दिव्या ज्योति जागृती संस्थान में सत्संग दौरान साध्वी दविंदर भारती जी ने बताया कि ईश्वर दर्शन से ही अध्यात्म का आरंभ होता है।

Oplus_16908288
Oplus_16908288
Oplus_16908288

(पंजाब) फिरोजपुर 17 अगस्त {कैलाश शर्मा जिला विशेष संवाददाता}=

     दिव्य ज्योति जागृति संस्थान के स्थानीय आश्रम में साप्ताहिक सत्संग प्रोग्राम का आयोजन किया गया ।जिसमें सर्वश्री आशुतोष महाराज जी की परम शिष्य साध्वी सुश्री देविंदर भारती जी ने संगत को संबोधित करते हुए समझाया कि समाज की वास्तविक प्रगति केवल विज्ञान, तकनीकी और भौतिक साधनों के बढ़ने से नहीं होती, बल्कि वह तभी संभव है जब उसके भीतर के लोग अध्यात्मिक मूल्यों को अपने जीवन का आधार बनाते हैं। अध्यात्म केवल साधना, ध्यान या पूजा तक सीमित नहीं है, बल्कि यह मनुष्य के भीतर आत्मा की पहचान और जीवन की गहराई को समझने का मार्ग है।

   आज का समाज निरंतर बदलते परिवेश से गुज़र रहा है। प्रतिस्पर्धा, भौतिकता और उपभोक्तावादी सोच ने व्यक्ति को बाहरी सुख-सुविधाओं की ओर तो प्रेरित किया है, लेकिन भीतर की शांति और संतोष कहीं खो गए हैं। यही कारण है कि परिवार टूट रहे हैं, संबंधों में तनाव है और मनुष्य अकेलेपन का शिकार हो रहा है। इस स्थिति में अध्यात्म वह ज्योति है जो अंधकार को दूर करती है और मनुष्य को संतुलित जीवन जीने का मार्ग दिखाती है। 

उन्होंने बताया कि अध्यात्म का सीधा संबंध सत्य, करुणा, प्रेम और सेवा से है। जब व्यक्ति अपने जीवन में इन मूल्यों को उतारता है, तो उसका स्वभाव बदल जाता है। वह दूसरों की भलाई के लिए जीना सीखता है। जिस समाज में करुणा और परोपकार का भाव प्रबल होता है, वहाँ अपराध, शोषण और अन्याय की जगह सहयोग, भाईचारा और शांति का वातावरण बनता है।

 हमारे प्राचीन ऋषि-मुनियों ने कहा है कि आत्मा ही मानव जीवन का वास्तविक केंद्र है। बाहरी सुख अस्थायी हैं, लेकिन आत्मा से प्राप्त सुख स्थायी और अटूट होता है। यही संदेश उपनिषद, गीता और संत महापुरुषों ने दिया। श्रीकृष्ण ने गीता में कहा – “योगस्थः कुरु कर्माणि” – अर्थात कर्म करो, परंतु आत्मा से जुड़कर, समत्व भाव से। यह सिद्धांत आज भी समाज में लागू होता है।

   अध्यात्म से हमारे जीवन में नैतिकता का विकास होता है। व्यक्ति अपने कर्मों के प्रति सजग होता है और सत्य-असत्य का भेद समझ पाता है। जब हम सबको आत्मा का रूप मानते हैं, तो भेदभाव मिट जाते हैं और समाज में समानता का वातावरण बनता है। अध्यात्म व्यक्ति के भीतर धैर्य और संयम पैदा करता है, जिससे तनाव और संघर्ष स्वतः कम हो जाते हैं।

     साध्वी जी ने बताया  कि आज आवश्यकता है कि अध्यात्म केवल मंदिर, मस्जिद या गुरुद्वारे तक सीमित न रहे, बल्कि घर-घर और व्यक्ति-व्यक्ति तक पहुँचे। बच्चों को छोटी उम्र से ही नैतिक शिक्षा और अध्यात्मिक संस्कार दिए जाएँ।

यदि समाज का प्रत्येक व्यक्ति आत्मा की शक्ति को पहचानकर अपने जीवन में सेवा, त्याग और करुणा को अपनाए, तो न केवल उसका जीवन सुंदर बनेगा बल्कि पूरा समाज शांति और प्रगति की ओर अग्रसर होगा। यही सच्चा राष्ट्रनिर्माण है।
“अध्यात्म वह जड़ है, जिससे समाज में सत्य, शांति और प्रेम के पुष्प खिलते हैं। जब तक अध्यात्म नहीं, तब तक वास्तविक प्रगति अधूरी है।”
लेकिन अध्यात्म को पहचान कैसे जाएं अध्यात्म का कौन सा मार्ग सही है इसके लिए पूर्ण संत महापुरुष ही हमें मार्ग दिखा सकते हैं। जब पूर्ण संत महापुरुष हमारे जीवन में आते हैं तो हमारे मस्तक पर हाथ रख दे हमारे भीतर ही परमात्मा को दर्शन करवा देते हैं जिससे हम हमारे जीवन में अध्यात्म को धारण कर पाते हैं। अंत में साध्वी हरजीत भारती जी के द्वारा भजन संकीर्तन का गायन किया गया।

VV NEWS

राष्ट्रीय कार्यालय रमाकान्त पाण्डेय(गोपालपुरी) संरक्षक/संस्थापक ग्राम व पोस्ट- गोपालपुर (टावर) थाना व तहसील- मेहनगर जिला-आजमगढ़, उत्तर प्रदेश पिंन कोड़-276204 मोबाईल-9838825561,7054825561 हेंड कार्यालय/प्रशासनिक कार्यालय जितेंद्र पटेल (प्रमुख संपादक/प्रशासनिक संपादक) ग्राम व पोस्ट- 495668 थाना व तहसील-जांजगीर जिला-जांजगीर (छत्तीसगढ) पिंन कोड़-495668 मोबाईल-6265564514

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Next Post

ਪੰਡਿਤ ਸੂਰਜ ਪ੍ਰਕਾਸ਼ ਸ਼ਰਮਾ ਨੇ ਆਪਣਾ 81ਵਾਂ ਜਨਮ ਦਿਨ ਬੜੀ ਸਾਦਗੀ ਪਰ ਪ੍ਰਭਾਵਸ਼ਾਲੀ ਤਰੀਕੇ ਨਾਲ ਮਨਾਇਆ

Mon Aug 17 , 2026
(ਪੰਜਾਬ) ਫਿਰੋਜਪੁਰ 17 ਅਗਸਤ {ਕੈਲਾਸ਼ ਸ਼ਰਮਾ ਜ਼ਿਲ੍ਹਾ ਵਿਸ਼ੇਸ਼ ਸੰਵਾਦਦਾਤਾ}=

You May Like

Breaking News

advertisement