
तकनीकी ज्ञान को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करना भी इंजीनियर की महत्वपूर्ण क्षमताः डॉ. जिम्मी शर्मा’’
केयू यूआईईटी संस्थान में फ्यूचर-रेडी कम्युनिकेशन स्किल्स पर विशेष व्याख्यान आयोजित।
कुरुक्षेत्र, प्रमोद कौशिक 17 अगस्त : कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. सोम नाथ सचदेवा के मार्गदर्शन एवं विश्वविद्यालय इंस्टीट्यूट ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी के निदेशक प्रो. सुनील धींगड़ा के निर्देशन में बी.टेक. नवागंतुक विद्यार्थियों के स्टूडेंट इंडक्शन प्रोग्राम के तहत ’’‘फ्यूचर-रेडी कम्युनिकेशन स्किल्स फॉर इंजीनियर्स’’’ विषय पर विशेष व्याख्यान आयोजित किया गया। व्याख्यान में कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के इंस्टीट्यूट ऑफ इंटीग्रेटेड एंड ऑनर्स स्टडीज में अंग्रेजी की एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. जिम्मी शर्मा ने विद्यार्थियों को प्रभावी संचार कौशल के विभिन्न पहलुओं से अवगत कराया।
डॉ. जिम्मी शर्मा ने कहा कि कम्यूनिकेशन स्किल इंजीनियरिंग छात्रों को प्रभावी बनाती है। इंजीनियरिंग केवल समस्याओं का समाधान करने तक सीमित नहीं है, बल्कि उस समाधान को प्रभावी ढंग से दूसरों तक पहुंचाना भी उतना ही महत्वपूर्ण है। उन्होंने विद्यार्थियों को समझाया कि तकनीकी रूप से दक्ष होने के साथ-साथ अपने विचारों को स्पष्ट, संक्षिप्त और प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करने की क्षमता एक सफल इंजीनियर के लिए अत्यंत आवश्यक है।
उन्होंने ’’स्पष्टता, संक्षिप्तता, शुद्धता एवं संदर्भ अनुकूल संचार’’ को प्रभावी संवाद की आधारशिला बताते हुए कहा कि अच्छा संचार कठिन तकनीकी विचारों को सरल भाषा में समझाने की क्षमता है। विद्यार्थियों को अलग-अलग श्रोताओं के अनुसार अपनी भाषा एवं संवाद शैली में आवश्यक बदलाव करने के लिए भी प्रेरित किया गया।
व्याख्यान के दौरान ’’सक्रिय श्रवण, गैर-मौखिक संचार, प्रस्तुतीकरण, समूह चर्चा, साक्षात्कार, वाइवा, परियोजना प्रदर्शन तथा व्यावसायिक डिजिटल संचार’’ जैसे विषयों पर व्यावहारिक उदाहरणों के माध्यम से चर्चा की गई। उन्होंने विद्यार्थियों को तकनीकी शब्दावली के संतुलित प्रयोग की सलाह देते हुए कहा कि तकनीकी विशेषज्ञता का अर्थ शब्दावली को जानना है, जबकि संचार विशेषज्ञता यह समझना है कि उसका प्रयोग कब और किसके सामने किया जाना चाहिए।
डॉ. शर्मा ने विद्यार्थियों को डिजिटल संचार में ’’टोन, विनम्रता, संदर्भ और व्यावसायिकता’’ का ध्यान रखने की सलाह दी। उन्होंने ‘थिंक’ परीक्षण के माध्यम से विद्यार्थियों को यह समझाया कि किसी भी डिजिटल संदेश को भेजने से पहले यह देखना चाहिए कि वह सत्य, उपयोगी, समावेशी एवं उपयुक्त, आवश्यक तथा शिष्ट एवं व्यावसायिक है या नहीं।
डॉ. जिम्मी शर्मा ने विद्यार्थियों को नियमित रूप से कक्षा में बोलने, प्रतिदिन पढ़ने, प्रत्येक सप्ताह किसी तकनीकी विषय को सरल भाषा में समझाने तथा अपने बोलने का अभ्यास रिकॉर्ड करने जैसी गतिविधियों को अपनाने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों को केवल परीक्षा उत्तीर्ण करने के लिए अंग्रेजी नहीं सीखनी चाहिए, बल्कि अपनी विशेषज्ञता और ज्ञान को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करने के लिए भाषा एवं संचार कौशल विकसित करना चाहिए।


