
कुरुक्षेत्र, प्रमोद कौशिक 26 जून : श्री स्थाणु सेवा मण्डल के सहयोग से महंत प्रभात पुरी कन्या वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय मे शिव महापुराण की कथा के चतुर्थ दिवस पर व्यास पीठ पर विराजमान पंडित राजेंदर पराशर जी ने विवाह उपरांत शिव बाबा ने सती से कहा तुम दक्ष की पुत्री महलो मे रहने वाली हो जबकि मेरे पास तो कुटिया भी नहीं खुले गगन के निचे मेरा स्थान है धुप बारिश ठंड मे रहता हूँ तुम क्या वंहा रह पाओगी।
सती ने बाबा से कहा मैंने तो आपको वर लिया जँहा आप रहोगे मे ख़ुशी से वंहा रहूंगी
आज संत समाज से श्री महंत बंशीपुरी महाराज, गीता मनीषी ज्ञानानंद महाराज, स्वामी लक्ष्मीनारायण, महंत महेश मुनि महाराज, महंत गुरभगत सिंह महाराज (निर्मल अखाड़ा) ने कथा मे आये। दिव्य संतो के आने से सभी भक्त जन बहुत प्रशन्न हुए। अपने सम्बोधन मे श्री महंत बंशी पुरी महाराज ने बताया शिव अविनाशी है,अनंत है शिव ही जीवन देने वाले है पोषण करने वाले है व संहार करने वाले है क्योंकि विष्णु शिव व ब्रह्मा को पूजते है शिव, विष्णु व ब्रह्मा को और ब्रह्मा शिव व विष्णु को पूजते है। ये तीनो एक ही है।
गीता मनीषी स्वामी ज्ञानानंद महाराज जिन्हों ने गीता को हरियाणा मे ही नहीं, भारतवर्ष मे ही नहीं, विदेशो मे लोगों के कंठ मे गीता के वचन डाले उन्होंने अपने सम्बोधन मे कहा कानो से, सुनना वचन से कहना, मन से मनन करना भी एक महान साधना है। क्योंकि ये महेश्वर सर्वथा ही सुनने, कीर्तन करने और मनन करने योग्य है। आज के मुख्य अतिथि कृष्ण धामीजा, विजय सभरवाल, देवी दयाल शर्मा रहे जिनको व्यास पीठ ने पटका पहना कर स्मृति चिन्ह दिया। ईस अवसर पर सतीश शर्मा, सुनील सचदेवा, रमेश सचदेवा, अनिल पोपली, सुरेंदर हमबीरिया, दलीप सिंह, दीवान अरोड़ा, प्रवीण गुप्ता, योगेश गौड़, राधेश्याम, आनंद वालिया उपस्थित रहे।


