निष्काम सेवा ही मानव जीवन की वास्तविक साधना है : डा. श्रीप्रकाश मिश्र

हरियाणा संपादक – वैद्य पण्डित प्रमोद कौशिक दूरभाष – 94161 91877
मानव जीवन में निष्काम सेवा का महत्व विषय पर मातृभूमि शिक्षा मंदिर द्वारा सेवा संवाद कार्यक्रम आयोजित।

कुरुक्षेत्र 30 दिसम्बर : निष्काम भाव से की गई सेवा हृदय को निर्मल करती है, अहंकार, स्वार्थ और मोह से मुक्ति दिलाती है, और आध्यात्मिक उन्नति का मार्ग प्रशस्त करती है। निष्काम सेवा समाज के कमजोर वर्गों, गरीबों, बीमारों और जरूरतमंदों की मदद करती है, जिससे मानवता का कल्याण होता है और समाज में प्रेम व सद्भाव बढ़ता है।

निष्काम सेवा ही मानव जीवन की वास्तविक साधना है।
यह विचार मातृभूमि सेवा मिशन के संस्थापक डा. श्रीप्रकाश मिश्र ने मानव जीवन में निष्काम सेवा का महत्व विषय पर मातृभूमि शिक्षा मंदिर द्वारा आयोजित सेवा संवाद कार्यक्रम में व्यक्त किये। कार्यक्रम का शुभारम्भ भारतमाता एवं योगेश्वर भगवान श्रीकृष्ण के चित्र पर माल्यार्पण पुष्पार्चन से हुआ। मातृभूमि शिक्षा मंदिर के विद्यार्थियों ने निष्काम मिशन के महत्व पर अनेक प्रेरक प्रसंग प्रस्तुत किये।
मातृभूमि सेवा मिशन के संस्थापक डा. श्रीप्रकाश मिश्र ने विद्यार्थियों को सम्बोधित करते हुए कहा निष्काम सेवा का अर्थ है बिना किसी फल, स्वार्थ, या बदले की इच्छा के, पूरी तरह निस्वार्थ भाव से की गई सेवा या कर्म, जहाँ सेवा स्वयं में ही परम उद्देश्य होती है और इससे व्यक्तिगत लाभ की कोई अपेक्षा नहीं की जाती। यह मानवता, प्रकृति या ईश्वर के प्रति समर्पण का भाव है, जिससे आंतरिक संतुष्टि और आध्यात्मिक उन्नति प्राप्त होती है।मी
निष्काम सेवा का महत्व यह है कि यह व्यक्तिगत स्वार्थों से ऊपर उठकर दूसरों की निस्वार्थ भाव से मदद करना सिखाती है, जिससे मन शुद्ध होता है, अहंकार खत्म होता है और सच्चा आनंद व संतुष्टि मिलती है। निष्काम सेवा का अर्थ है कि हमें किसी भी कार्य के बदले में कुछ भी नहीं चाहिए। निष्काम सेवा हमें ईश्वरीय ऊर्जा से जोड़ती है और अंततः ईश्वर-प्राप्ति या परमात्मा से मिलन का मार्ग बनती है। कार्यक्रम के अतिविशिष्ट अतिथि जीतेन्द्र दहिया ने कहा मातृभूमि सेवा मिशन वास्तविक रूप से लोक मंगल के निमित्त निष्काम सेवा में समर्पित है। निष्काम भाव से की गई सेवा हृदय को निर्मल करती है, अहंकार, स्वार्थ और मोह से मुक्ति दिलाती है, और आध्यात्मिक उन्नति का मार्ग प्रशस्त करती है। कार्यक्रम का समापन शांतिः पाठ से हुआ। कार्यक्रम में मातृभूमि सेवा मिशन के सदस्य, विद्यार्थी सहित अनेक गणमान्य जन उपस्थित रहे।




