धरातल पर पवित्र सरस्वती नदी लाने वाले भगीरथ है दर्शन लाल जैन : मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी

केयू स्थित सरस्वती केन्द्र की पुस्तक द सरस्वती नदी गाथा का मुख्यमंत्री ने किया विमोचन।
कुरुक्षेत्र, (प्रमोद कौशिक) 23 जनवरी : कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के दर्शन लाल जैन सेंटर ऑफ एक्सिलेंस फॉर रिसर्च ऑन सरस्वती रिवर केन्द्र की पुस्तक द सरस्वती नदी गाथा पुस्तक का विमोचन करते हुए हरियाणा प्रदेश के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कहा की पदमश्री स्वर्गीय दर्शन लाल जैन धरातल पर पवित्र सरस्वती नदी लाने वाले भगीरथ है जिनके अथक प्रयासों से 1990 के दशक की शुरुआत में गैर-सरकारी संगठन सरस्वती नदी शोध संस्थान, जगाधरी के बैनर तले सरस्वती नदी के उत्थान के लिए कार्य शुरू हुए थे। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने पिहोवा में सरस्वती महोत्सव के बसंत पंचमी के दिन सरस्वती नदी पर बीते 20 सालों में हुए वैज्ञानिक शोध कार्य पर लिखी इस पुस्तक का लोकार्पण करते हुए यह विचार व्यक्त किए।
गौरतलब है कि हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी हरियाणा सरस्वती हेरिटेज डेवलपमेंट बोर्ड के अध्यक्ष हैं, जिनके मार्गदर्शन में केयू स्थित दर्शन लाल जैन सेंटर ऑफ एक्सिलेंस फॉर रिसर्च ऑन सरस्वती रिवर केन्द्र निरंतर सरस्वती नदी के उद्गम स्थलों पर शोध कार्य कर रहा है। मुख्यंत्री ने कहा कि यह पुस्तक सरस्वती नदी पर एक विस्तृत ग्रंथ है और यह विद्वानों, नीति- निर्माताओं, पर्यावरणविदों तथा उन सभी के लिए उपयोगी सिद्ध होगी जो भारत की प्राचीन सभ्यता, ज्ञान और भविष्य की स्थिरता को समझना चाहते हैं। इस अवसर पर केन्द्र के निदेशक एवं भूविज्ञान के अध्यक्ष प्रो. एआर चौधरी ने कहा कि मुख्यमंत्री के ओएसडी भारत भूषण भारती सरस्वती नदी शोध संस्थान के संस्थापक सदस्य रहे हैं और उन्होंने हरियाणा में सरस्वती नदी के राजस्व अभिलेखों को एकत्रित करवाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, जिससे हरियाणा सरकार के इस नदी के पुनर्जीवन के प्रयासों को मजबूत आधार मिला है। उन्होंने कहा कि हरियाणा की संस्कृति और परंपराएं उस प्राचीन सभ्यता में निहित हैं जो सरस्वती नदी के तटों पर फली-फूली थी। उन्होंने कहा कि यह पुस्तक ‘द सरस्वती रिवर गाथा’ इसी धरोहर पर आधारित है। प्रो. ए. आर. चौधरी ने बताया कि यह पुस्तक बहु-विषयक अनुसंधान पर आधारित है और इसमें इंडोलॉजी, भूविज्ञान, रिमोट सेंसिंग, पुरातत्व, जलवायु परिवर्तन, पर्यावरण, भूजल, जलविज्ञान, कृत्रिम भूजल पुनर्भरण, बाढ़ प्रबंधन, सभ्यता, संस्कृति और धरोहर संबंधी भूवैज्ञानिक अनुसंधान शामिल हैं। मुख्यमंत्री हरियाणा के ओएसडी भारत भूषण भारती, प्रदेश के मुख्यमंत्री के साथ पवित्र सरस्वती नदी के पुनर्जीवन कार्य से निकटता से जुड़े हुए हैं। भारत भूषण भारती सरस्वती नदी के एक प्रबल समर्थक हैं और उन्होंने केंद्रीय ऊर्जा, आवास एवं शहरी कार्य मंत्री मनोहर लाल के साथ सरस्वती नदी के प्रवाह मार्ग पर पदयात्रा की थी। इस अवसर पर मुख्यमंत्री के ओएसडी भारत भूषण भारती, सरस्वती हेरिटेज बोर्ड के उपाध्यक्ष धुम्मन सिंह किरमिच, सीईओ कुमार सुप्रवीन सहित गणमान्य लोग मौजूद थे।
द सरस्वती नदी गाथा में 11 अध्याय सम्मिलित।
123 पृष्ठों की यह पुस्तक बिगफुट द्वारा प्रकाशित की गई है और इसे 11 अध्यायों में विभाजित किया गया है, जिनमें परिचय के अतिरिक्त विषय हैं। इस शोध ग्रंथ का ‘भूमिका’ मनोहर लाल, पूर्व मुख्यमंत्री हरियाणा एवं वर्तमान में भारत सरकार के ऊर्जा, आवास एवं शहरी कार्य मंत्री द्वारा लिखा गया है। ‘प्रस्तावना’ भारत भूषण भारती, मुख्यमंत्री हरियाणा के ओएसडी, पूर्व राजनीतिक सलाहकार एवं पूर्व अध्यक्ष, हरियाणा कर्मचारी चयन आयोग द्वारा लिखा गया है। इसमें हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी, पूर्व राज्यपाल हरियाणा बंडारू दत्तात्रेय तथा कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. सोमनाथ सचदेवा के संदेश भी सम्मिलित हैं।
प्राचीन भारतीय साहित्य में सरस्वती नदी, सरस्वती नदी तंत्र के समर्थन में पुरातात्विक साक्ष्य, केन्द्र द्वारा किए गए पुरातात्विक अध्ययन, व्यापक भू-वैज्ञानिक अनुसंधान, चर्चा, अनुसंधान की उपलब्धियों का सारांश, सरस्वती नदी अनुसंधान केंद्र एवं सरस्वती नदी शोध संस्थान, जगाधरी (यमुनानगर), केन्द्र की सरस्वती नदी पुनर्जीवन योजना, भविष्य के अनुसंधान हेतु निष्कर्ष और अनुशंसाएँ, कार्य का प्रभाव/प्रसार और संदर्भ आदि शामिल हैं। पुस्तक में सरस्वती नदी तंत्र को प्रमाणित करने वाले अनेक मानचित्र और चित्र शामिल हैं।




