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भोपाल त्रासदी और परिवारिक त्रासदी को समानांतर रूप से एक प्लेटफॉर्म पर दर्शा गया नाटक द लास्ट स्टोरी

दीपक शर्मा (जिला संवाददाता)

बरेली : थिएटर अड्डा में चल रहे रंगालय एकेडमी ऑफ आर्ट एंड कल्चर के 15 दिवसीय थिएटर फेस्ट के पांचवे दिन दर्पण थिएटर दिल्ली के कलाकारों ने नाटक द लास्ट स्टोरी का मंचन किया।
राघव मिश्रा द्वारा लिखित एवं निर्देशित नाटक की शुरुआत होती है सन 2003 भीड़ भाड़ से कोसो दूर एक नगरी के ऊपरी मन्ज़िल पर कमरे में पड़े हुए कुछ मुड़े कागज ओर किताबो के बीच एक बेचैन शख्स जो लेखक है दर्शको को बताता है कि उसकी हर शाम इन्ही पन्नो के साथ गुजरती है। कई कहानियों के भंवर में फंसा लेखक उन्ही कहानियों को एक -एक कर मंच पर प्रदर्शित करता हुआ अपनी अंतिम कहानी का अंत ढूंढने की कोशिश कर रहा है। वो 35 साल का शख्स का एक ही मकसद कि जैसे कहानी का अंत पाकर उसे सब कुछ मिल जाएगा।
एक कहानी 1975 से शुरू होकर 1984 तक भोपाल की हांफती गलियो से निकलकर सन 2003 तक के अर्ध आधुनिक युग तक की कथा कहती है। एक अमीर परिवार और रिश्तो की कसौटी का लेखा जोखा।साथ ही भोपाल त्रासदी का कहर। निर्देशक ने नाटक में भोपाल त्रासदी ओर परिवारिक त्रासदी को समानांतर चलाकर अनूठा प्रयोग किया। कहानी दर कहानी दर्शक मानो खुद उसमे डूबते रहे। सही मायने में एक सशक्त प्रस्तुति रही द लास्ट स्टोरी।
इससे पहले कार्यक्रम का शुभारंभ अमिता अग्रवाल, अनिल अग्रवाल, डॉ. विनोद पागरानी, डॉ. एम .खान ने दीप प्रज्वलन कर किया।
कल प्रयागराज की टीम, माध्य्म नाट्य संस्थान, नाटक हडप्पा हाउस का मंचन करेगी। गौरतलब है कि य़ह 15 दिवसीय नाटक शृंखला खुशहाली हॉल, खुशलोक हॉस्पिटल में चल रही है। जिसका आज पांचवां दिन था।

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