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महर्षि दयानंद भारत को वैदिक राष्ट्र बनाना चाहते थे : आचार्य अनुज शास्त्री

लाडवा,(सुबा सिंह) : महर्षि दयानंद सरस्वती की 202वीं जयंती के पावन अवसर पर आर्यसमाज लाड़वा, कुरुक्षेत्र में भव्य और प्रेरणादायक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का प्रारंभ यज्ञ द्वारा किया गया, जिसमें यजमान के तौर पर अरविन्द सिंहल आर्य और विशाल गोयल आर्य उपस्थित रहे। तदुपरांत ओ३म् पताका का ध्वजारोहण किया गया।
समारोह में वैदिक मंत्रोच्चार,वैदिक भजनोपदेश और राष्ट्रजागरण के ओजस्वी संदेशों के बीच महर्षि दयानंद के आदर्शों को स्मरण किया गया। वातावरण पूर्णतः आध्यात्मिक ऊर्जा और राष्ट्रभक्ति की भावना से ओतप्रोत था।
इस अवसर पर मुख्य वक्ता के रूप में संबोधित करते हुए आचार्य अनुज शास्त्री ने कहा कि महर्षि दयानंद सरस्वती केवल एक संन्यासी या समाज सुधारक नहीं थे, बल्कि वे भारत के सांस्कृतिक पुनर्जागरण के अग्रदूत थे। उनका स्वप्न था कि भारत पुनः वेदों के ज्ञान, सत्य, नैतिकता और वैज्ञानिक दृष्टिकोण पर आधारित वैदिक राष्ट्र के रूप में स्थापित हो। उन्होंने अंधविश्वास, कुरीतियों और सामाजिक भेदभाव का दृढ़तापूर्वक विरोध किया तथा शिक्षा, समानता और स्त्री-शक्ति के उत्थान का मार्ग प्रशस्त किया।
आचार्य अनुज शास्त्री ने अपने उद्बोधन में कहा कि आज आवश्यकता है कि हम महर्षि दयानंद के विचारों को केवल स्मरण न करें, बल्कि उन्हें अपने जीवन में आत्मसात करें। उन्होंने उपस्थित आर्य बंधुओं का आह्वान करते हुए कहा कि वे वेदों के सार्वभौमिक संदेश—“कृण्वन्तो विश्वमार्यम्” को जीवन का ध्येय बनाएं और समाज में नैतिकता, संस्कार एवं राष्ट्रप्रेम का संचार करें। उन्होंने विशेष रूप से युवाओं से आग्रह किया कि वे नशामुक्ति, चरित्र निर्माण और सामाजिक समरसता के कार्यों में सक्रिय भूमिका निभाएं।
आचार्य जी ने कहा कि आर्यसमाज ने शिक्षा, महिला सशक्तिकरण, गौसंरक्षण और राष्ट्रसेवा के क्षेत्र में ऐतिहासिक कार्य किए हैं।
समारोह के अंत में उपस्थित जनसमूह ने संकल्प लिया कि वे महर्षि दयानंद के आदर्शों को जन-जन तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे तथा भारत को नैतिक,आध्यात्मिक और सांस्कृतिक रूप से सशक्त बनाने में अपना योगदान देंगे। इस प्रेरणादायक आयोजन ने सभी के हृदय में नई चेतना और उत्साह का संचार किया।
इस अवसर पर भजनोपदेशिका संगीता आर्य ने अपने मधुर भजनों से सभी को भाव विभोर कर दिया। कार्यक्रम में मुख्य रूप से अनिल आर्य, सुखविंदर आर्य,राज कुमार,अरविन्द सिंहल, विशाल गोयल,रत्न कुमार,महिंद्र आर्य,बृज भूषण,जयदेव आर्य, प्रीतम,सत्येंद्र,जयदयाल,मीनाक्षी छाबड़ा, उर्मिल सिंहल,भानुमति, निशी, अंजू,कविता आदि अनेक श्रद्धालू उपस्थित रहे।

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