Uncategorized

गुजरात के किसान एवं कल्याण मंत्री जीतूभाई वघानी पहुंचे गुरुकुल


अजूबा: गुरुकुल के फार्म पर खजूर, सेब और ड्रेगन फ्रूट की प्राकृतिक खेती
राज्यपाल ने कहा प्राकृतिक खेती से ही बचेगा पर्यावरण और धरती का स्वास्थ्य।
मंत्री महोदय ने गुरुकुल के फार्म पर प्राकृतिक गुड़ का भी स्वाद चखा।

कुरुक्षेत्र, (प्रमोद कौशिक) 3 फरवरी : गुरुकुल के प्राकृतिक कृषि फार्म पर राज्यपाल आचार्य देवव्रत के मार्गदर्शन में हो रही प्राकृतिक खेती किसी अजूबे से कम नहीं है। हरियाणा की भूमि पर जहाँ ड्रेगन फ्रूट, खजूर, सेब और चने की फसलें आमतौर पर नहीं होती मगर गुरुकुल के फार्म पर यह करिश्मा प्राकृतिक खेती से सम्भव हो रहा है। उक्त शब्द गुजरात के कृषि एवं किसान कल्याण व पशुपालन मंत्री जीतूभाई वघानी ने गुरुकुल के फार्म का दौरा करने के उपरान्त पत्रकारों से बातचीत करते हुए कहे। उन्होंने कहा कि आचार्य देवव्रत जी आधुनिक युग के कृषि-ऋषि हैं जिनके प्रयासों से आज देश भर में किसान लाखों की संख्या में जहरमुक्त प्राकृतिक खेती को अपनाकर देश को स्वस्थ और समृद्ध बनाने की दिशा में महत्त्वपूर्ण कार्य कर रहे हैं। इससे पूर्व गुरुकुल पहुंचने पर राज्यपाल आचार्य देवव्रत ने मंत्री महोदय का बुके देकर स्वागत किया। उनके साथ कृषि राज्यमंत्री रमेश भाई कटारा, कृषि विभाग के प्रिंसीपल सेकेटरी आर. सी. मीणा, कृषि निर्देशक आर. पी. राजपूत सहित अन्य कृषि विषेषज्ञ भी गुरुकुल के फार्म का दौरा करने हेतु गुरुकुल पहुंचे।
आचार्य की मौजूदगी में मंत्री महोदय ने फार्म पर पत्तागोभी, मटर, गाजर की फसलों का बारीकी से निरीक्षण किया, साथ ही कच्ची मटर और पत्तागोभी को मौके पर तोड़कर उसके प्राकृतिक स्वाद का आनन्द लिया। गुरुकुल के लगभग 15 फीट ऊंचे गन्ने की भी मंत्री महोदय ने खूब तारीफ की। जीतूभाई वघानी सहित अन्य कृषि विशेषज्ञों ने फार्म पर हरी सब्जियों व गेहूं और चना की सहफसलों के माॅडल भी देखे, जिन्हें गुजरात में भी लागू करने के निर्देश मंत्री महोदय ने अधिकारियों को दिये। मंत्री महोदय ने गुरुकुल के फार्म पर स्थित क्रेशर पर गरमा-गरम प्राकृतिक गुड़ का भी स्वाद चखा l
इस दौरान पत्रकारों से बातचीत करते हुए राज्यपाल आचार्य देवव्रत ने कहा कि देश के यशस्वी प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में चलाए जा रहे प्राकृतिक खेती मिशन से देश भर में बड़ी संख्या में किसान जुड़ रहे हैं। केवल गुजरात में ही लगभग 9 लाख किसान प्राकृतिक खेती कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक खेती देशी गाय पर आधारित है, ऐसे में पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ इस खेती से गाय माता का भी संरक्षण हो रहा है। उन्होंने कहा कि गुरुकुल के प्राकृतिक कृषि फार्म पर पिछले 10 वर्षों से प्राकृतिक खेती की जा रही है, अब यहां के खेतों का ऑर्गेनिक कार्बन रीच केटेगरी में है, अर्थात् यहां की भूमि इतनी उपजाऊ हो चुकी है कि यहां पर गेहूँ, चावल व अन्य फसलों का उत्पादन रासायनिक खेती से भी ज्यादा होता है। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक खेती आज की जरूरत ही नहीं बल्कि पर्यावरण और धरती को बचाने का एकमात्र विकल्प है। देश के किसान भी इस बात को बखूबी जा चुके हैं और बड़ी संख्या में प्राकृतिक खेती को अपना रहे हैं।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button
plz call me jitendra patel