वाह… जूनून हो तो ऐसाआंखेदान फिर पूरा शरीर ही कर दिया इन्सानियत के लिए दान


इस्माईलाबाद में गूंजे राज बाला इन्सां अमर रहे के नारे।

कुरुक्षेत्र/इस्माईलाबाद (प्रमोद कौशिक ) : वाह जी, इन्सानियत का जुनून भी ऐसा कि मरने के बाद पहले करी आंखें दान, जो दो लोगोंं के अंधेरे जीवन में रोशनी भरेंगी और फिर चिकित्सा शोध के लिए शरीर का दान कर दिया। बात कर रहे हैं इस्माईलाबाद स्थित सैनी मोहल्ला निवासी 65 वर्षीय राज बाला इन्सां की, जिनकी मृत्यु के बाद उनकी आंखे व शरीर का दान किया गया है। राज बाला इन्सां की आंखे अर्पणा आई बैंक में दान की गई हैं व शरीर का दान संस्कारम् यूनिवर्सिटी झज्जर में किया गया है। यहां के विद्यार्थी राज बाला इन्सां की देह पर शोध करेंगें। मंगलवार देर सायं जब राज बाला इन्सां के शरीर को एंबुलेंस के माध्यम से मेडिकल यूनिवर्सिटी ले जाया जा रहा था तो राज बाला इन्सां अमर के नारों से पूरा इस्माईलाबाद गूंज गया। इस दौरान सैंकड़ों की संख्या में शाह सतनाम जी ग्रीन एस वेल्फेयर कमेटी के सेवादारों के अलावा रिश्तेदार व परिजन मौजूद थे। जैसे ही राज बाला इन्सां की पार्थिव देह को इस्माईलाबाद शहर से होकर ले जाया जा रहा था तो हर कोई राज बाला व परिवार के इस कार्य को सलाम कर रहा था। राज बाला इन्सां के सुपुत्र व जनसुई गांव में बतौर राजनीति विज्ञान लेक्चरर राकेश कुमार ने बताया कि उनकी माता ने मरने से पहले ही डेरा सच्चा सौदा में शरीरदान व आंखेदान का फार्म भरकर प्रण किया हुआ था कि उसकी मृत्यु के बाद उसके शरीर का दान किया जाए, ताकि वह इन्सानियत के काम आ सके। हालांकि वे मृत्यु से पहले ठीक-ठाक थीं और कुछ घंटे पहले ही उनकी थोड़ी तबियत बिगड़ी और मंगलवार दोपहर साढे 11 बजे उनका स्वर्गवास हो गया। राकेश कुमार ने कहा कि उन्हे गर्व है कि जीते जी भी उसकी माता की सोच इन्सानियत के काम करने की थी और मरणोपरांत उनकी आंखे दो लोगों को रोशनी देंगी व उनकी पार्थिव देह पर मेडिकल विद्यार्थी शोध करेंगें। उन्होने बताया कि वे जीते जी डेरा सच्चा सौदा की विभिन्न मुहिमों से जुड़कर सेवा कार्य करती रहती थीं। राजा बाला इन्सां अपने पीछे पति नहरी पटवारी से सेवानिवृत्त गुलाब चंद, पुत्र राकेश कुमार, पुत्रियां ममता, सविता व रजनी, पुत्रवधू सुनीता, पौत्र आशीष सैनी, पौत्रियां सिरमण सैनी व परी सैनी को छोड़ गई हैं। पूरे परिवार को है गर्व
राज बाला इन्सां के पति व सेवानिवृत्त पटवारी गुलाब चंद इन्सां ने कहा कि पूरे परिवार को उनके फैसले पर गर्व है। राज बाला इन्सां कई बार कहती थीं कि उसकी मृत्यु के बाद उसकी आंखे व शरीर का दान किया जाए। चंूंकि वे स्वस्थ थीं तो वे उनकी बातों को मजाक में ले लेते थे। लेकिन अचानक मृत्यु से परिवार को दुख तो है लेकिन गर्व भी है कि उनके परिवार का सदस्य देश के काम आ रहा है।
शरीरदानी राज बाला इन्सां को अंतिम विदाई देते परिजन व अन्य।
शरीरदानी राज बाला इन्सां को अंतिम विदाई देते हुए।
इस्माईलाबाद। शरीरदानी राज बाला।




