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ब्रह्माकुमारीज : कुरुक्षेत्र विश्व शांतिधाम में श्रद्धेय ब्रह्मा कुमार लक्ष्मण भ्राता जी की नौवीं पुण्य स्मृति पर स्मरांजलि कार्यक्रम

कुरुक्षेत्र, (संजीव कुमारी) 8 जनवरी : ब्रह्माकुमारीज : विश्व शांति धाम सेवा केंद्र कुरूक्षेत्र के फाउंडिंग फादर एवं पूर्व क्षेत्रीय निदेशक, श्रद्धेय आदरणीय ब्रह्मा कुमार लक्ष्मण भ्राता जी की नौवीं पुण्य स्मृति दिवस के अवसर पर प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय, कुरुक्षेत्र सेवा केंद्र में भावपूर्ण स्मरांजलि कार्यक्रम का आयोजन किया गया।
इस दौरान सहारनपुर सेवा केंद्र से पधारी ब्रह्माकुमारी संगीता बहन, ब्रह्माकुमारी एकता बहन तथा कुरुक्षेत्र सेवा केंद्र की सेंटर इंचार्ज राजयोगिनी ब्रह्माकुमारी सरोज बहन एवं राधा बहन, भारती बहन, संतोष बहन ने लक्ष्मण भ्राता जी के चित्र पर श्रद्धा सुमन अर्पित कर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दी।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए सेंटर इंचार्ज राजयोगिनी ब्रह्माकुमारी सरोज बहन ने लक्ष्मण भ्राता जी के साथ बिताए अपने अनुभव सांझा करते हुए कहा कि यद्यपि उन्हें हम प्रतिदिन स्मरण करते हैं, परंतु आज का दिन उनके प्रति विशेष कृतज्ञता प्रकट करने का है। उन्होंने बताया कि लक्ष्मण भ्राता जी ने स्वयं को लौकिक बंधनों से मुक्त कर परमात्मा के कार्य में पूर्ण समर्पण के साथ सहयोग किया। कुरुक्षेत्र जैसी पावन तीर्थभूमि पर एक छोटी सी गीता पाठशाला से यज्ञ ज्ञान का शुभारंभ कर उन्होंने सेवा का ऐसा वटवृक्ष स्थापित किया, जो आज अनेक आत्माओं को शीतल छाया प्रदान कर रहा है।
सरोज बहन ने कहा कि शारीरिक व्याधियाँ, लौकिक जिम्मेदारियाँ और पारिवारिक बंधन होने के बावजूद भी वे कभी रुके नहीं। ‘मैं’ और ‘मेरा’ का त्याग कर मर्यादाओं में रह कर निरंतर आगे बढ़ते गए। उनके भीतर त्याग, तपस्या और पवित्रता की गहरी दृढ़ता थी, जिसके कारण उनका सेवा भाव निरंतर विस्तार पाता गया। वे पवित्रता की बात करने में कभी संकोच नहीं करते थे। अंत में उन्होंने सभी से आह्वान किया कि हम सभी भगवान के कार्य में सहयोगी बनें और अपने लक्ष्य को सदैव स्मरण रखें। ब्रह्माकुमारी संगीता बहन ने लक्ष्मण भ्राता जी को स्मरण करते हुए कहा कि कुरुक्षेत्र जैसी तीर्थभूमि पर आकर उन्हें ऐसा अनुभव हो रहा है, मानो पारसनाथ का पारस संग प्राप्त हो गया हो। उन्होंने कहा कि निश्चय बुद्धि, समर्पण भाव और सर्वस्व न्योछावर कर भ्राता जी ने इस पावन सेवा केंद्र की स्थापना की। उनकी आँखों में सदैव रूहानियत की चमक, उमंग-उत्साह से भरपूर लगन और सत्य ज्ञान को स्पष्ट करने की अलौकिक शक्ति दृष्टिगोचर होती थी। वृद्ध शरीर होते हुए भी वे सदैव युवा जैसी सक्रियता से सेवा में तत्पर रहते थे। उन्होंने सभी से उनके जीवन मूल्यों को धारण करने का संकल्प लेने का आह्वान किया।
ब्रह्माकुमारी एकता बहन ने “तुम शांति दूत बन आए और शांति का पाठ पढ़ा कर चले गए” गीत के माध्यम से अपने श्रद्धा सुमन अर्पित किए।
कार्यक्रम के समापन पर उपस्थित सभी भाई- बहनों ने लक्ष्मण भ्राता जी के चित्र पर पुष्प अर्पित कर अपनी भावनाएँ व्यक्त कीं। इस अवसर पर बी.के. पुष्पा, लता, प्रियंका, नेहा, सिमरन, पूजा, आरती, पूनम, एडवोकेट रणधीर सिंह, सतीश कत्याल, बलवंत सिंह, कश्मीरी लाल, संपूर्ण सिंह, कनिष्क, गौरव, जगदीश, राजेश, करण सिंह, रोशन लाल, ईश्वर चंद, भगत राम, कृष्ण कुमार, सुदेश, हीरा, ज्योति, निर्मल सैनी, राज कुमारी, गीता, निशा, बाला सहित अनेक भाई-बहन मौजूद रहे। अंत में सभी ने ब्रह्म भोज ग्रहण कर स्वयं को धन्य अनुभव किया।

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