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वृन्दावन,ग्राम धौरेरा 7 अगस्त : राधा मोहन नगर स्थित मां धाम आश्रम में श्रावण मास के अवसर पर चल रहे सप्त दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा सप्ताह ज्ञान यज्ञ महोत्सव में व्यासपीठ पर आसीन प्रख्यात भागवताचार्य “धर्म पथिक” शैलेन्द्र कृष्ण महाराज ने अपनी सुमधुर वाणी के द्वारा देश-विदेश से आए समस्त भक्तों- श्रद्धालुओं को षष्टम दिवस की कथा के अंतर्गत महारास लीला, मथुरा गमन, कंस वध एवं भगवान श्रीकृष्ण और रुक्मणि विवाह की कथा का रसास्वादन कराया।
व्यास पीठाधीन “धर्म पथिक” शैलेन्द्र कृष्ण महाराज ने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण के द्वारा असंख्य ब्रज गोपिकाओं के साथ की गई महारास लीला अत्यंत दिव्य और रसमयी थी। क्योंकि महारास में सम्मिलित ब्रजगोपियां कोई साधारण स्त्रियां नहीं थी।वो पूर्व जन्म के महान तपस्वी ऋषि-मुनि थे।जिन्होंने भगवान श्रीकृष्ण को अपने पति के रूप में पाने के लिए अनन्त युगों तक कठोर तपस्या की थी।इसीलिए ब्रजगोपियां भी भगवान श्रीकृष्ण के समान ही परम आनंदमयी व चिन्मयी थीं।
श्रद्धेय “धर्म पथिक” शैलेन्द्र कृष्ण महाराज ने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण ने महारास असंख्य ब्रजगोपियों के हृदय की अभिलाषा को पूर्ण करने लिए व अभिमानी कामदेव के अभिमान को नष्ट करने के लिए श्रीधाम वृन्दावन के यमुना तट पर शरद पूर्णिमा की रात्रि को किया था।जिसमें उन्होंने अनेकों रूपों में अपनी बांसुरी बजाकर संपूर्ण विश्व को ब्रजमंडल की ओर आकर्षित किया।लीला पुरुषोत्तम भगवान श्रीकृष्ण की महारास लीला के दर्शनों के लिए समस्त देवी-देवताओं के साथ भगवान शिव भी ब्रज गोपी का स्वरूप धारण कर श्रीधाम वृन्दावन पधारे थे।
इस अवसर पर भगवान श्रीकृष्ण और रुक्मणि विवाह की अत्यंत नयनाभिराम व चित्ताकर्षक झांकी सजाई गई।साथ ही विवाह से संबंधित बधाइयों का गायन किया।जिस पर समस्त भक्तों-श्रृद्धालुओं ने जमकर नृत्य किया।
प्रख्यात साहित्यकार “यूपी रत्न” डॉ. गोपाल चतुर्वेदी ने बताया कि यह आयोजन “धर्म रत्न” आचार्य शैलेंद्र कृष्ण महाराज के जन्मोत्सव एवं मां धाम के वार्षिकोत्सव के रूप में आयोजित किया जा रहा है। इसके अलावा उनका जन्म दिन 9 जुलाई को भोपाल में भी वृहद स्तर पर आयोजित किया जाएगा। इस अवसर पर वहा विशाल रक्त दान शिविर भी लगेगा।
महोत्सव में श्रीमज्जगद्गुरु नाभापीठाधीश्वर स्वामी सुतीक्ष्णदास देवाचार्य महाराज, पुराणाचार्य डॉ. मनोज मोहन शास्त्री, पण्डित आर.एन. द्विवेदी (राजू भैया), आचार्य विमल कृष्ण पाठक, साध्वी वर्षा हरि कौशल, डॉ. राधाकांत शर्मा, आचार्य हरिहर मुद्गल, सन्त मोहन बाबा, आचार्य महेश शास्त्री, जय शंकर, आकाश तिवारी, साक्षी तिवारी आदि के अलावा विभिन्न क्षेत्रों के तमाम गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।


