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श्रीमद् भागवत कथा के सातवें और अंतिम दिन भावविभोर हुए श्रद्धालु, जरासंध वध से लेकर कृष्ण–सुदामा की मित्रता तक गूंजी कथाएं

(पंजाब) फिरोजपुर 02 जनवरी [कैलाश शर्मा जिला विशेष संवाददाता]=

      फिरोजपुर शहर के टाहली मोहल्ला में बजाज परिवार की ओर से आयोजित श्रीमद् भागवत कथा का भव्य समापन सातवें एवं अंतिम दिन श्रद्धा, भक्ति और भावनाओं के सागर में डूबे वातावरण के बीच हुआ। वृंदावन से पधारे महामंडलेश्वर ब्रिज निवासी श्री श्री राजेश्वरानंद अवस्थी जी कथा व्यास ने अंतिम दिवस की कथा में भगवान श्रीकृष्ण के जीवन से जुड़े महत्वपूर्ण प्रसंगों का अत्यंत भावपूर्ण वर्णन किया, जिसे सुनकर श्रद्धालु भावविभोर हो उठे।

    श्री महामंडलेश्वर श्री राजेश्वरानंद अवस्थी जी कथा व्यास ने सातवें दिन की कथा की शुरुआत अत्याचारी राजा जरासंध के वध की लीला से की। उन्होंने बताया कि किस प्रकार भगवान श्रीकृष्ण ने धर्म की रक्षा और अधर्म के नाश के लिए जरासंध का अंत किया। इस प्रसंग के माध्यम से कथा व्यास ने श्रद्धालुओं को यह संदेश दिया कि जब-जब पृथ्वी पर अधर्म बढ़ता है, तब-तब ईश्वर किसी न किसी रूप में अवतार लेकर सत्य और न्याय की स्थापना करते हैं।

      इसके उपरांत भगवान श्रीकृष्ण और सुदामा की बाल सखा मित्रता का अत्यंत मार्मिक वर्णन किया गया। कथा व्यास ने बताया कि कैसे गुरुकुल में साथ पढ़ने वाले कृष्ण और सुदामा का प्रेम निष्काम, पवित्र और त्याग से परिपूर्ण था। सुदामा की निर्धनता और कृष्ण की राजसी वैभव के बावजूद दोनों के बीच कभी अहंकार नहीं आया। यह प्रसंग सुनते ही पंडाल में मौजूद अनेक श्रद्धालुओं की आंखें नम हो गईं।

    कथा के दौरान द्वारका नगरी की स्थापना का भी सुंदर वर्णन किया गया। महामंडलेश्वर जी कथा व्यास ने बताया कि भगवान श्रीकृष्ण ने समुद्र के बीच द्वारका बसाकर धर्म, संस्कृति और समृद्धि का अद्भुत उदाहरण प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि द्वारका केवल एक नगरी नहीं, बल्कि धर्म और आदर्शों की प्रतीक है।

कथा में विशेष तौर पर शशि शर्मा धर्मपत्नी स्वर्गवासी पंडित कमल शर्मा पूर्व प्रधान बीजेपी (पंजाब) पधारे।समापन अवसर पर बजाज परिवार की ओर से कथा व्यास का सम्मान किया गया और श्रद्धालुओं ने भजन-कीर्तन व आरती में भाग लिया। पूरे सप्ताह चली इस श्रीमद् भागवत कथा ने क्षेत्र में भक्तिमय वातावरण बना दिया और श्रद्धालुओं को धर्म, प्रेम और सदाचार के मार्ग पर चलने की प्रेरणा दी। यह कथा धर्म प्रचार की अमिट यादें छोड़कर संपन्न हुई।

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