जिज्ञासा, तार्किक सोच व रचनात्मकता सफल विज्ञान का आधार : प्रो. सोमनाथ सचदेवा

समस्या के समाधान के लिए चेतना का जागृत होना जरूरी : प्रो. दीप्ति धर्माणी।
विज्ञान सम्मेलन युवा वैज्ञानिकों के लिए वरदान : प्रो. अरविन्द।
केयू एवं हरियाणा राज्य विज्ञान, नवाचार और प्रौद्योगिकी परिषद, हरियाणा सरकार के संयुक्त तत्वावधान में दो दिवसीय विज्ञान सम्मेलन 2026 का
हुआ शुभारम्भ।
कुरुक्षेत्र, (प्रमोद कौशिक) 29 जनवरी : कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. सोमनाथ सचदेवा ने कहा है कि जिज्ञासा, तार्किक सोच एवं रचनात्मकता ही सफल विज्ञान का आधार है। इन तीनों के बिना विज्ञान न आगे बढ़ सकता है, न ही नई खोजें संभव होती हैं। विज्ञान ने जीवन में सुख-सुविधाओं को बेहतर बनाकर गुणवत्ता को भी बढ़ाया हैं। महान वैज्ञानिकों के प्रश्नों से ही नए आविष्कार का जन्म हुआ है लेकिन इसके लिए जिज्ञासा, तार्किक सोच एवं रचनात्मकता का होना बहुत आवश्यक है। यह उद्गार कुवि कुलगुरु प्रो. सोमनाथ सचदेवा ने गुरुवार को श्रीमद्भगवद्गीता सदन (ऑडिटोरियम हॉल) में केयू एवं हरियाणा राज्य विज्ञान, नवाचार और प्रौद्योगिकी परिषद, हरियाणा सरकार के संयुक्त तत्वावधान में “विज्ञान और प्रौद्योगिकी के साथ जीवन को सशक्त बनाना : एक स्थायी भविष्य की ओर क्वांटम छलांग“ विषय पर आयोजित दो दिवसीय विज्ञान सम्मेलन 2026 के उद्घाटन अवसर बतौर अध्यक्षता करते हुए व्यक्त किए। इस अवसर पर कुवि कुलगुरु प्रो. सोमनाथ सचदेवा, सीबीएलयू की कुलगुरु प्रो. दीप्ति धर्माणी, भारतीय विज्ञान शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थान, मोहाली के प्रो. अरविन्द, डीन साइंसिज प्रो. विनोद कुमार, प्रो. जीपी दुबे, डॉ. सुमन मेहंदिया व डॉ. संगीता सैनी ने मां सरस्वती के समक्ष दीप प्रज्ज्वलित कर सम्मेलन का शुभारम्भ किया।
कुवि कुलगुरु प्रो. सोमनाथ सचदेवा ने कहा कि प्रतिष्ठित भारतीय वैज्ञानिक सीवी रमन 1930 में नोबेल पुरस्कार प्राप्त करने वाले एशिया के सबसे युवा वैज्ञानिक थे। वहीं भारत के राष्ट्रपति एवं प्रतिष्ठित वैज्ञानिक डॉ. अबुल कलाम आजाद ने देश के पहले सैटेलाइट लांच में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। उन्होंने कहा कि वर्तमान में भारत ग्लोबल लीडर बनने की ओर अग्रसर है। युवा वैज्ञानिकों को जलवायु परिवर्तन, प्रदूषण तथा खाद्य सुरक्षा संबंधी समस्याओं का समाधान नवाचार एवं उद्यमिता के माध्यम खोजने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि यह संगोष्ठी आत्मनिर्भर भारत के राष्ट्रीय लक्ष्य के अनुरूप है, क्योंकि एक आत्मनिर्भर राष्ट्र के निर्माण में युवा वैज्ञानिकों की महत्वपूर्ण भूमिका होती है, जो स्वदेशी तकनीकों का विकास कर समाज और पर्यावरण के अनुरूप समाधान प्रस्तुत कर सकते हैं।
