कोविड-19 के बाद आयुर्वेद और भारतीय चिकित्सा पद्धतियों पर लोगों का बढ़ा विश्वास : प्रो. धीमान

आयुष विश्वविद्यालय के संशोधित विजन एवं मिशन दस्तावेज का कुलपति और कुलसचिव ने किया विमोचन।

थानेसर कुरुक्षेत्र, संजीव कुमारी 26 जून : श्री कृष्ण आयुष विश्वविद्यालय की अकादमिक परिषद की 10वीं बैठक के दौरान विश्वविद्यालय के संशोधित विजन एवं मिशन दस्तावेज का विमोचन किया गया। कुलपति प्रो. वैद्य करतार सिंह धीमान एवं कुलसचिव डॉ. कृष्ण कांत गुप्ता ने इसका लोकार्पण किया। इस अवसर पर कुलपति ने कहा कि विश्वविद्यालय का नया विजन एवं मिशन आयुष शिक्षा, अनुसंधान और स्वास्थ्य सेवाओं को वैश्विक स्तर पर नई दिशा देने की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
कुलपति ने कहा कि कोविड-19 काल के दौरान आयुर्वेद एवं भारतीय चिकित्सा पद्धतियों के प्रति लोगों का दृष्टिकोण सकारात्मक रूप से बदला है। इसी परिवर्तन को ध्यान में रखते हुए विश्वविद्यालय की पूर्व विजन एवं मिशन स्टेटमेंट का पुनरीक्षण आवश्यक समझा गया। इस उद्देश्य से विश्वविद्यालय के सभी संकाय सदस्यों को साथ लेकर कई दौर की बैठकों के बाद सर्वसम्मति से नया विजन, मिशन एवं पॉलिसी स्टेटमेंट तैयार किया गया है, जिसे अब अकादमिक परिषद के अनुमोदन के लिए प्रस्तुत किया गया।
विश्वविद्यालय के कुलगीत को मिली अकादमिक परिषद की स्वीकृति
बैठक में विश्वविद्यालय के नवनिर्मित कुलगीत “धर्मक्षेत्रे वेददाता व्यास शत-शत वंदनम्। कुरुक्षेत्र सुलभ आयुष ज्ञान शत-शत वंदनम् । जयति जय श्री कृष्ण आयुष विश्वविद्यालय नमन ।।” का औपचारिक प्रस्तुतीकरण किया गया। कुलपति प्रो. वैद्य करतार सिंह धीमान ने बताया कि विश्वविद्यालय के कुलसचिव के प्रयासों से एक उत्कृष्ट कुलगीत तैयार किया गया, जिसका शुभारंभ 5 जून को हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी द्वारा विश्वविद्यालय में आयोजित कार्यक्रम के दौरान किया गया। कुलगीत के श्रवण के बाद कुलपति ने कहा कि इसमें आयुर्वेद की मूल भावना, वेदों की परंपरा तथा विश्वविद्यालय के उद्देश्यों को प्रभावी ढंग से समाहित किया गया है। उन्होंने कहा कि वे स्वयं को सौभाग्यशाली मानते हैं कि उनके कार्यकाल में विश्वविद्यालय को अपना कुलगीत प्राप्त हुआ। इसके लिए उन्होंने कुलसचिव डॉ. कृष्णकांत गुप्ता तथा पूरी टीम को बधाई और धन्यवाद दिया।
इस अवसर पर कुलसचिव डॉ. कृष्णकांत गुप्ता ने बताया कि कुलगीत की रचना में डॉ. राजेंद्र कुमार मंगला (लेखक, कवि एवं गायक, पलवल) तथा प्रो. सुरेंद्र कुमार (सेवानिवृत्त प्रोफेसर, एमडीयू, रोहतक) का महत्वपूर्ण योगदान रहा। कुलगीत को संगीत विकास रल्हान ने दिया। उन्होंने कहा कि कुलपति प्रो. धीमान के सुझावों के आधार पर गीत में वेदों और आयुर्वेद की परंपरा को समाहित करते हुए वेदव्यास का उल्लेख भी जोड़ा गया। अकादमिक परिषद ने सर्वसम्मति से विश्वविद्यालय के कुलगीत को अनुमोदित कर दिया। इस अवसर पर डीन एकेडमिक अफेयर्स प्रो. रणधीर सिंह, आयुर्वेद अध्ययन एवं अनुसंधान संस्थान के प्राचार्य प्रो. आशीष मेहता, हरियाणा के राज्यपाल द्वारा मनोनीत सदस्य कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. सुखबीर लाल सहित अन्य उपस्थित रहे।

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