हिमालय ज्ञान का महा सागर और ऊर्जा का केंद्र है : समर्थगुरु सिद्धार्थ औलिया

मुरथल, (संजीव कुमारी) 17 जनवरी : समर्थगुरु संघ हिमाचल के जोनल कॉर्डिनेटर और श्री दुर्गा देवी मंदिर पिपली, कुरुक्षेत्र के पीठाधीश आचार्य डॉ. सुरेश मिश्रा ने जानकारी दी। उत्तराखंड से पधारे महामंडलेश्वर वीरेंद्र आनंद गिरि ने बताया कि समर्थगुरू धाम, मुरथल, सोनीपत हरियाणा में समर्थ गुरु से उनकी आध्यात्मिक भेंट हुई। संपूर्ण अध्यात्म में चर्चा करते हुए समर्थ गुरु ने कहा कि हिमालय ज्ञान का महा सागर है। ऊर्जा का केंद्र है। इसलिए भारतीय योग की शिक्षा उत्तराखंड से ही सरकारी व निजी विद्यालयों से ही प्रारंभ होनी चाहिए आनंदम पाठ्य क्रम में 20 मिनट का ध्यान प्रति दिन होना चाहिए। उनको समर्थगुरू की जीवन यात्रा पुस्तक भेंट की गई। इस शुभ अवसर पर समर्थगुरू धाम केंद्रीय संयोजक आचार्य दर्शन, आचार्य चेतन और सेक्रेटरी मां मीरा बाई उपस्तिथ रहे।
ट्विटर के माध्यम से आदरणीय समर्थगुरू सिद्धार्थ औलिया ने बताया कि संतोष क्या है ? जो मुझे प्राप्त है, वह मेरी पात्रता से अधिक है, मेरी करनी थोड़ी सी है,उसकी मेहरबानी बड़ी है। पता नहीं कैसे, सब अपने आप हो रहा है। यह संतोषभाव है और इसमें अहोभाव रहता है, इसमें शिकायत नहीं रहती है। संतोष तो परम सुख है। विचार और साँसों के प्रति जागना द्रष्टा है। निराकार के प्रति जागना ध्यान है। संपूर्ण जागरण साक्षी है।