चौधरी बंसी लाल विश्वविद्यालय, भिवानी की कुलगुरु प्रो. दीप्ति धर्माणी ने समस्या के समाधान के लिए चेतना का जागृत होना जरूरी है क्योंकि जहां चेतना के बल पर ही ज्ञानी एवं विद्वान बनकर सफलता एवं समृद्धि प्राप्त की जा सकती है। उन्होंने कहा कि युवाओं के मन में प्रश्न पूछने की जिज्ञासा का होना जरूरी है जिसे राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 में स्थान दिया गया है। वहीं कुछ दशक पहले की शिक्षा नीति इसके अनुरूप नहीं थी। उन्होंने सतत विकास के लिए पारिस्थितिकी सेवाओं को बनाए रखने की विभिन्न रणनीतियों पर भी प्रकाश डाला।
भारतीय विज्ञान शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थान, मोहाली के प्रो. अरविन्द ने बतौर मुख्य वक्ता कहा कि यह विज्ञान सम्मेलन युवा वैज्ञानिकों के लिए वरदान है। उन्होंने कहा कि विज्ञान एक ऐसा ज्ञान है जिसे जुडे़ बिना जीवन संभव नहीं है। उन्होंने “क्वांटम विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी का उद्भवः 100 वर्षों की यात्रा” को लेकर अपने विचार साझा किए। केयू डीन साइंसिज प्रो. विनोद कुमार ने कहा कि विज्ञान सम्मेलन युवा वैज्ञानिकों को विज्ञान क्षेत्र के बुनियादी सिद्धांतों स्वागत भाषण प्रस्तुत करते हुए कहा कि यह संगोष्ठी युवा पीढ़ी को समाज के हित में मूलभूत विज्ञानों के अनुप्रयोग के माध्यम से अपना करियर बनाने की दिशा प्रदान करेगी।
संगोष्ठी के संयोजक प्रो. जी.पी. दुबे ने कहा कि इस कार्यक्रम में प्रदेश भर के विद्यालयों एवं महाविद्यालयों से लगभग 3000 विद्यार्थी भाग ले रहे हैं। उन्होंने कहा कि यह मंच विद्यार्थियों को प्रख्यात वैज्ञानिकों से संवाद करने और मूलभूत विज्ञान के विभिन्न क्षेत्रों में उपलब्ध अवसरों को समझने का अवसर प्रदान करता है। कार्यक्रम का संचालन एवं धन्यवाद ज्ञापन डॉ. संगीता सैनी, आयोजन सचिव ने किया। दोपहर उपरांत सत्र में डॉ. जसविंदर सिंह, शिक्षा रत्न, पटियाला ने लाइव विज्ञान प्रदर्शन के माध्यम से “विज्ञान इन एक्शन” प्रयोग प्रस्तुत किए, जिन्होंने विद्यार्थियों को अत्यंत प्रभावित किया।
इस अवसर पर केयू डीन एकेडमिक अफेयर्स प्रो. राकेश कुमार, प्रो. संजीव अग्रवाल, प्रो. जसबीर सिंह, प्रो. एसपी सिंह, प्रो. एनके माटा, प्रो. आरके मोदगिल, प्रो. सुनीता दलाल, प्रो. सुमन ढांडा, प्रो. संजीव अरोड़ा, प्रो. अनुरेखा, प्रो. नीरा राघव, प्रो. अनीता यादव, प्रो. अनीता भटनागर, प्रो. फकीर चंद, प्राचार्य प्रो. रीटा दलाल, प्रो. परमेश कुमार, लोक सम्पर्क विभाग के निदेशक प्रो. महासिंह पूनिया, उपनिदेशक डॉ. जिम्मी शर्मा, डॉ. राजेश खरब डॉ. जितेन्द्र भारद्वाज, डॉ. जितेन्द्र खटकड़, डॉ. विनीता भांकर, डॉ. सुमन सहित कुरुक्षेत्र के स्कूलों से आए विद्यार्थी एवं शिक्षक मौजूद रहे।
प्रदर्शनी में युवा वैज्ञानिकों ने प्रदर्शित किए मॉडल
केयू ऑडिटोरियम के क्रश हॉल में विभिन्न स्कूलों से आए विद्यार्थियों ने पोस्टर एवं मॉडल प्रदर्शनी के माध्यम से जलवायु परिवर्तन, प्रदूषण सहित विभिन्न समस्याओं के समाधान को प्रदर्शित किया। इसके साथ ही सिचांई, घर की सुरक्षा, मिट्टी की उपजाऊ शक्ति को बढ़ाने के उपाय, सोलर सिस्टम, सुरक्षित यातायात एवं स्ट्रीट लाइट मॉडल द्वारा विद्यार्थियों ने आधुनिक विज्ञान की परिभाषा को रेखांकित किया।




