सांसद नवीन जिन्दल के मार्गदर्शन में मंदिरों की स्वच्छता के लिए रखे गए समर्पण पात्र

नवीन जिन्दल फाउंडेशन द्वारा जिले के ग्यारह मंदिरों में तीन – तीन समर्पण पात्र रखे गए।
थानेसर, प्रमोद कौशिक/संजीव कुमारी 23 मार्च : सांसद नवीन जिन्दल द्वारा धार्मिक आस्था और पर्यावरण संरक्षण को एक साथ जोड़ते हुए एक सराहनीय पहल की गई है। नवीन जिन्दल फाउंडेशन के माध्यम से जिले के ग्यारह मंदिरों में तीन – तीन समर्पण पात्र उपलब्ध कराए गए हैं, जिनका उद्देश्य पूजा के बाद निकलने वाली सामग्री को अलग-अलग एकत्रित करना है।
यह सभी समर्पण पात्र हल्का पेहवा के काली मंदिर, सरस्वती मंदिर, धनिरामपुरा स्थ्ति बगला मुखी मंदिर व बाला सुंदरी मंदिर, हल्का थानेसर में मां भद्रकाली मंदिर, काली कमली मंदिर व बाला सुंदरी मंदिर हथीरा, हल्का लाडवा में देवी मंदिर और हल्का शाहाबाद में देवी मंदिर धर्मशाला, सिविल अस्पताल के पास शिव मंदिर धर्मशाला व मार्कंडेश्वर मंदिर के परिसरों में रखवाए गए हैं।
इन सभी समर्पण पात्रों को तीन श्रेणियों में, धूप एवं अगरबत्ती, पूजा के फूल तथा देवी-देवताओं को अर्पित किए जाने वाले वस्त्र आदि में विभाजित किया गया है। इस व्यवस्था से मंदिर परिसर में स्वच्छता बनाए रखने के साथ-साथ जैविक और अजैविक सामग्री के उचित प्रबंधन को भी बढ़ावा मिलेगा।
त्योहारों के दौरान मंदिरों में श्रद्धालुओं की संख्या अधिक होती है, जिससे बड़ी मात्रा में पूजा सामग्री एकत्रित होती है। यदि इसे सही तरीके से अलग नहीं किया जाए, तो यह पर्यावरण के लिए हानिकारक साबित हो सकती है। इस पहल के माध्यम से न केवल मंदिर परिसर स्वच्छ रहेंगे, बल्कि पर्यावरण संरक्षण में भी महत्वपूर्ण योगदान मिलेगा।
सांसद कार्यालय प्रभारी धर्मवीर सिंह ने बताया कि सांसद नवीन जिन्दल का मानना है कि स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण केवल सरकार की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य है। धार्मिक स्थलों से यदि हम यह संदेश समाज तक पहुंचाते हैं, तो इसका प्रभाव व्यापक और सकारात्मक होता है। श्रद्धालुओं और मंदिर प्रबंधन समितियों ने इस पहल की सराहना करते हुए इसे एक प्रेरणादायक कदम बताया है। इस तरह की व्यवस्था से लोगों में जागरूकता बढ़ेगी और वे स्वच्छता के प्रति अधिक जिम्मेदार बनेंगे।
नवीन जिन्दल फाउंडेशन की यह पहल न केवल स्वच्छ भारत मिशन को मजबूती प्रदान करती है, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए एक स्वच्छ और सुरक्षित पर्यावरण सुनिश्चित करने की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम है।




