भगवान राम और मां दुर्गा का भक्ति भावना से संकीर्तन हुआ : आचार्य डॉ. सुरेश मिश्रा

कुरुक्षेत्र, प्रमोद कौशिक 27 मार्च : श्री दुर्गा देवी मंदिर पिपली, कुरुक्षेत्र के पीठाधीश और समर्थगुरु धारा हिमाचल के ज़ोनल कोऑर्डिनेटर आचार्य डॉ. सुरेश मिश्रा ने बताया कि पौराणिक मान्यताओं में माना जाता रहा है कि भगवान श्री राम का जन्म चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की नवमी को हुआ था, जो कि हिंदू धर्म को मानने वाले भगवान श्री राम नवमी के रूप में मनाते हैं।
नवरात्रि के 9 दिन मां दुर्गा के 9 रूपों की पूजा होती है और सबसे अंत में भगवान श्री राम नवमी मनाई जाती है। घरों और मंदिरों में पूरे विधि विधान से भगवान श्री राम और माता सीता की पूजा अर्चना होती है।
भगवान श्री राम नवमी का महत्व : शास्त्रों और पुराणों के अनुसार भगवान राम भगवान विष्णु जी के सातवें अवतार थे। धर्म की रक्षा के लिए उन्होंने अपना पूरा जीवन लगा दिया और अच्छे आचरण का उदाहरण प्रस्तुत करने के लिए उन्होंने स्वयं को आदर्श पुरुष के रूप में कर्म किया। इसलिए उन्हें ही मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम भगवान कहा जाता है।
ट्वीटर के माध्यम से समर्थगुरू धारा, मुरथल, हरियाणा के संस्थापक आदरणीय समर्थगुरु सिद्धार्थ औलिया जी ने बताया कि अब तक तुमने जो भी कर्म किए, वह तुम्हारी भूमिका थी, तुम्हारा रोल था। जो फल मिले, वह तुम्हारी नियति थी, डेस्टिनी थी। दोनों प्रभु द्वारा निर्धारित हैं। फिर कैसा शोक, कैसा विषाद! प्रभु की लीला चल रही है।
उस का मजा लो। हमेशा मौज में रहो।
मैं हूँ सब सन्तों का वारिस, धर्म सनातन का प्रकाश हूँ।
राम कृष्ण की परंपरा हूँ, नव पीढ़ी की नयी आस हूँ।
हर युग में कोई आता है , सोते से हमें जगाता है ।
जागरणं शरणं गच्छामि , गोविन्दं शरणं गच्छामि।
श्री दुर्गा देवी मंदिर के पुजारी पण्डित राहुल मिश्रा ने वैदिक मंत्रोच्चारण से मुख्य यजमान सीमा शर्मा और नेहा शर्मा के परिवार से नवग्रह पूजा और मां दुर्गा की अर्चना करवाई।
समस्त विश्व कल्याण हेतु श्री दुर्गा चालीसा का पाठ व संकीर्तन हुआ जिसमें शिमला धीमान, सुमित्रा पाहवा,
सुरेन्द्र कौर,संगीता तलवाड़, ऊषा शर्मा , मोनिका गर्ग, आशा
कवातरा पायल सैनी , निशा अरोड़ा व भक्त सुशील तलवाड़
ने माँ दुर्गा की भेंटे गायी। माँ दुर्गा की आरती और कीर्तन के पश्चात सभी भक्तों को श्रद्धा भावना से प्रसाद वितरण किया गया।




