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श्री हरि मंदिर माडल टाउन में चल रहे 16वें बरेली रंग महोत्सव “बरंगम-2026” के द्वितीय दिन नाटक कहानी का मरकजी किरदार का हुआ मंचन

दीपक शर्मा (जिला संवाददाता )

बरेली : रंगालय एकेडमी ऑफ आर्ट एंड कल्चर सोसाइटी के तत्वावधान में श्री हरि मंदिर माडल टाउन में चल रहे 16 वें बरेली रंग महोत्सव “बरंगम-2026” के द्वितीय दिन नाटक कहानी का मरकज़ी किरदार का मंचन हुआ, जिसके लेखक शादाब खान हैं।
तथा इसमें** अरमान** एक लेखक है, जो तन्हाई पसंद करता है और ज़्यादातर वक़्त अपने कमरे में बंद रहता है। वह एक ऐसी कहानी लिख रहा है जिसका अंजाम उसे मालूम है, मगर उसे क़लमबंद करने की हिम्मत नहीं कर पाता। उसकी ज़िंदगी और उसकी कहानी धीरे-धीरे एक-दूसरे में घुलने लगती हैं।
अरमान की लिखी कहानी के किरदार, ख़ासतौर पर खूनी परिंदे (क़िरदार 1), उसके ज़ेहन में ज़िंदा हो जाते हैं और उसे यक़ीन दिलाने लगते हैं कि यह कहानी काल्पनिक नहीं बल्कि एक सच्ची वाक़िआत पर मबनी है। इसी से अरमान की ज़ेहनी हालत बिगड़ती चली जाती है।
अरमान की ज़िंदगी का सबसे अहम पहलू ** आयत** है, जिससे वह बेपनाह इश्क़ करता है। हालात और समाजी दबाव के चलते आयत की शादी ** सुल्तान मिर्ज़ा ** से हो जाती है। इसके बावजूद अरमान आयत को भूल नहीं पाता। उसका इश्क़ रूहानी होने के बजाय
शक, डर और जुनून में तब्दील हो जाता है। नाटक में मौजूद दूसरा ** किरदार 2** अरमान की ज़मीर की आवाज़ बनकर उसे उकसाता है कि सुकून और कहानी के अंजाम के लिए उसे एक बड़ा क़दम उठाना होगा। इसी ज़ेहनी कशमकश और वहम की हालत में अरमान आयत का क़त्ल कर देता है और अपनी कहानी को मुकम्मल कर देता है। अंत में सुल्तान मिर्ज़ा सबूतों के साथ अरमान के सामने आता है और उसे दो रास्ते देता है-या तो ख़ुद को ख़त्म कर ले या एक और जुर्म कर के सच को छुपा दे। गोली की आवाज़ के साथ नाटक समाप्त हो जाता है, लेकिन यह सवाल छोड़ जाता है कि कहानी ख़त्म हुई या हक़ीक़त अब शुरू हुई है।
इससे पहले कार्यक्रम का शुभारंभ डा.विनोद पागरानी, रवि छाबड़ा, सुभाष कथूरिया ने दीप प्रज्ज्वलित करके किया । तथा
कार्यक्रम का संयोजन शैलेन्द्र कुमार ने किया।

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