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लोकेशन रायबरेलीरिपोर्टर विपिन राजपूत*रायबरेली के अम्बेडकर वादी बहुजनवादी ने पिछड़ों के पुरोधा बाबू शिवदयाल सिंह चौरसिया जी की 123वीं जयंती

एबहुजननायक मान्यवर कांशीराम जी की 92वीं जयंती पर उनको पुष्पांजलि कर किया याद और उनके विचारों को जन जन तक पहुंचाने के लिए लिया संकल्प।*

*पिछड़ों के पुरोधा बाबू शिवदयाल सिंह चौरसिया एंव बहुजन नायक मान्यवर कांशीराम का जीवन समर्पण, संघर्ष और वैचारिक प्रतिबद्धता की मिसाल है, जो हमें हमेशा सामाजिक न्याय के लिए प्रेरित करता रहेगा. ……..इंजीo वंश बहादुर यादव


  • रायबरेली के रैदास आश्रम सामुदायिक केन्द्र रायबरेली में जनपद के अम्बेडकर वादी बहुजनवादी संविधान पसन्द समतावादी धम्म से जुड़े विभिन्न सामाजिक संगठनों के संयुक्त तत्वावधान में लोक अदालत के जनक , पिछड़ों के पुरोधा एवं पूर्व राज्यसभा सदस्य , शिवदयाल सिंह चौरसिया की 123वीं जयंती एंव गरीब वंचित शोषितों हुक्मरान बनाने वाले बहुजन नायक, मान्यवर कांशीराम साहेब जी की 92वीं जयंती की पूर्व संध्या पर सामाजिक वैचारिक संगोष्ठी  कर बहुजन एकता दिवस के रूप में मनाया गया। दोनों महापुरुष,नायकों के व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर चर्चा की गई। और उनके चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर उन्हें नमन किया । रैदास आश्रम सामुदायिक केन्द्र के संयोजन पर संगोष्ठी का आयोजन किया गया।  संगोष्ठी की अध्यक्षता अर्जक संघ के प्रचारक समतावादी,सामाजिक चिन्तक इo वंशबहादुर यादव एंव संचालन बहुजन नेता राजेश कुरील ने किया।
    संगोष्ठी में आए अम्बेडकर वादी,बहुजनवादी मदनलाल कन्नौजिया, रामसंजीवन धीमान रामशरण प्रसाद, आर एस कटियार, सामाजिक चिन्तक इंजीo एस के आर्या, विमल किशोर सबरा, शिक्षक अनिलकांत आशाराम रावत , रोहित प्रतिपक्षी आदि वक्ता गणों ने बाबू शिवदयाल सिंह चौरसिया एंव मान्यवर कांशीराम साहेब के उद्देश्य एवं कार्यशैली पर प्रकाश डालते हुए कहा कि 13 मार्च 1903 को जन्म हुआ था एक प्रमुख स्वतंत्रता संग्राम सेनानी, वकील, समाजसेवी और पिछड़े वर्गों के सामाजिक अधिकारों के पुरोधा थे। उन्होंने उत्तर भारत में पिछड़े वर्गों की जागृति और सामाजिक समानता के आंदोलन को मजबूती प्रदान की। उनका जीवन समाज के कमजोर और वंचित वर्गों के अधिकारों के लिए समर्पित रहा और 1929 में उन्होंने पिछड़ों को हक दिलाने के लिए बैकवर्ड क्लासेस लीग की स्थापना की और बाबा साहब डाoअम्बेडकर के विचारों से सहमत होकर साइमन कमीशन का स्वागत किया और1953में पिछड़ों को सामाजिक समानता न्याय दिलाने के लिए काका कालेलकर की अध्यक्षता में पिछड़ा वर्ग के अध्यक्ष बने।लोक अदालत की स्थापना में भी उनका अहम योगदान था, दोनों की परस्पर समान विचारधारा होने के कारण एक दूसरे के साथ कंधे से कंधा मिलाकर आगे बढ़ने लगे ,उस समय तक पिछड़े वर्ग के पास ऐसी कोई संस्था नहीं थी जो इस समाज की दिशा एवं दशा को तय करती। एक समय तक बहुजन समाज में अनेक विचारक और चिंतक हुए परंतु अपनी अपनी जाति तक ही सीमित रहे और अपनी जाति की ही डोर पकड़कर कटी पतंग की तरह अधोगति को प्राप्त हुए। इसी दौर में शिव दयाल सिंह चौरसिया ने 19मार्च 1934 में जन्मे बहुजन नायक कांशीराम बामसेफ (BAMCEF), DS-4 के जुझारू व्यक्ति थे जिनके साथ डी.के. खापर्डे, दीना भाना ने इस बुराई को पहचाना और एक ऐसे संगठन की रूपरेखा तैयार करने में लग गए, जो समस्त गरीब वंचित शोषित गरीब,दलित,पिछड़े वर्ग के लिए हो। उन्हें एक नीले झंडे के नीचे रखकर उनके हितों की रक्षा के लिए एक नए जोश खरोश के साथ संघर्ष शुरू किया। और तन मन धन से सहयोग देकर बीएसपी (BSP) संगठन का गठन कर ,इस संगठन की हौसला अफजाई की। और उत्तर भारत में वंचित समाज को एकजुट कर “जिसकी जितनी संख्या भारी, उसकी उतनी हिस्सेदारी” का नारा दिया। उन्होंने सत्ता को मास्टर की (Master Key) मानकर शोषित समाज को शासक वर्ग बनाने के लिए राज्य में सत्ता परिवर्तन कर बहुजन समाज को शासक बनाया और उसके माध्यम से मिशन दिया। इस परिवर्तन से दोनों महानायक शुगर की बीमारी के बावजूद खुशी के दिन मिठाई खाई थी। और कहा था कि मेरा संघर्ष और जीवन सफल हुआ।उनका जीवन समर्पण, संघर्ष और वैचारिक प्रतिबद्धता की मिसाल है, जो हमें हमेशा सामाजिक न्याय के लिए प्रेरित करता रहेगा। संगोष्ठी में मास्टर श्रीराम, रामदेव कुरील सेराज अहमद उर्फ साजन, एड. अभय सोनकर, एड. शिव शंकर बहेलिया, शिक्षक उपेन्द्र कुमार , सुधीर कुमार, एंव राम खेलावन, रामदेव कुरील, अमर सिंह, कवि प्रीतम कुमार, राजू दिवाकर आदि दर्जनों अम्बेडकर वादी बहुजनवादी ने दोनों महानायकों को पुष्पांजलि अर्पित कर उनका याद कर उनके विचारों को जन जन तक पहुंचाने एंव बहुजन समाज को संगठित करने का संकल्प लिया।

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