अमृत भारत स्टेशन योजना में ‘अमृत’ नहीं, अनियमितताओं की मिलावट” लालकुआँ रेलवे स्टेशन पर भ्रष्टाचार, बाल मजदूरी और घटिया निर्माण का आरोप।जफर अंसारी

लालकुआं -मोदी सरकार की महत्वाकांक्षी अमृत भारत स्टेशन योजना के तहत देशभर के 508 रेलवे स्टेशनों को विश्वस्तरीय बनाने का सपना दिखाया गया है।

इसी योजना में उत्तराखण्ड के तीन रेलवे स्टेशनों को शामिल किया गया है, जिनमें लालकुआँ रेलवे स्टेशन भी प्रमुख है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा योजना की आधारशिला रखे जाने के बाद यहां नवीनीकरण और सौंदर्यीकरण का कार्य तेजी से शुरू कर दिया गया।
लेकिन, विकास की इस चमकदार तस्वीर के पीछे अब भ्रष्टाचार और लापरवाही की स्याह परतें सामने आने लगी हैं। स्टेशन परिसर में चल रहे निर्माण कार्य में भारी अनियमितताएं नजर आ रही हैं। स्थानीय लोगों और प्रत्यक्षदर्शियों का आरोप है कि निर्माण में घटिया गुणवत्ता की सामग्री का खुलेआम इस्तेमाल किया जा रहा है, जिससे करोड़ों की योजना पर सवाल खड़े हो गए हैं।
सबसे गंभीर आरोप यह है कि निर्माण स्थल पर बाल मजदूरी कराई जा रही है, जो न केवल श्रम कानूनों का खुला उल्लंघन है, बल्कि सरकारी योजनाओं की साख पर भी बट्टा लगा रहा है। इसके साथ ही, जिस स्थान पर नवीनीकरण का कार्य हो रहा है, वहां पड़ी हुई पुरानी और जर्जर सामग्री का दोबारा उपयोग किया जा रहा है, जिससे निर्माण की मजबूती और टिकाऊपन पर गंभीर संदेह पैदा हो गया है।
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यदि यही हाल रहा तो विश्वस्तरीय स्टेशन का सपना लालकुआँ में भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ जाएगा। सामाजिक संगठनों और जनप्रतिनिधियों ने पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच की मांग की है और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की अपील की है।
लोगों का साफ कहना है कि सरकार एक ओर विकास और पारदर्शिता की बात करती है, वहीं दूसरी ओर ज़मीनी स्तर पर तस्वीर बिल्कुल उलट दिखाई दे रही है। अब सवाल यह है कि क्या रेलवे प्रशासन और संबंधित एजेंसियां इन गंभीर आरोपों को गंभीरता से लेंगी, या फिर अमृत भारत स्टेशन योजना लालकुआँ में केवल फाइलों और पोस्टरों तक ही सिमट कर रह जाएगी?
अब सबकी निगाहें रेलवे प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं। यदि समय रहते जांच और सुधार नहीं हुआ, तो यह मामला आने वाले दिनों में एक बड़े घोटाले का रूप भी ले सकता है।




