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सुविवि के छात्रों ने जन- जागरूकता रैली कर ग्रामीणों में जगायी अलख

  • सुविवि के छात्रों ने जन- जागरूकता रैली कर ग्रामीणों में जगायी अलख,
  • आयुष्मान भारत, उज्ज्वला योजना एवं किसान सम्मान निधि के बाबत ग्रामवासियों को किया गया जागरूक,

  • आज़मगढ़। महाराजा सुहेलदेव विश्वविद्यालय आजमगढ़ परिसर के अनुषांगिक संगठन राष्ट्रीय सेवा योजना द्वारा कुलपति प्रो. संजीव कुमार के प्रेरणादायी मार्गदर्शन के क्रम में विश्वविद्यालय के समीपवर्ती ग्रामीण क्षेत्र आज़मबांध में आयोजित सात दिवसीय विशेष शिविर के अंतर्गत निकाली गई जन-जागरूकता रैली ने पूरे क्षेत्र में सामाजिक चेतना की नई लहर पैदा कर दी। यह रैली ग्रामीण विकास, स्वच्छता और सामूहिक जिम्मेदारी की दिशा में एक प्रभावी पहल के रूप में सामने आयी।
    विश्वविद्यालय के मीडिया प्रभारी ने बताया कि कार्यक्रम की विधिवत शुरुआत प्रातःकाल—विश्वविद्यालय परिसर स्थित मंदिर के प्रांगण से हुई, जहाँ स्वयंसेवकों ने अनुशासित तरीके से पंक्तिबद्ध होकर राष्ट्रगान और लक्ष्य गीत के साथ सेवा का संकल्प लिया। इसके बाद रंग-बिरंगी तख्तियों एवं प्रेरणादायी नारों के साथ रैली आज़मबांध ग्राम के मुख्य मार्ग से होती हुई गलियों, टोलों और मजरों तक पहुँची। एनएसएस के स्वयंसेवकों ने ग्रामवासियों से सीधे मुखातिब होते हुए रैली के दौरान ‘स्वच्छ भारत, समृद्ध भारत’ और ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ की महत् ग्रामवासियों को अवगत कराया। साथ ही यह भी अवगत कराया की क्षेत्र में विश्वविद्यालय आने से क्षेत्र वासियों और ग्राम वासियों के जीवन में बेहतर परिवर्तन कैसे देखा जा सकता है। एवं समाज के विकास हेतु ग्रामवासियों को आगे आने का आह्वान करते हुए उन्होंने कहा कि हमारे कुलपति विश्वविद्यालय की प्रगति के साथ-साथ नवयुवकों व क्षेत्रवासियों की प्रगति हेतु सदैव उपलब्ध रहते हैं। स्वयंसेवकों के उत्साह को देखकर ग्रामीण—बच्चे, बुजुर्ग और युवा—स्वतः ही इस अभियान से जुड़ते चले गए। आम ग्रामवासियों को सार्वजनिक स्थलों, कुओं के आसपास और विद्यालय परिसर में साफ-सफाई एवं स्वच्छता की महत्ता का व्यावहारिक संदेश भी दिया। ग्रामीणों को सूखे-गीले कचरे के पृथक्करण, जलभराव की समस्या और उससे होने वाली बीमारियों के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई।
    पर्यावरण संरक्षण को लेकर भी रैली में विशेष जोर दिया गया। ‘एक पेड़, एक जीवन’ का संदेश देते हुए स्वयंसेवकों ने नीम, पीपल और बरगद जैसे पारंपरिक वृक्षों के महत्व को रेखांकित किया। साथ ही जल संरक्षण के लिए सोखता गड्ढा निर्माण और वर्षा जल संचयन के उपायों पर भी चर्चा की गई।
    रैली के दौरान सामाजिक कुरीतियों के खिलाफ भी आवाज बुलंद की गई। स्वयंसेवकों ने घर-घर जाकर शिक्षा के महत्व, विशेषकर बालिका शिक्षा पर संवाद किया और स्कूल न जाने वाले बच्चों के अभिभावकों को जागरूक किया। नशामुक्ति अभियान के तहत नुक्कड़ नाटकों और गीतों के माध्यम से नशे के दुष्परिणामों को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया गया, जिससे कई युवाओं ने नशा छोड़ने का संकल्प लिया।
    इसके अतिरिक्त, ग्रामीणों को आयुष्मान भारत, उज्ज्वला योजना और किसान सम्मान निधि जैसी सरकारी योजनाओं की जानकारी सरल भाषा में दी गई। डिजिटल साक्षरता पर बल देते हुए उन्हें बिचौलियों से बचकर सीधे लाभ लेने के तरीके भी बताए गए। महिला सशक्तिकरण के तहत स्वयं सहायता समूहों के गठन और कुटीर उद्योगों को बढ़ावा देने की प्रेरणा दी गई।
    रैली के समापन पर गाँव की चौपाल में एक सभा का आयोजन किया गया, जिसमें ग्राम प्रधान एवं अन्य गणमान्य लोगों ने युवाओं के इस प्रयास की सराहना की। उन्होंने इसे ग्रामीण परिवर्तन की दिशा में सकारात्मक संकेत बताया।
    आयोजकों ने बताया कि शिविर का उद्देश्य केवल श्रमदान नहीं, बल्कि स्वयंसेवकों में नेतृत्व क्षमता और सामाजिकसंवेदनशीलता का विकास करना है।अंत में सभी उपस्थित लोगों ने सामूहिक रूप से शपथ ली कि वे अपने गाँव को स्वच्छ, प्लास्टिक मुक्त बनाएंगे, जल संरक्षण को अपनाएंगे और बच्चों की शिक्षा सुनिश्चित करेंगे। कार्यक्रम का संचालन डा. शशि प्रकाश, डॉ. मनीषा, एवं डॉ. हरेंद्र ने किया।

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