जो हरियाणा की परम्परा और लोक संस्कृति को जीवित रखते हैं।
प्रतियोगिता में श्री विश्वकर्मा कौशल विश्वविद्यालय की टीम ने अप्पा न्यारे होवांगे, शरमाए मत न पर खूब तालियां बटोरी। एसयूएस गवर्नमेंट कॉलेज, मटक माजरी ने सास मेरी मटकनी ना, दामन लिया पहर कै बुढ्ढी न्यूं मटके पर प्रस्तुति दी। गुरु तेग बहादुर कॉलेज ने मेरी री सास के पांच पुत्तर थे, गवर्नमेंट पीजी कॉलेज अम्बाला ने गोकुलगढ़ ते चली गुजरिया, वा ए गुजरिया मेरे मन में बसी पर प्रस्तुति दी। इसके साथ ही कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय ने तेरे ते बेहना प्रीत घनी री तथा आरके एसडी पीजी कॉलेज ने रोवा ना ए मेरी राजदुलारी तू पर प्रस्तुति देकर सबकी वाह-वाही लूटी।

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