दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान द्वारा पांच दिवसीय श्री कृष्ण कथा श्री राधा कृष्ण धाम में शुरू


दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान द्वारा पांच दिवसीय श्री कृष्ण कथा श्री राधा कृष्ण धाम में शुरू।
मानव ब्रह्मज्ञानी होकर ही बनता है प्रभु का सच्चा भक्त – साध्वी गरिमा भारती
(पंजाब) फिरोजपुर/फरीदकोट, 05 सितंबर [कैलाश शर्मा जिला विशेष संवाददाता]=
दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान द्वारा श्री राधा कृष्ण धाम में पांच दिवसीय श्री कृष्ण कथा अमृत का आयोजन किया गया है। कथा का शुभारंभ विधिवत पूजन के साथ किया गया जिसमें समाजसेवी सुरेश गोयल और दीक्षित रिखी ने भाग लिया।
कथा के प्रथम दिवस में श्री आशुतोष महाराज जी की शिष्या कथा व्यास साध्वी सुश्री गरिमा भारती जी ने कहा कि प्रभु की कथा जहां एक ओर हमें शाश्वत शांति के साथ जोड़ती है,वहीं दूसरी ओर हमें जागरूक भी करती है। जागृति भाव आत्मिक स्तर पर जागरूक होना। भगवान श्री कृष्ण का घट में तत्व रूप में दर्शन ही मानव में वास्तविक जागृति को लेकर आता है। साध्वी जी ने बताया कि प्रत्येक मानव स्वयं को दोराहे पर पाता है जिसे शास्त्र व ग्रन्थों में श्रेय मार्ग सर्व कल्याणकारी मार्ग व प्रेय मार्ग अर्थात् ऐन्द्रिय सुखों से भरपूर स्वार्थ व विनाश से भरपूर मार्ग कहते हैं। भगवान श्री कृष्ण के भक्त माधव दास जी भी स्वयं के व जग के परमार्थ भाव को लेकर प्रेय मार्ग को अपनाते हैं।
साध्वी जी ने कहा कि प्रत्येक व्यक्ति के समक्ष दो मार्ग होते हैं। साधारण शब्दों में एक आत्मा का मार्ग है व दूसरा मन का। एक सुलझन की ओर ले जाता है और एक उलझन की ओर। इन्हीं के बीच फंसकर सही चयन न कर पाने की दशा ही तनाव,उदासी व क्षोभ का कारण है जिससे अनेक मनोवैज्ञानिक व्याधियां उत्पन्न होती हैं। यही आधुनिक समाज की समस्या है। यदि हम स्वयं को पहचानें, भीतर उठने वाली अंतरात्मा की पुकार सुने, उस पर अमल करें तो निश्चय ही समस्याओं का समाधान हो जाए। इसके लिए आवश्यकता है किसी ब्रह्मज्ञानी संत की जो हमें आत्म साक्षात्कार करवा सके। यही वेद विदित मार्ग है। ब्रह्मज्ञानी होकर जब मनुष्य भक्त बनता है तो यथार्थ में मनुष्य बनता है व जाति-पाति, ऊंच-नीच के दायरों से बाहर निकल पाता है। भगवान श्री कृष्ण को जान लेने के बाद ही मनुष्य प्रभु की लीलाओं को समझ पाता है। मानव समाज का जीवन प्रभु से विहीन एक ऐसा रेगिस्तान है जहां भावों की सरिता का बहना असाध्य दृष्टिगोचर हो रहा है। वह जीवत्व से शवत्व की ओर बढ़ रहा है। ऐसे में उसके अंतःकरण से प्रभु के लिए भावों का प्रस्फुटिकरण होना असंभव सा प्रतीत होता है। साध्वी जी ने इस समस्या का समाधान देते हुए कहा कि भावों व प्रेम के लिए मानव को प्रभु भक्ति से जुड़ना भक्ति को एक पूर्ण सद्गुरु ही हमारे भीतर प्रकट कर सकता है। कथा का समापन प्रभु की पावन आरती के साथ हुआ जिसमें मेजर वरुण कुमार एसडीएम फरीदकोट,अश्विनी बंसल अध्यक्ष रोटरी क्लब फरीदकोट, डॉ राजीव मनहास, डॉ आरएन बंसल, डॉ विकास गुप्ता, जीसी जयसवाल, हरजिंदर सिंह, भूपिंदर सरीन ओर गोपाल शर्मा शामिल हुए।




