
हवन की पूर्णाहुति के साथ सम्पन्न हुआ अष्टदिवसीय श्रीमद्भागवत कथा सप्ताह ज्ञान यज्ञ महोत्सव

सेंट्रल डेस्क संपादक – वैद्य पण्डित प्रमोद कौशिक,सह संपादक – डॉ. संजीव कुमारी।
ब्यूरो चीफ – डॉ. गोपाल चतुर्वेदी।
वृन्दावन,24 मई : छटीकरा रोड़ स्थित श्रीकृष्ण जन्माष्टमी आश्रम में पुरुषोत्तम मास के पावन अवसर पर चल रहा अष्टदिवसीय श्रीमद्भागवत कथा सप्ताह ज्ञान यज्ञ महोत्सव हवन की पूर्णाहुति के साथ सम्पन्न हुआ। इस अवसर पर देश-विदेश से आए समस्त भक्तों-श्रृद्धालुओं ने वैदिक मंत्रोच्चार के मध्य हवन कुंड में आहुतियां दीं।तत्पश्चात सन्त, ब्रजवासी, वैष्णव सेवा एवं वृहद भंडारा हुआ।
इससे पूर्व व्यास पीठ से भागवत विदुषी कीर्ति किशोरी ने सभी भक्तों- श्रृद्धालुओं को सुदामा चरित्र, दत्तात्रेय महाराज के द्वारा बनाए गए चौबीस गुरुओं का प्रसंग एवं परीक्षित मोक्ष की कथा श्रवण कराई।
उन्होंने सुदामा चरित्र की कथा श्रवण कराते हुए कहा कि कलयुग में भगवान श्रीकृष्ण और सुदामा जैसी मित्रता अत्यंत दुर्लभ है।ब्रह्मज्ञानी सुदामा ने दरिद्रता की सीमा पर जीवन व्यतीत करते हुए भी परब्रह्म परमात्मा से कुछ भी नहीं मांगा।परन्तु मित्रता निभाते हुए श्रीकृष्ण ने उन्हें तीनों लोक सौंप दिए।यही सच्ची मित्रता की पराकाष्ठा है।
श्रीकृष्ण कीर्ति पत्रिका के प्रधान संपादक, वरिष्ठ साहित्यकार एवं मोटिवेशनल स्पीकर डॉ. सतेन्द्र कुमार जोशी (कृष्णा जी) ने कहा कि मानव जीवन में सत्संग का बड़ा ही महत्व है। भागवत रूपी नौका में बैठकर जो भी प्राणी सत्संग का आश्रय लेता है, वो निश्चित ही संसार रूपी भवसागर से पार हो जाता है। इसके श्रवण मात्र से मानव के सभी पाप नष्ट हो जाते हैं।भगवान की भक्ति से ही जीव का कल्याण होता है।साथ ही जन्म व मृत्यु के भय का नाश हो जाता है।
कार्यक्रम में श्रीनाभाद्वाराचार्य जगद्गुरू स्वामी सुतीक्ष्णदास देवाचार्य महाराज, वृन्दावन बालाजी देवस्थान के संस्थापकाध्यक्ष व आध्यात्मिक धर्मगुरु डॉ. अनुराग कृष्ण पाठक, प्रख्यात साहित्यकार “यूपी रत्न” डॉ. गोपाल चतुर्वेदी, महंत अवधेश दास महाराज (बयाना), डॉ. राधाकांत शर्मा, महोत्सव के मुख्य आयोजक दीपक लोहिया, श्रीमती नूपुर लोहिया, हरि नारायण अग्रवाल ,अशोक अग्रवाल, प्रहलाद गुप्ता, उमेश बंसल, नीरज मित्तल, शशिकांत दुबे, आर. के. श्रोत्रिय, गणेश अग्रवाल, रवि अग्रवाल, राधारानी अग्रवाल, उर्मिल बंसल, ममता सैनी, गोपिका शर्मा, ओमप्रकाश अग्रवाल, नीरज मित्तल एवं आचार्य बृजेन्द्र तिवारी आदि की उपस्थिति विशेष रही।


