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पर्यावरण का संरक्षण करना हम सब की नैतिक जिम्मेवारी:साध्वी दिवेशा भारती

(पंजाब) फिरोजपुर 27 सितंबर [कैलाश शर्मा जिला विशेष संवाददाता]=

दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान की ओर से श्री राम मंदिर, अन्नाडेल शिमला में पांच दिवसीय शिव कथा का आयोजन किया
गया। जिसके दूसरे दिवस में श्री आशुतोष महाराज जी की शिष्या साध्वी सुश्री दिवेशा भारती जी ने सती प्रसंग का वर्णन करते हुए कहा कि सती जी की लगन भगवान शिव के साथ लगी थी। इसी लगन के परिणाम स्वरूप उन्हें अपने जीवन में भगवान शिव की प्राप्ति हुई। यदि मानव के मन में भी प्रभु की लगन लग जाए तो उसे भी जीवन में प्रभु की प्राप्ति हो सकती है। यह प्रभु का स्वभाव है कि कोई भी व्यक्ति चाहे वह कैसा भी क्यों न हो प्रभु उसे आश्रय देते हैं। भगवान श्री कृष्ण भी अर्जुन से कहते है की कोई पापी से भी पापी क्यों न हो वह इस ज्ञान रूपी नौका से भव सागर पार हो सकता है।
कथा का वाचन करते हुए साध्वी जी ने कहा कि भस्मासुर ने प्रभु से वरदान प्राप्त किया था कि मैं जिस के सिर पर भी हाथ रखूं वो उसी समय भस्म हो जाए। प्रभु ने उसे वरदान दे दिया लेकिन भस्मासुर ने जिनसे वरदान प्राप्त किया उन्हीं शिव को भस्म करने के लिए चल पड़ा। ठीक यही भूल आज इन्सान भी कर रहा है जिस ईश्वर ने हमें सुंदर जीवन दिया और जीवन को सुरक्षित करने के लिए हमारे चारों और सुंदर पर्यावरण दिया हमें प्रकृति की ममता भरी गोद दी आज मनुष्य उसी को नष्ट करने पर उतारू है। साध्वी जी ने कहा कि आज भारत की बहुत सारी नदियां गंदे नालों का रूप धारण कर चुकी हैं।आज मनुष्य बर्बरता से प्रकृति को प्रताड़ित कर रहा है। सभ्यता की इमारतें खड़ी करने के लिए वह प्रकृति का अंग भंग करने पर उतारू है। तेजी से जंगलों का सफाया कर रहा है। जिसका परिणाम है बाढ़, प्रदूषण और ग्लोबल वार्मिंग।बीते दिनों हिमाचल एवं अन्य राज्यों में आई आपदा का कारण भी मनुष्य स्वयं ही है।
साध्वी दिवेशा भारती जी ने समझाते हुए कहा कि यह धरती जो हमारी मां है हमें इसके प्रति कर्तव्य को नहीं भूलना चाहिए। आज मानव को सही दिशा की आवश्यकता है। दिशा सही होने से दशा स्वयं ही सुधर जाती है।
कथा में साध्वी मीनू भारती, गुरूबहन मनीषा शर्मा और गुरुभाई अंशुल जी ने शिव महिमा में सुमधुर भजनों का गायन किया।
पावन आरती में वरिष्ठ भाजपा नेता गणेश दत्त ने परिवार सहित हिस्सा लिया इनके साथ रोहित बिष्ट,प्रियंका बिष्ट,मीना शर्मा,देवी सिंह ठाकुर भी उपस्थित रहे।कथा के बाद भंडारे का आयोजन भी हुआ।

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