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कांकेर ने रचा इतिहास : प्रदेश में सर्वाधिक आजीविका डबरियों का निर्माण कर बना अग्रणी

उत्तर बस्तर कांकेर, 25 मार्च 2026/ जिले में जल प्रबंधन और ग्रामीण आजीविका को बढ़ावा देने के लिए शासन के दिशा-निर्देश में संचालित ’मोर गांव, मोर पानी’ महाभियान अब धरातल पर रंग लाने लगा है। कलेक्टर श्री निलेशकुमार महादेव क्षीरसागर के मार्गदर्शन में महात्मा गांधी नरेगा (मनरेगा) के अभिसरण से जिले में निजी ’आजीविका डबरी’ निर्माण की पहल ने हितग्राहियों के लिए आय के नए द्वार खोल दिए हैं।
क्या है आजीविका डबरी
आजीविका डबरी निर्माण का मुख्य उद्देश्य सतही जल प्रवाह को एकत्र करना, भूजल का पुनर्भरण व स्थानीय आजीविका को बढावा देना है। शासन के दिशा-निर्देशों के अनुरूप, डबरी निर्माण के लिए हितग्राहियों के चयन में विशेष रूप से लखपति दीदी, प्रधानमंत्री आवास के हितग्राही और नक्सल पीड़ित परिवारों को प्राथमिकता से चयनित किया गया है। इस अभियान की सफलता के पीछे वैज्ञानिक दृष्टिकोण का बड़ा हाथ है। डबरी निर्माण के लिए ग्राम सभाओं से हितग्राहियों के प्रस्ताव के बाद जिला प्रशासन द्वारा वाटरशेड सिद्धांतों का पालन करते हुए  जीआईएस (भौगोलिक सूचना प्रणाली) और क्लार्ट एप के माध्यम से उपयुक्त स्थलों का चयन किया गया है। इससे यह सुनिश्चित हुआ है कि डबरियों में जल भराव की क्षमता अधिकतम हो और भूजल स्तर में प्रभावी सुधार आए।
 जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री हरेश मंडावी ने बताया कि कलेक्टर श्री क्षीरसागर के मार्गदर्शन में जिले में अब तक कुल 2 हजार 217 डबरी का निर्माण पूर्ण किया जा चुका है, जो प्रदेश में सर्वाधिक है। इसमें अब आजीविका हेतु मछली पालन, फलदार वृक्षारोपण और सब्जी बाड़ी व अन्य विभागों के साथ मिलकर ऐसी कार्ययोजना बनाई गई है जिससे हितग्राहियों को डबरी के अलावा अन्य संसाधनों का भी लाभ मिले। वर्षा ऋतु के बाद इन डबरियों में जल भराव से न केवल फसलों के लिए सिंचाई की सुविधा बढ़ेगी, बल्कि भूजल पुनर्भरण से क्षेत्र के कुओं और हैंडपंपों का जलस्तर भी सुधरेगा। उन्होंने बताया कि इसके तहत जिले के अंतागढ़ विकासखण्ड में 349, भानुप्रतापपुर में 353, चारामा में 143, दुर्गूकोंदल में 342 कांकेर में 355 कोयलीबेड़ा में 227 तथा नरहरपुर में सर्वाधिक 448 इस प्रकार कुल 2 हजार 217 आजीविका डबरी का निर्माण किया गया, जो कि प्रदेश में सबसे अधिक है।

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