महिलाओं का आर्थिक स्वावलंबन ही ग्रामीण विकास का प्रमुख आधार . डॉण् आशुतोष

केशगंवा स्थित एकीकृत कृषि क्लस्टर का सीईओ जिला पंचायत ने किया निरीक्षण 

कार्यरत महिलाओं की आजीविका में बड़ा बदलाव, 2 वर्षों में 5 लाख से अधिक का लाभ

कोरिया, 03 जुलाई 2026/ कलेक्टर कोरिया श्रीमती रोक्तिमा यादव के निर्देशन में जिला पंचायत सीईओ डॉ आशुतोष चतुर्वेदी ने पंचायत एंव ग्रामीण विकास के तहत हो रहे विभिन्न कार्यों का स्थल निरीक्षण किया। वनांचल जनपद पंचायत सोनहत के ग्राम पंचायतों में निरीक्षण के दौरान मुख्य कार्यपालन अधिकारी ने एकीकृत कृषि क्लस्टर का भी निरीक्षण किया और समूह की महिलाओं से बातचीत की। इस दौरान महिलाओं की आजीविका में सुधार पर भी उन्होने प्रत्येक सदस्य से संवाद कर सभी को प्रोत्साहित करते हुए उनकी कार्यविधि में ज्यादा लाभ अर्जित करने संबंधी सुझाव भी प्रदान किए। विदित हों कि कोरिया में ग्रामीण महिलाओं की आजीविका को सुदृढ़ करने और उन्हें आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने के प्रयास लगातार जारी हैं। इस भ्रमण के दौरान संबंधित अधिकारीए कर्मचारी उपस्थित रहे।

केशगवां आईएफसी से बड़ा बदलाव

कोरिया जिले के सोनहत जनपद अंतर्गत ग्राम केशगंवा में राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन ;बिहानद्ध योजना के अंतर्गत 3 महिला स्व.सहायता समूहों की 16 महिलाओं द्वारा विभिन्न प्रकार की कृषि आधारित गतिविधियां संचालित की जा रही हैं। महिलाएं सामूहिक रूप से मुर्गी पालनए बकरी पालनए सब्जी उत्पादन और वर्मी कम्पोस्ट ;जैविक खादद्ध निर्माण जैसे कार्यों से जुड़ी हुई हैं। इन गतिविधियों के माध्यम से समूह की महिलाओं ने आजीविका में वृद्धि करते हुए विगत 2 वर्षों में 5 लाख रुपये से अधिक की आय अर्जित की है।

आधुनिक तकनीक का उपयोग
विदित हो कि केशगंवा के इस आईएफसी सेंटर में सभी गतिविधियों का क्रियान्वयन पूरी तरह से वैज्ञानिक और आधुनिक तकनीक से किया जा रहा है। यहां महिलाओं के द्वारा सब्जी उत्पादन के लिए खेतों में मल्चिंग और ड्रिप इरिगेशन यानी टपक सिंचाई की आधुनिक व्यवस्था की गई है। लेयर फार्मिंग का उपयोग करते हुए एक ही स्थान पर कम खर्च और दैनिक मेहनत के कुशल उपयोग के लिए एक ही शेड में ऊपर बकरी पालन और नीचे मुर्गी पालन का कार्य किया जा रहा है।

जीरो वेस्ट मेेनेजमेंट
केशगंवा के इस केद्र में समूह की महिलाओ के द्वारा किए जा रहे समस्त कृषि और उससे जुड़े अन्य गतिविधियों के दौरान शून्य अपशिष्ट का मानक बनाया गया है। यानी यहां से निकलने वाले हर उत्पाद का दूसरा उपयोग सुनिश्चित किया गया है। जैसे फसल और सब्जी, बकरी और मुर्गी पालन से निकलने वाले अपशिष्ट का उपयोग जैविक खाद बनाने में किया जाता है। जिसका उपयोग सब्जी उत्पादन के लिए किया जा रहा है। यह चक्र पर्यावरण और खेती दोनों के लिए बेहद फायदेमंद साबित हो रहा है।

आपका आर्थिक विकास ही मुख्य उद्देश्य
केशगंवा मे कार्यरत समूह की महिलाओं से संवाद करते हुए जिला पंचायत सीईओ डॉ आशुतोष ने कहा कि पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग द्वारा संचालित बिहान योजना से जोड़कर महिलाओ की आर्थिक तरक्की ही ग्रामीण विकास का मूल आधार है। समूह की महिलाओ के साथ उनके खेतों और पशु शेड का निरीक्षण करते हुए उन्होने महिलाओं के मेहनत की प्रशंसा कर उनका उत्साहवर्धन किया।

VVNEWS वैशवारा

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