राष्ट्रीय आयुर्वेद संस्थान, पंचकूला के स्थापना दिवस पर विशेष आलेख

आयुर्वेद का नवोदय : ‘सर्वे भवन्तु सुखिनः’ का साकार होता संकल्प।

लेखक : प्रोफेसर (डॉ.) संजीव शर्मा, कुलपति, राष्ट्रीय आयुर्वेद संस्थान, जयपुर।
चंडीगढ़, (प्रमोद कौशिक) 12 फरवरी : “सर्वे भवन्तु सुखिनः” की भावना को साकार करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 12 फरवरी 2019 को उत्तर भारत में आयुर्वेद के नए युग का सूत्रपात करते हुए राष्ट्रीय आयुर्वेद संस्थान, पंचकूला का डिजिटल माध्यम से शिलान्यास किया। संस्थान में “सर्वे सन्तु निरामयाः” को उस समय गति मिली, जब 16 अक्टूबर 2023 को ओपीडी सेवाओं की शुरुआत हुई। वहीं, जुलाई 2024 में अत्याधिक उपकरणों से सुसज्जित केंद्रीय प्रयोगशाला के शुभारंभ से अनुसंधान में नया अध्याय जुड़ा। प्रयोगशाला में जैव-रसायन, रक्त-विज्ञान, सीरोलॉजी एवं क्लीनिकल पैथोलॉजी परीक्षण सुविधाओं से उपचार पद्धति को नई पहचान मिली।
राष्ट्रीय आयुर्वेद संस्थान, जयपुर (मानद विश्वविद्यालय) के तत्वाधान में आयुष मंत्रालय भारत सरकार के अंतर्गत माता मनसा देवी परिसर में स्थित राष्ट्रीय आयुर्वेद संस्थान की परिकल्पना आयुर्वेद शिक्षण, प्रशिक्षण अनुसंधान, आधुनिक चिकित्सा ज्ञान और समग्र स्वास्थ्य प्रणाली केंद्र के रूप में की गई है।
वर्तमान में संस्थान के अस्पताल में कुल 12 बहिरंग इकाई (ओपीडी), 100 शय्या वाली अंतरंग इकाई हैं। चिकित्सालय में रोगियों को निःशुल्क उच्च गुणवता युक्त औषधियों का वितरण किया जा रहा है। चिकित्सालय में काय-चिकित्सा, शालाक्य तंत्र (नेत्र), शालाक्य तंत्र (ईएनटी), प्रसूति तंत्र और स्त्री रोग, शल्य तंत्र, पंचकर्म, कौमारभृत्य, इमरजेंसी, स्वास्थ्यरक्षण, विष चिकित्सा, त्वक और सौंदर्य प्रसाधन अन्य ओपीडी के साथ साथ पंचकर्म थैरपी, फिजियोथेरेपी, शल्य ओटी, योगा, ईसीजी, लैब टेस्ट, अल्ट्रासाउंड, एक्स-रे की भी सुविधा मुहैया करवाई जा रही है। चिकित्सालय की बहिरंग इकाई (ओपीडी) में हररोज 500 रोगी उच्च गुणवत्ता वाले परामर्श, चिकित्सा, पंचकर्म सेवाएं इत्यादि से लाभान्वित हो रहे हैं। संस्थान के नशा मुक्ति, जीवनशैली, जनित विकार, प्रतिरक्षा संवर्धन तथा मानसिक स्वास्थ्य जैसे क्षेत्रों में प्रयास सराहनीय हैं।
राष्ट्रीय आयुर्वेद संस्थान के शिक्षण संस्थान में बीएएमएस (बैचलर ऑफ आयुर्वेद मेडिसन एंव सर्जरी) पाठ्यक्रम की शुरुआत की गई है। 21 अगस्त 2024 को भारतीय चिकित्सा प्रणाली आयोग (एनसीआईएसएम) द्वारा अनुमति पत्र (एलओपी) प्रदान किया गया और शैक्षणिक सत्र 2024-25 में बीएएमएस के प्रथम बैच की शुरुआत हुई। शैक्षणिक सत्र 2025-26 में दूसरे बैच ने प्रवेश लिया। अहम पहलू यह भी है कि एनआईए में बीएएमएस पाठ्यक्रम में देश के साथ विदेशी छात्र भी आधुनिक आधारभूत सरंचना, आधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित आयुर्वेद संस्थान में विद्यार्थी उत्कृष्ट शिक्षा एवं व्यवहारिक अनुभव प्राप्त कर रहे है।
भारत सरकार के “विकसित भारत @2047” के संकल्प के अनुरूप राष्ट्रीय आयुर्वेद संस्थान, पंचकूला आयुष चिकित्सा को सुदृढ़ कर राष्ट्र के स्वास्थ्य ढांचे को मजबूत बनाने में योगदान दे रहा है। आयुर्वेद को वैश्विक स्तर पर प्रतिष्ठित करने की दिशा में यह संस्थान निरंतर प्रयासरत है। संस्थान विद्यालयों में स्वास्थ्य शिक्षा, परिवारों में आयुर्वेदिक दिनचर्या और समाज में प्राकृतिक जीवनशैली को प्रोत्साहित कर स्वस्थ भारत के संकल्प को नई गति देने में अपनी भूमिका निभा रहा है।
संस्थान द्वारा समय- समय पर प्रशिक्षण कार्यक्रम, निःशुल्क चिकित्सा शिविर, स्वास्थ्य जागरूकता कार्यक्रम, योग एवं आयुर्वेद कार्यशालाओं का आयोजन किया जा रहा है। ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में आयुर्वेद के प्रति जागरूकता बढ़ाने और स्वस्थ जीवनशैली को प्रोत्साहित करने में संस्थान की भूमिका उल्लेखनीय है। यही नहीं, संस्थान वैज्ञानिक शोध और आधुनिक तकनीक के समन्वय साथ स्वस्थ, संतुलित और सशक्त समाज की भूमिका में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है, क्योंकि आयुर्वेद रोगों के उपचार की प्रणाली नहीं, बल्कि संपूर्ण जीवन को संतुलित, अनुशासित और स्वास्थ्यपूर्ण बनाने का विज्ञान है। यानी जब समाज स्वयं स्वास्थ्य के प्रति सजग होता है, तभी “सर्वे सन्तु निरामयाः” का लक्ष्य साकार होता है।
संस्थान का मूल उद्देश्य केवल रोगों का उपचार करना नहीं, बल्कि व्यक्ति को समग्र रूप से स्वस्थ बनाना है। यानि “स्वस्थस्य स्वास्थ्य रक्षणम्, आतुरस्य विकार प्रशमनम् च।” अर्थात् आयुर्वेद का उद्देश्य : स्वस्थ व्यक्ति के स्वास्थ्य की रक्षा करना और रोगी के रोगों का शमन करना। यही आयुर्वेद का मूल दर्शन है, जो केवल चिकित्सा तक सीमित नहीं, बल्कि संपूर्ण जीवन पद्धति का मार्गदर्शन करता है। संस्थान रोगी को चिकित्सीय उपचार के साथ स्वास्थ्य के प्रति जागरूक और जीवनशैली परिवर्तन करने में सराहनीय भूमिका निभा रहा है। राष्ट्रीय आयुर्वेद संस्थान आधुनिक युग में आयुर्वेद चिकित्सा पद्धति को नई पहचान दिलाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।




