आत्मभाव में जीना ही वास्तविक वर्तमान में जीना है : समर्थगुरु सिद्धार्थ औलिया

कुरुक्षेत्र, प्रमोद कौशिक 10 अप्रैल : श्री दुर्गा देवी मंदिर पिपली, कुरुक्षेत्र के पीठाधीश और समर्थगुरु धारा हिमाचल के ज़ोनल कोऑर्डिनेटर आचार्य डॉ. सुरेश मिश्रा ने बताया कि समर्थगुरु धाम मुरथल हरियाणा के संस्थापक समर्थगुरु सिद्धार्थ औलिया के सान्निध्य में समर्थगुरु आनंद धाम,माधोपुर में आज महोत्सव के चौथे दिन “वर्तमान उपनिषद” की दिव्य चर्चा को आगे बढ़ाते हुए आत्म भाव पर गहन प्रकाश डाला।
आत्मा को समझाते हुए कहा कि नाद और नूर से ओतप्रोत अंतर आकाश ही आत्मा है।
इस गूढ़ सत्य को सरल बनाते हुए उन्होंने अनेक विधियों के माध्यम से आत्मभाव की साधना कैसे की जाए, इस पर विस्तार से मार्गदर्शन दिया। आत्मभाव में जीना ही वास्तविक वर्तमान में जीना है, क्योंकि जब व्यक्ति आत्म भाव में स्थित होता है, तभी वह अतीत और भविष्य से मुक्त होकर वर्तमान में जीने का मजा लेता है।
ट्विटर के माध्यम से आदरणीय समर्थगुरू जी ने आज बताया कि परमात्मा को मंगलमय जानते हुए स्वधर्म का पालन करें। परमात्मा मंगलमय है, इसलिए हमे चिंता की कोई बात नहीं। स्वधर्म क्या है ? भूत-भविष्य की चिंता नही करें। वर्तमान परिस्थिति मे हम क्या कर सकते है ? बस वही करें और आप देखेंगे कि एक साधक शांत रहेगा।
इस शुभ अवसर पर समर्थगुरु धाम की सचिव मां मीराबाई, समर्थगुरू धाम के केंद्रीय संयोजक आचार्य दर्शन, आचार्य गोपाल, आचार्य अमरेश झा, स्वामी सुशील और स्वामी इंद्रजीत के साथ अनेक साधक अपने परिवार के साथ उपस्थित रहें।
सत्र के समापन पर सभी साधकों ने उमंग, उत्साह,आनंद और कृतज्ञता के साथ मिलकर मंगल भाव से उत्सव को धूमधाम से मनाया।

VV NEWS

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