
जब रक्षक ही हो जाए लाचार! सिपाही को पाटीदारों ने पीटा, अस्पताल में जिंदगी की जंग—व्यवस्था पर बड़ा सवाल
आजमगढ़।कानून की वर्दी पहनकर दूसरों को सुरक्षा देने वाला सिपाही आज खुद अस्पताल के बेड पर पड़ा इंसाफ की भीख मांग रहा है। आजमगढ़ की यह तस्वीर सिर्फ एक घटना नहीं, बल्कि उस सिस्टम पर करारा व्यंग है, जो रक्षक को ही असुरक्षित छोड़ देता है।जनता की रक्षा करने वाले एक पुलिसकर्मी को उसके पाटीदार द्वारा इतनी बेदर्दी से मारा पीटा गया कि वह अपनी जिंदगी और मौत से जुझ रहा है। आजमगढ़ के जिला अस्पताल में भर्ती अनिल यादव जहां उनका इलाज चल रहा है, एक पुलिसकर्मी अपने लिए इंसाफ मांग रहा है। ऐसे मनबढ़ दबंग लोगों ने रास्ते की विवाद को लेकर जिस तरह से उन्हें मारा है, निश्चित कानून व्यवस्था पर ही सवाल खड़े हो गए हैं।
जनपद संत कबीर नगर के थाना कोतवाली खलिलाबाद का सिपाही अनिल कुमार यादव को रास्ते के विवाद को लेकर पाटीदारों ने इस कदर पीटा कि वह इस समय जिंदगी और मौत से जूझ रहा है। आजमगढ़ के जिला अस्पताल में भर्ती अनिल यादव का कहना है—मेरे पाटीदारों ने मुझे और मेरे भाई को पूरी तरह से लाठी, डंडे, राड और धारदार हथियार से मारा। मेरा इलाज जिला अस्पताल में चल रहा है।
अनिल यादव मऊ जनपद की घोसी कोतवाली के नदवा सराय चौकी के सिरसिया के रहने वाले हैं। इन्होंने आरोप लगाते हुए कहा कि मेरे पाटीदारों द्वारा 31 मार्च 2026 को पहले से घात लगाकर बैठे थे। शाम 7:00 बजे मैं बाजार से जब घर लौटा तो मुझे लाठी, डंडे और राड से मेरे ऊपर प्राणघातक हमला किया गया, जिससे मैं पूरी तरह से बेहोश हो गया। मेरा भाई मुझे अस्पताल ले गया, जहां से मुझे आजमगढ़ जिला अस्पताल में रेफर कर दिया गया।
अब सवाल सीधा है और चुभता हुआ भी—जब कानून का पहरेदार ही इस तरह पीट दिया जाए, तो आम जनता किस भरोसे जिए? यह घटना व्यवस्था के उस खोखले दावे पर तमाचा है, जहां सुरक्षा सिर्फ कागजों में नजर आती है। फिलहाल घायल सिपाही का इलाज जारी है और वह न्याय की गुहार लगा रहा है।


