
दीपक शर्मा (जिला संवाददाता )
बरेली : राष्ट्रीय मानवाधिकार फाउण्डेशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष अजय कुमार सिंह ने प्रेस वार्ता के दौरान पत्रकारों को संबोधित करते हुए वर्तमान समय में प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा पीड़ितों को न्याय मिलने में हो रही देरी पर गंभीर चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि पीड़ितों की अपेक्षा है कि प्रशासनिक अधिकारी कानून का पालन करते हुए उन्हें त्वरित न्याय प्रदान करें। उच्चाधिकारियों के जनता दर्शन कार्यक्रम और सम्पूर्ण समाधान दिवसों में फरियादियों और पीड़ितों की लगातार बढ़ रही भीड़ इस बात का सूचक है कि स्थानीय अधिकारियों से उनकी समस्याओं का निदान और न्याय नहीं मिल पा रहा है। राष्ट्रीय मानवाधिकार फाउण्डेशन के अध्यक्ष के इस बयान का सीधा मतलब यह है कि सरकारी अधिकारियों को बिना किसी डर या पक्षपात के केवल कानून के अनुसार काम करना चाहिए। उन्होंने कहा कि अधिकारियों को किसी भी राजनैतिक दबाव के आगे झुकना नहीं चाहिए। उन्हें किसी नेता के इशारे पर नहीं, बल्कि संविधान के दायरे में रहकर निर्णय लेना चाहिए। साथ ही उन्होंने कहा कि समाज के अमीर, ताकतवर या ऊंचे रसूख वाले लोग अक्सर व्यवस्था को प्रभावित करने की कोशिश करते हैं परन्तु अधिकारियों को किसी अमीर या शक्तिशाली व्यक्ति का पक्ष नहीं लेना चाहिए, कानून की नजर में एक आम आदमी और प्रभावशाली व्यक्ति दोनों बराबर होने चाहिए। उन्होंने ये भी कहा कि अधिकारियों की असली जिम्मेदारी देश के कानून और न्याय व्यवस्था के प्रति है। उनका हर फैसला इस बात पर आधारित होना चाहिए कि सच क्या है, और कानून क्या कहता है। जब अधिकारी केवल न्याय का साथ देंगे, तभी समाज के सबसे कमजोर व्यक्ति के मानवाधिकारों की रक्षा हो सकेगी। अन्त में उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय मानवाधिकार फाउण्डेशन संगठन का प्रमुख होने के नाते मैंने यह बात इसलिए उठाई है, क्योंकि जब अधिकारी निष्पक्ष नहीं होते, तो मानवाधिकारों का हनन होता है।अधिकारियों की निष्पक्षता ही जनता का सरकारी तंत्र और न्याय प्रणाली पर भरोसा बनाए रखती है। इसके साथ ही उन्होंने प्रशासनिक व्यवस्था में ईमानदारी, निष्पक्षता और पारदर्शिता लाने की एक जोरदार अपील की है, ताकि हर नागरिक को बिना किसी भेदभाव के न्याय मिल सके।


