
रायबरेली
रिपोर्टर विपिन राजपूत
कल अपनी कर्मभूमि डलमऊ के क्षेत्र भ्रमण के दौरान मेरी नजर पड़ी सडक किनारे खेतों में धान
लगा रहे किसानों पर फिर क्या अपने युवा साथियों के साथ उतर पड़े खेतों में और धान की रोपाई शुरू कर दी,जीवन का यह मेरा पहला अनुभव था,किसान हमारे समाज की रीढ़ हैं उनके बिना हमारे पास खाने को कुछ नहीं होता किसानों से बातचीत हुई एक दूसरे के विचारों का आदान प्रदान हुआ,खेती की नई तकनीकों के बारे में चर्चा हुई और कैसे सरकार से हम इसका लाभ ले सकते है उसकी भी जानकारी मुहैया कराई।किसान भाइयों के लिए चार पंक्तियों से उनके मनोबल को बढ़ाने का प्रयास करता हूँ कि…
जिसके श्रम बल से मिले,सबको रोटी-दाल।
जिसके श्रम से भूख का,मिट जाता संत्रास।
जिसके श्रम से खा रहा,खाना हिन्दुस्तान।
स्वेद,रक्त से सींचकर,खेती करे किसान।


