
(पंजाब) फिरोजपुर 07 सितंबर {कैलाश शर्मा जिला विशेष संवाददाता}=
दिव्य ज्योति जागृति संस्थान, फिरोजपुर के स्थानीय आश्रम में श्रद्धा और आध्यात्मिक माहौल में साप्ताहिक सत्संग प्रोग्राम का आयोजन किया गया। इस मौके पर बड़ी संख्या में भक्तों ने शामिल होकर सत्संग का लाभ उठाया। इस दौरान भजन-कीर्तन, आध्यात्मिक विचारों और गुरु महिमा के जरिए भक्तों को आध्यात्मिक जीवन से जोड़ने का संदेश दिया गया।
इस मौके पर श्री आशुतोष महाराज जी की परम शिष्या साध्वी करमाली भारती जी ने भक्तों को संबोधित करते हुए “रूप सागर से पार होना केवल पूर्ण गुरु की शरण से ही संभव है” विषय पर विस्तार से विचार साझा किए। साध्वी करमाली भारती जी ने कहा कि इंसानी जीवन को अक्सर रूप सागर के समान बताया गया है, जिसमें इंसान भ्रम, चिंताओं, इच्छाओं और दुनियावी उलझनों में उलझकर अपने जीवन के असली मकसद से दूर हो जाता है। इस भव सागर को पार करने के लिए केवल बाहरी ज्ञान या कर्मकांड काफी नहीं हैं, बल्कि इंसान को पूर्ण गुरु की शरण लेनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि पूर्ण गुरु की तलाश करना और उनकी शरण में जाना इंसान की ज़िंदगी का एक अहम मकसद है। गुरु की कृपा से इंसान अपने अंदर मौजूद भगवान को पा सकता है और उनसे जुड़े भक्ति मार्ग पर आगे बढ़ सकता है। जब इंसान अपने अंदर मौजूद भगवान के प्रकाश का अनुभव करता है, तो उसकी सोच, जीवन के नज़रिए और व्यवहार में भी अच्छे बदलाव आने लगते हैं। साध्वी जी ने कहा कि आज इंसान बाहरी सुखों को पाने के लिए लगातार भाग रहा है, लेकिन असली शांति और संतुष्टि आध्यात्मिक ज्ञान और भगवान से जुड़कर ही मिल सकती है।
पूर्ण गुरु इंसान को सही आध्यात्मिक रास्ता दिखाते हैं और उसे ज़िंदगी का असली मकसद समझने के लिए प्रेरित करते हैं। संगत को प्रेरित करते हुए उन्होंने कहा कि हमें अपनी रोज़ाना की ज़िंदगी में सत्संग से जुड़ना चाहिए, गुरु की शिक्षाओं को समझना चाहिए और उन्हें अपनी ज़िंदगी में अपनाना चाहिए। जब इंसान अंदर से बदलता है, तो इसका असर उसके परिवार और समाज पर भी पड़ता है और समाज में प्यार, मेलजोल और इंसानी मूल्य मज़बूत होते हैं। इस मौके पर साध्वी हरजीत भारती जी ने भजन कीर्तन भी गाया। भजन कीर्तन के दौरान पूरा आश्रम आध्यात्मिक माहौल से भर गया और लोगों ने भक्ति भाव से कीर्तन का आनंद लिया।


