भगवान विष्णु की आराधना सहस्रनाम स्तोत्र पाठ करने वाला व्यक्ति कभी दरिद्र नहीं रहता

भगवान विष्णु की आराधना सहस्रनाम स्तोत्र पाठ करने वाला व्यक्ति कभी दरिद्र नहीं रहता।

वैद्य पण्डित प्रमोद कौशिक।

गीता और भीष्म पितामह के मुख से निकले अंतिम शब्द विष्णु सहस्रनाम स्तोत्र की जन्मस्थली कुरुक्षेत्र है : महामंडलेश्वर जयनारायण दास।

कुरुक्षेत्र : महाभारतकालीन तीर्थ गांव नकारातारी के महंत महामंडलेश्वर 1008 जय नारायण दास महाराज ने बताया कि यह वही स्थान है जहां भीष्म पितामह के मुख से निकले शब्द विष्णु सहस्रनाम जिनका उच्चारण करने वाला व्यक्ति सभी पापों से मुक्त हो जाता है और कभी दरिद्र नहीं रहता जो कि कुरुक्षेत्र 48 कोस यात्रा परिचय विष्णु सहस्रनाम स्तोत्र का सबसे पहले उच्चारण कुरुक्षेत्र में ही हुआ था।
विष्णु सहस्रनाम भगवान विष्णु के हजार नाम से युक्त एक प्रमुख स्रोत है पद्म पुराण, मत्स्य पुराण, गरुड़ पुराण में इसका उल्लेख है इसका उच्चारण करने मात्र से ही मनुष्य सभी पापों से मुक्त हो जाता है। महाभारत के अनुशासन पर्व 149 में अध्याय में कुरुक्षेत्र में बाणों की सैया पर लेटे पितामह भीष्म ने युधिष्ठिर को गांव नरकातारी कुरुक्षेत्र में इस स्तोत्र का उपदेश दिया था।

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