शहीद सूबेदार हीरा लाल अपने माता-पिता के इकलौते पुत्र थे

माँ भारती का अमर सपूत : शहीद सूबेदार हीरा लाल
2 गार्ड्स ( 1 ग्रेनेडियर्स)
वीरगाथा
अकबरपुर (महेंद्रगढ़), 10 जनवरी।
नांगल चौधरी के ग्राम अकबरपुर, जिला महेंद्रगढ़ (हरियाणा) की पावन धरती पर जन्मे भारतीय सेना के वीर सपूत सूबेदार हीरा लाल ने मातृभूमि की रक्षा करते हुए 09 जनवरी 2026 को जम्मू-कश्मीर में सर्वोच्च बलिदान देकर वीरगति प्राप्त की। उनका जीवन साहस, अनुशासन, कर्तव्यनिष्ठा और अटूट राष्ट्रभक्ति का प्रेरणादायक प्रतीक रहा।
सूबेदार हीरा लाल ने वर्ष 2000 में भारतीय सेना की प्रतिष्ठित गार्ड्स रेजिमेंट में भर्ती होकर देश सेवा का संकल्प लिया। कठोर सैन्य प्रशिक्षण के उपरांत उनकी नियुक्ति 2 गार्ड्स (1 ग्रेनेडियर्स) यूनिट में हुई। प्रारंभ से ही वे एक जुझारू, कर्मठ एवं अनुशासित सैनिक के रूप में जाने गए। अपनी उत्कृष्ट सेवा, नेतृत्व क्षमता और समर्पण के बल पर उन्होंने सेना में अनेक महत्वपूर्ण दायित्व निभाए और आगे चलकर जूनियर कमीशन ऑफिसर (JCO) के पद तक पहुँचे।
वर्तमान में सूबेदार हीरा लाल 46 RR बटालियन के साथ जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद-रोधी अभियानों में तैनात थे। कर्तव्य पालन के दौरान उन्होंने अदम्य साहस का परिचय देते हुए मातृभूमि की रक्षा में अपने प्राण न्यौछावर कर दिए। उनका यह बलिदान परिवार, सेना और पूरे राष्ट्र के लिए अपूरणीय क्षति है, साथ ही देश के लिए गर्व का विषय भी है।
शहीद सूबेदार हीरा लाल अपने माता-पिता के इकलौते पुत्र थे। उनके भीतर देशभक्ति के संस्कार परिवार के त्याग और मूल्यों से आए। उनकी धर्मपत्नी ने घर की जिम्मेदारियाँ निभाते हुए हर कदम पर उन्हें संबल और मनोबल प्रदान किया, जिससे वे निश्चिंत होकर सीमाओं पर देश सेवा करते रहे। यह बलिदान केवल एक सैनिक का नहीं, बल्कि पूरे परिवार का राष्ट्र के प्रति समर्पण है।
जैसे ही शहीद का पार्थिव शरीर सेना की टुकड़ियों द्वारा उनके पैतृक गांव अकबरपुर लाया गया, पूरा गांव शोक और गर्व के भाव से भर उठा। गांव से लगभग 3 किलोमीटर पहले से ही ग्रामवासी, सैनिक, पूर्व सैनिक एवं युवा हाथों में राष्ट्रीय ध्वज लिए सड़कों पर उतर आए। “भारत माता की जय” और “जब तक सूरज-चाँद रहेगा, हीरा लाल तेरा नाम रहेगा” जैसे गगनभेदी नारों के बीच पुष्पवर्षा करते हुए उनके निवास स्थान से श्मशान घाट तक अंतिम यात्रा निकाली गई। हर हाथ में लहराता तिरंगा और हर स्वर में गूंजती देशभक्ति ने वातावरण को भावुक और गौरवमयी बना दिया।
शहीद की अंतिम विदाई में 46 RR बटालियन, 9 MECH INF यूनिट तथा 2 गार्ड्स से अधिकारी, सूबेदार मेजर, जेसीओ, एनसीओ एवं जवान बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। इसके अतिरिक्त 100 से अधिक पूर्व सैनिक, जिनमें कई पूर्व सूबेदार मेजर, ऑनरेरी कैप्टन, सूबेदार एवं एनसीओ शामिल थे, अपने वीर साथी को नम आँखों से अंतिम सलामी देने पहुँचे। यह दृश्य सैनिक एकता, अनुशासन और भाईचारे का सजीव उदाहरण था।
अंत में पलटन से उपस्थित अधिकारियों, जेसीओ एवं एनसीओ तथा पूर्व सैनिकों ने शहीद सूबेदार हीरा लाल के परिजनों से भेंट कर उन्हें ढांढस बंधाया। उन्होंने परिवार को हिम्मत और संबल देते हुए कहा कि सेना केवल एक संगठन नहीं, बल्कि एक परिवार है और शहीद का परिवार कभी अकेला नहीं छोड़ा जाएगा। दुःख की इस घड़ी में ही नहीं, बल्कि आगे आने वाले हर सुख-दुःख में सेना और पूर्व सैनिक समुदाय परिवार के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़ा रहेगा।
। पूर्ण सैन्य सम्मान और गार्ड ऑफ ऑनर के साथ 10 जनवरी 2026 को माँ भारती के इस अमर सपूत को अंतिम विदाई दी गई। गांव अकबरपुर ने अपना लाल खोया है, लेकिन देश ने ऐसा वीर नाम पाया है जो इतिहास में सदैव अमर रहेगा।




