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दून में आँखों के साइलेंट किलर के खिलाफ अभियान, रैली में उमड़े लोग

उत्तराखंड देहरादून
दून में आँखों के साइलेंट किलर के खिलाफ अभियान, रैली में उमड़े लोग
सागर मलिक
ग्लूकोमा : दृष्टि का मूक चोर

ग्लूकोमा (काला मोतिया) स्थायी अंधत्व के प्रमुख कारणों में से एक है। यह रोग धीरे-धीरे बिना लक्षण के आंख की ऑप्टिक नर्व को नुकसान पहुंचाता है, इसलिए इसे “दृष्टि का मूक चोर” कहा जाता है।

40 वर्ष से अधिक आयु, परिवार में ग्लूकोमा का इतिहास, मधुमेह, अधिक चश्मे का नंबर या लंबे समय तक स्टेरॉयड लेने वाले लोगों में इसका जोखिम अधिक होता है। समय पर आंखों की जांच से इसे पहचाना और नियंत्रित किया जा सकता है।

विश्व ग्लूकोमा सप्ताह के दौरान विवेकानन्द नेत्रालय में लगभग 160 लोगों की ग्लूकोमा स्क्रीनिंग की गई तथा जनजागरूकता के लिए एक जागरूकता रैली भी आयोजित की गई।

नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. मानसी पोखरियाल के अनुसार,
“ग्लूकोमा से खोई हुई दृष्टि वापस नहीं लाई जा सकती, लेकिन समय पर जांच और उपचार से आंखों की रोशनी को बचाया जा सकता है।”

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