साहिबजादों की याद में खाल साई जालो-जलाल के साथ निकला बाल खालसा मार्च

दीपक शर्मा (जिला संवाददाता )

बरेली : आज दोपहर को गुरुद्वारा जनकपुरी से खालसाई जालो जलाल के साथ साहिबजादों की याद में माता भाग कौर जत्थे की ओर से गुरुद्वारा जनकपुरी से बाल खालसा मार्च निकाला गया।
जो शील चौराहा, डी. डी. पुरम, कुष्ठाश्रम हरिमंदिर ग़ुरूद्वारा माडल टाउन पर शाम को समाप्त हुआ। बाल खालसा मार्च के लिए कड़कती सर्दी के बावजूद बच्चों का उत्साह इतना था कि खालसाई वस्त्र-शस्त्र पहन कर स्वेटर/कोट/ जैकेट पहनने को तैयार नहीं थे। विशेषता खालसाई जालो जलाल के साथ नीले एवं केसरी परिधानों में 1 वर्ष के बालक बालिकाएं से लेकर 18 वर्ष तक के नौजवान बाल खालसा मार्च
मार्च में शामिल रहे। पंजाब सिक्ख गुरमति अकादमी के नौजवानों की ग़तका पार्टी, गुरू ग्रंथ साहिब, पंज पियारे मुख्य रूप से खालसा मार्च की शोभा बड़ा रहे थे।
जत्थे के मुखिया राजेंदर सिंघ की पूरी टीम सुबह से गुरुद्वारा जनकपुरी पहुंच कर बच्चों की पगड़ियाँ एवं दुमाले सजा रहे थे। जत्थे की महिला मुखिया राजनीत कौर अपनी महिला टीम के साथ तैयारी करवा रही थीं।
समाप्ति पर गुरू का लंगर अटूट सबने छका। आज सुबह हुए विशेष गुरमति दीवान में देश के प्रख्यात इतिहासकार डॉक्टर सुखप्रीत सिंघ उदोके ने इतिहास के अनछुए पहलुयो की चर्चा करते हुए बताया कि साहिब श्री गुरू नानक देव जी के सिद्धांत को आगे बढ़ाते हुए उनके द्वारा गुरबाणी में उच्चारित शबद
जउ तउ प्रेम खेलण को चाउ। सिर धर तली गली मेरी आउ को चरितार्थ करते हुए श्री आनंदपुर साहिब की धरती पर पांच सिरों की मांग कर पंज पियारों को पुनः सुरजीत कर खालसा पंथ की स्थापना की। आज के इतिहास की चर्चा करते हुए उन्होंने बताया कि वजीर खाँ की कचहरी में पेशी के दौरान गुरू गोबिन्द सिंघ साहिब के छोटे साहिबजादों बाबा जोरावर सिंघ (9 वर्ष) बाबा फतेह सिंघ (7 वर्ष) ने बहादुरी का परिचय देते हुए वजीर खाँ को कड़कते जवाब दिए और उसके द्वारा दिए गए धन दौलत एवं सुंदर डोलियों को पैर की ठोकर मार दिया। जहां काजी द्वारा दिए फतवे (दीवार में चुनने का फतवा) कबूल किया साहिब जादों ने पहुँच कर वजीर खा को अपनी जूती दिखाई और कहा
“मरने ते क्या डरपना जब हाथ सिंधौरा लीन” बाल खालसा मार्च में प्रचार जीप पर सरदार गुरमीत सिंघ मनचंदा शहीदी इतिहास सुनाते चल रहे थे। उनके पीछे निशान साहेब और नगाड़ा था। निशानची बालिकाए घोड़े पर सवार थीं, खालसा अकाल पुरख की फ़ौज निहंगी ड्रेस में चल रही थी। पंजाब होशियारपुर का ग़तका स्पोर्ट्स क्लब बाबा जोरावर सिंघ बाबा फतेह सिंघ की ग़तका पार्टी खालसाई युद्ध का प्रदर्शन कर रहे थे। उसके पीछे
साहिब जादों की प्रदर्शनी वैन-जिस पर बच्चे गुरबाणी कीर्तन कर रहे थे। श्री गुरू ग्रंथ साहिब के सत्कार में छोटे छोटे बच्चों की संगत सफाई, धुलाई एवं फूलों की बरखा कर रहे थे। पंज प्यारे सुंदर पोशाकों में चल रहे थे।
सुसज्जित विशेष बस में पालकी साहिब में श्री गुरू ग्रंथ साहिब विराजमान थे। ग्रंथी साहिब,चवर बरदार एवं सेवादारों की सेवा भी नौजवान बालक निभा रहे थे। बालक सिक्ख रेजिमेंट, पंज प्यारे, पेंतीस अखरी, साहिबजादों की फ्लेक्स ट्रॉली, रिक्खी सिंघ गर्ल्स इंटर कालिज की बालिकाओं का पाइप बैंड, सफर ए शहादत जत्था, बग्गी में सुंदर खालसाई पोशाको में बालिकाएं अंत में गुरबाणी कीर्तन बालक, बालिकाएं कर रहे थे। विशेष मानचित्र जिस रास्ते से श्री आनंदपुर साहिब से सिरसा नदी का बिछोड़ा, चमकौर साहिब एवं सिरहंद की शहादत का रास्ता दर्शाया हुआ था। अंत में नौजवान युवक युवतियाँ सफाई करते चल रहे थे। रास्ते में कई स्थानों पर खालसा मार्च में संगत द्वारा स्वागत एवं प्रशाद वितरित किया गया।
मुख्य सहयोग जगबीर सिंघ,जसदीप सिंघ सहज दीप सिंघ, गुरमीत सिंघ, मालिक सिंघ, एम. पी. सिंघ अमनदीप सिंघ, गुरदीप सिंघ, गुरप्रीत सिंघ, परमजीत कौर, कवलजीत कौर
समाप्ति पर सारी संगत ने गुरू का लंगर भी छका।
माडल टाउन के मुख्य सेवादार मालिक सिंघ कालड़ा ने बताया कि 31 दिसम्बर तक रोजाना रात्रि दीवान सजेंगे। आज 26 दिसंबर को विश्व प्रसिद्ध हिस्ट्रोइयन भाई सुखप्रीत सिंघ उदोके सुबह के दीवान में सिक्ख हिस्ट्री बताएंगे।
गुरू गोबिन्द सिंघ साहिब का पावन प्रकाश गुरू पर्व 27 दिसम्बर को बरेली कालिज हॉकी मैदान पर मनाया जायेगा। कल (आज) 26 को रात्रि कीर्तन दरबार गुरुद्वारा कोहाड़ापीर पर होगा जिसमें पंथ प्रसिद्ध रागी एवं प्रचारक पहुँच रहे हैं।

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