समस्त पापों से मुक्ति और मोक्ष प्रदान करती अष्टकोशी परिक्रमा : महंत विशाल दास

हरियाणा संपादक – वैद्य पण्डित प्रमोद कौशिक दूरभाष – 94161 91877

अष्टकोशी पैदल परिक्रमा और महात्म्य
चैत्र कृष्ण चौदस 18 मार्च 2026
प्रारम्भ प्रातः 5:00 बजे से सायं 6:00 बजे समापन।

कुरुक्षेत्र, 8 मार्च : कुरुक्षेत्र अष्टकोशी परिक्रमा वास्तव में सन्निहित सरोवर कि परिक्रमा है इस तीर्थ का विस्तार चारों दिशाओं में दो दो कोस था तीर्थ के तट पर स्थापित मंदिरों में दान व स्नान की परम्परा सदियों से चली आ रही है कुरुक्षेत्र की अष्टकोशी परिक्रमा भी पितृजन की मुक्ति दिलाने वाली व अक्षय फल प्राप्त गामी होती है। प्राचीन नाभिकमल तीर्थ के महंत विशाल दास ने बताया कि कुरुक्षेत्र अष्टकोशी परिक्रमा हजारों साल पुरानी है सर्वप्रथम ब्रह्मा विष्णु महेश त्रिदेवों ने उपवास रख जन नियंता भगवान ने सृष्टि का निर्माण करने के लिए अष्टकोशी की परिक्रमा की और अपने-अपने देवत्व भार को ग्रहण कर सृष्टि संयोजन का कार्य प्रारंभ किया त्रिदेवों के पश्चात सैकड़ो सालों से सदैव प्रतिवर्ष देवता और धार्मिक पुरुषों ने अष्टकोशी भूमि की यात्रा अनवरत रूप से जारी रखी एक बार यात्रा करने पर मनुष्य की समस्त मनोकामना को पूरा करने वाली दो बार अष्टकोसी यात्रा करने पर मोक्ष की प्राप्ति, समस्त पापों से मुक्ति प्रदान करती है। तीन बार अष्टकोसी यात्रा करने पर अक्षय लोको की प्राप्ति होती है
एक बात उल्लेखनीय है अष्टकोशी कुरुक्षेत्र का यह क्षेत्र महाभारत युद्ध से विमुक्त था।
अष्टकोशी तीर्थ यात्रा में कौन-कौन से तीर्थ आते हैं उनकी चर्चा कल से अगले अंकों में करूंगा
आदिकाल से चली आ रही यह परिक्रमा साहसिक तीर्थ यात्रा है खेतों की छोटी-छोटी पगडंडी पर सरस्वती नदी के किनारे किनारे चलते हुए लगभग 24 किलोमीटर की यह यात्रा सूर्य उदय से नाभकमल मंदिर से चलकर नाभकमल मंदिर में सूर्य अस्त तक पूर्ण होती है। कुरुक्षेत्र मोक्षदायक धार्मिक प्रसिद्ध ऐतिहासिक तीर्थ है यह केवल महाभारत युद्ध भूमि ही नहीं भगवान कृष्ण के मुखारविंद से प्रकट हुई गीता जन्मस्थली भी है। राजा कुरु के अष्टांग योग यज्ञ,तप,सत्य, क्षमा,दया, शौच, दान, ब्रह्मचर्य से परिपूर्ण मोक्ष प्रदायक स्थान भी है।
वामन अवतार व ब्रह्मा जी की उत्पत्ति स्थान इस धरा पर राम भी आए कृष्ण भी आए
रावण, कुबेर, कुम्भकर्ण, विभिक्षण ने तप कर मनोवांछित फल पाए ऐसे आदिकाल तीर्थ की परिक्रमा अंनत फल प्रदायिनी है।
यह यात्रा नाभकमल तीर्थ से सरस्वती के किनारे ओजस तीर्थ और वहीं से सरस्वती के किनारे किनारे होते हुए स्थानेश्वर तीर्थ, कुबेर तीर्थ, बदर पाचन तीर्थ, क्षीर सागर तीर्थ, पूर्ववाहिनी सरस्वती तीर्थ खेडी मारकंडा, दधीचि तीर्थ,वृद्ध कन्या तीर्थ,रंतुक यक्ष, पावन तीर्थ,औघड़ तीर्थ, बाणगंगा,उपगया तीर्थ, नरकउतारी बाणगंगा से होते हुए नाभकमल पर समाप्त होती है।

VV NEWS

राष्ट्रीय कार्यालय रमाकान्त पाण्डेय(गोपालपुरी) संरक्षक/संस्थापक ग्राम व पोस्ट- गोपालपुर (टावर) थाना व तहसील- मेहनगर जिला-आजमगढ़, उत्तर प्रदेश पिंन कोड़-276204 मोबाईल-9838825561,7054825561 हेंड कार्यालय/प्रशासनिक कार्यालय जितेंद्र पटेल (प्रमुख संपादक/प्रशासनिक संपादक) ग्राम व पोस्ट- 495668 थाना व तहसील-जांजगीर जिला-जांजगीर (छत्तीसगढ) पिंन कोड़-495668 मोबाईल-6265564514

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Next Post

लुवास में अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर महिलाओं के सशक्तिकरण पर जोर

Sun Mar 8 , 2026
लुवास में अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर महिलाओं के सशक्तिकरण पर जोर हरियाणा संपादक – वैद्य पण्डित प्रमोद कौशिक दूरभाष – 94161 91877 हिसार, 8 मार्च : लाला लाजपत राय पशु चिकित्सा एवं पशु विज्ञान विश्वविद्यालय (लुवास), हिसार के महिला प्रकोष्ठ द्वारा कुलपति प्रो. डॉ. विनोद कुमार वर्मा के मार्गदर्शन में […]

You May Like

Breaking News

advertisement