
एसवीएसयू के ट्रांजिट कैंपस में अमेरिकन प्रोफेसर ने दिया एजेंटिक एआई पर विशेष व्याख्यान।
गुरुग्राम,प्रमोद कौशिक/संजीव कुमारी 19 जून : अमेरिका की जॉर्जिया स्टेट यूनिवर्सिटी के रॉबिन्सन कॉलेज ऑफ बिजनेस में मार्केटिंग विभाग के अध्यक्ष प्रोफेसर (डॉ.) डेनिश शाह ने कहा कि एजेंटिक एआई मार्केटिंग के तौर-तरीकों को नया आकार दे रहा है। यह स्वयं निर्णय लेने की क्षमताओं से कई पहलुओं को प्रभावित कर रहा है। प्रोफेसर शाह गुरुग्राम स्थित श्री विश्वकर्मा कौशल विश्वविद्यालय के ट्रांजिट कैंपस में आयोजित विशेष सत्र में मुख्य वक्ता के रूप में बोल रहे थे। एसवीएसयू के स्किल फैकल्टी ऑफ मैनेजमेंट स्टडीज एंड रिसर्च द्वारा ‘मार्केटिंग में एजेंटिक एआई के विकास से अवसर, चुनौतियां और भविष्य की दिशाएं’ विषय पर आयोजित इस सत्र में प्रोफेसर शाह ने कई दिलचस्प बिंदुओं पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि एआई निर्णय लेने की अथाह क्षमताओं के कारण मार्केटिंग में बड़े बदलाव ला रहा है। एआई मार्केटिंग के भविष्य को पूरी तरह बदल देगा। इसलिए मार्केटिंग क्षेत्र में काम कर रहे लोगों को इसके लिए तैयार रहना होगा। प्रोफेसर शाह ने कहा कि मार्केटिंग अब पुराने ढर्रे पर नहीं चलेगी, बल्कि एआई के प्रभाव उसके स्वरूप को परिवर्तित कर रहे हैं।
सत्र के दौरान उपस्थित लोगों को एआई- आधारित निर्णय प्रक्रिया, ऑटोमैटिक मार्केटिंग सिस्टम, ग्राहकों को जोड़ने के नए तौर-तरीकों और डिजिटल युग में मार्केटिंग प्रोफेशनल्स के लिए जरूरी नए स्किल्स के बारे में गहराई से जानने का मौका मिला। इसके साथ ही, कंपनियों में एआई को अपनाने के दौरान सामने आने वाले नैतिक, तकनीकी और रणनीतिक पहलुओं पर भी गंभीर चर्चा हुई। संकाय की डीन प्रोफेसर ज्योति राणा और ट्रांजिट कैंपस की निदेशक प्रोफेसर सुजाता शाही ने प्रोफेसर डेनिश शाह का स्वागत किया। प्रोफेसर ज्योति राणा ने बताया कि इस सत्र का आयोजन कुलगुरु प्रोफेसर दिनेश कुमार के मार्गदर्शन में किया गया। इस सत्र में मैनेजमेंट और कंप्यूटर साइंस फैकल्टी के साथ-साथ रिसर्च स्कॉलर्स भी शामिल हुए। कार्यक्रम के दौरान कौशल विकास से जुड़े प्रोग्राम्स में आपसी सहयोग और साझेदारी को लेकर भी चर्चा की गई। इस अवसर पर स्किल डिपार्टमेंट ऑफ़ बैंकिंग एन्ड फाइनेंस के अध्यक्ष डॉ. समर्थ सिंह, स्किल डिपार्टमेंट ऑफ़ टूरिज्म एन्ड हॉस्पिटैलिटी की चेयरपर्सन डॉ. सविता शर्मा, प्रोफेसर रूचि सक्सेना और डॉ. विजेंद्र सिंह के अलावा काफी संख्या में शिक्षक एवं शोधार्थी उपस्थित थे।

