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अपने बच्चों को कॉन्वेंट स्कूलों में नहीं, संस्कारों की पाठशालाओं में पढ़ाइए-कमल कोछड़

(पंजाब) फिरोजपुर 16 दिसंबर [कैलाश शर्मा जिला विशेष संवाददाता]=

  आज का समाज जिस सांस्कृतिक संकट से गुजर रहा है, उसकी जड़ें हमारी शिक्षा व्यवस्था में छुपी हुई हैं। हम गर्व से कहते हैं कि हमारे बच्चे इंग्लिश मीडियम, कॉन्वेंट स्कूलों में पढ़ते हैं, लेकिन क्या हमने कभी यह सोचा है कि वहां उन्हें संस्कार, इतिहास और अपनी जड़ों की पहचान कितनी मिल रही है?

   यह विचार कमल कोछोड़ राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री गुरु गोबिंद सिंह जी शत्रु नाशक सेना ने प्रेस वार्ता के दौरान कहे उन्होंने बताया कि कॉन्वेंट स्कूलों में पढ़ाई के नाम पर बच्चों को विदेशी सोच, विदेशी त्योहार और विदेशी आदर्शों से जोड़ा जा रहा है। परिणाम यह है कि आज का बच्चा क्रिसमस, हैलोवीन और वेलेंटाइन डे तो जानता है, लेकिन चार साहिबजादों की शहादत, गुरु गोबिंद सिंह जी का बलिदान, महाराणा प्रताप और भगत सिंह का संघर्ष उसे याद नहीं रहता।

    हमारे गुरुओं, महापुरुषों और शहीदों ने शिक्षा को केवल नौकरी का साधन नहीं, बल्कि चरित्र निर्माण का माध्यम माना था। शिक्षा का उद्देश्य केवल अंग्रेज़ी बोलना नहीं, बल्कि सच बोलना, अन्याय के खिलाफ खड़ा होना और धर्म–संस्कृति की रक्षा करना है।

    आज ज़रूरत है कि हम अपने बच्चों को ऐसी शिक्षा दें, जहां‌ मातृभाषा का सम्मान हो,

गुरु–शिष्य परंपरा जीवित रहे,देशभक्ति और बलिदान की भावना पैदा हो,
और बच्चा बड़ा होकर अपने धर्म व समाज पर गर्व कर सके।

        कॉन्वेंट शिक्षा बच्चों को भौतिकता की दौड़ में आगे तो ले जा सकती है, लेकिन संस्कारों से दूर भी कर देती है। हमें यह तय करना होगा कि हमें अपने बच्चों को सिर्फ़ नौकरीपेशा बनाना है या संस्कारी, साहसी और राष्ट्रभक्त नागरिक।

     अब समय आ गया है कि हम दिखावे की शिक्षा छोड़कर अपनी मिट्टी से जुड़ी शिक्षा को अपनाएं। यही हमारे बच्चों, समाज और आने वाली पीढ़ियों के लिए सही मार्ग है।

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