गीता बच्चों को आत्मविश्वास के साथ चुनौतियों का सामना करने के लिए प्रेरित करती है : डॉ. श्रीप्रकाश मिश्र

बच्चों के लिए भगवद् गीता का महत्व आज के भौतिकवाद और भोग विलास के युग में, भगवद्गीता बच्चों एवं युवाओं में अनगिनत सद्गुणों का संचार करती है।

कुरुक्षेत्र, प्रमोद कौशिक/संजीव कुमारी 10 अप्रैल : बच्चों के लिए श्रीमद्भगवद्गीता नैतिक मूल्य, मानसिक शक्ति और सही दिशा प्रदान करने में अत्यधिक प्रासंगिक है। यह एकाग्रता बढ़ाने, तनाव कम करने, फल की चिंता किए बिना कर्म करने और सही-गलत के बीच निर्णय लेने की क्षमता विकसित करने में मदद करती है, जो उनके समग्र व्यक्तित्व विकास के लिए आवश्यक है। यह विचार मातृभूमि शिक्षा मंदिर द्वारा बच्चों के लिए श्रीमद्भगवद्गीता का महत्व विषय पर आयोजित गीता बाल संवाद कार्यक्रम में मातृभूमि सेवा मिशन के संस्थापक डॉ. श्रीप्रकाश मिश्र ने व्यक्त किए। कार्यक्रम का शुभारंभ श्रीमद्भगवद्गीता के पूजन से हुआ। मातृभूमि शिक्षा मंदिर के बच्चों ने गीता के सस्वर गीता के श्लोकों का गायन किया।
मातृभूमि सेवा मिशन के संस्थापक डॉ. श्रीप्रकाश मिश्र ने गीता संवाद कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा गीता का ज्ञान और श्लोक स्मरण करने से बच्चों की स्मरण शक्ति और मानसिक एकाग्रता बढ़ती है। गीता के अध्ययन से बच्चों में नैतिक मूल्य, ईमानदारी, करुणा, निस्वार्थता, और दूसरों के प्रति सम्मान जैसे मानवीय गुण विकसित करने में सहायक है। गीता बच्चों को अर्जुन की तरह बच्चों को अपने डर का सामना करने और आत्मविश्वास के साथ चुनौतियों का सामना करने के लिए प्रेरित करती है। गीता बच्चों को सिखाती है कि मन हमारा सबसे बड़ा मित्र या सबसे बड़ा शत्रु हो सकता है। बच्चों को यह बात बचपन से ही समझ लेने से उनके डर, क्रोध और तनाव से निपटने का तरीका का ज्ञान हो जाता है।
डॉ. श्रीप्रकाश मिश्र ने कहा आज आवश्यकता है बच्चों को श्रीमद्भगवद्गीता को अपने जीवन का अभिन्न अंश बनाना होगा तथा हर दिन, नियमित रूप से अभिभावकों को आधा या एक घंटा बच्चों के साथ भगवत गीता के ज्ञान और श्लोकोच्चारण को समर्पित करना होगा। आज के आधुनिक युग में बच्चों में राष्ट्र एवं समाज का बोध निरंतर कम होता जा रहा है। अपनी परंपराओं, संस्कृति एवं धर्म के ज्ञान के अभाव में छोटी छोटी आयु के बच्चे अवसाद, अनिद्रा एवं कुंठा के शिकार हो रहे है। उनकी मानसिक एवं शारीरिक क्षमताएं क्षीण हो रही है। देश का भविष्य बच्चों का विकास समुचित नहीं हो रहा है। ऐसे में गीत का स्वाध्याय एवं ज्ञान से ही इन समस्याओं का समाधान हो सकता है। मातृभूमि सेवा मिशन की ओर से मातृभूमि शिक्षा मंदिर के बच्चों को सस्वर गीता श्लोकोच्चारण के लिए पुरस्कृत किया गया। कार्यक्रम का समापन शांतिपाठ से हुआ।

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