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उत्तराखंड में फर्जी आयुष्मान कार्ड और राशन कार्ड रखने वाले सरकार के रडार पर, रेखा आर्या

सागर मलिक

उत्तराखंड में फर्जी दस्तावेजों के ज़रिए बनाए गए राशन और आयुष्मान कार्ड के मामलों ने सरकार की चिंता बढ़ा दी है। राजधानी देहरादून में ऐसे मामलों के सामने आने के बाद, राज्य सरकार ने इस पर सख्त कार्रवाई के संकेत दिए हैं।

राज्य की खाद्य मंत्री रेखा आर्या ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश देते हुए कहा कि राशन कार्ड निर्माण प्रक्रिया में किसी भी स्तर पर लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी। उन्होंने कहा कि पात्रता मानकों का पूरी तरह से पालन सुनिश्चित किया जाए और फर्जीवाड़े की जांच प्राथमिकता पर की जाए।

मंत्री आर्या ने यह भी कहा कि यदि जरूरत पड़ी तो ‘पात्र को हां, अपात्र को ना’ अभियान को फिर से शुरू किया जाएगा। पिछली बार इस अभियान के तहत करीब एक लाख फर्जी राशन कार्ड रद्द किए गए थे।

मंत्री ने दोहराया कि फर्जी दस्तावेजों के ज़रिए सरकारी योजनाओं का लाभ उठाना एक गंभीर अपराध है, और ऐसे मामलों में लाभार्थियों के साथ-साथ जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ भी कड़ी कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने साफ किया कि सरकार इस पूरे मामले को लेकर बेहद गंभीर है और किसी तरह की ढिलाई नहीं बरती जाएगी।

मंत्री ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि अंत्योदय, एनएफएसए और राज्य खाद्य सुरक्षा योजना में पात्रता की आय सीमा का सख्ती से पालन किया जाए:

अंत्योदय योजना: मासिक आय ₹4000 से अधिक नहीं

NFSA योजना: मासिक आय ₹15,000 से कम

राज्य खाद्य सुरक्षा योजना: वार्षिक आय ₹5 लाख से कम

रेखा आर्या ने कहा कि दस्तावेजों की जांच-पड़ताल को हर स्तर पर प्राथमिकता दी जाए। उन्होंने कहा कि दोषियों को किसी भी सूरत में बख्शा नहीं जाएगा। राज्य सरकार की मंशा है कि पारदर्शिता और नियमों के पालन के साथ योजनाओं का लाभ केवल पात्र व्यक्तियों को ही मिले।

सरकार की इस कार्रवाई से स्पष्ट है कि फर्जीवाड़े पर अब कड़ी नजर रखी जा रही है और जल्द ही पूरे राज्य में पात्रता की जांच का बड़ा अभियान शुरू हो सकता है।

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