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हिसार,9 अप्रैल : लाला लाजपत राय पशु चिकित्सा एवं पशु विज्ञान विश्वविद्यालय (लुवास), हिसार के डेयरी विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी महाविद्यालय द्वारा आयोजित 15वीं इंडियन डेयरी इंजीनियर्स एसोसिएशन (आई.डी.ई.ए.) कन्वेंशन एवं राष्ट्रीय संगोष्ठी आज गरिमामय वातावरण में सफलतापूर्वक संपन्न हुई। “डेयरी एवं फूड इंजीनियरिंग में नवाचार और विकसित भारत @2047 के लिए समाधान” विषय पर आयोजित इस संगोष्ठी में देशभर से आए विशेषज्ञों, वैज्ञानिकों एवं विद्यार्थियों ने सक्रिय भागीदारी निभाई। यह आयोजन ज्ञान, नवाचार एवं तकनीकी आदान-प्रदान का एक प्रभावी मंच सिद्ध हुआ।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि डॉ. मीनेश शाह (अध्यक्ष, एन.डी.डी.बी.) ने डेयरी क्षेत्र के भविष्य पर प्रकाश डालते हुए बायोगैस तकनीक, ऊर्जा दक्षता एवं अपशिष्ट प्रबंधन को अत्यंत महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि डेयरी अपशिष्ट से बायोगैस उत्पादन किसानों की आय बढ़ाने के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण में भी सहायक है। उन्होंने एन.डी.डी.बी. की पहलों, विशेष रूप से ईटीटी (उभरती प्रौद्योगिकी हस्तांतरण) मॉडल का उल्लेख करते हुए आधुनिक तकनीकों को किसानों तक सरल रूप में पहुँचाने की आवश्यकता पर बल दिया। साथ ही, उन्होंने लुवास के साथ अनुसंधान, नवाचार, प्रशिक्षण एवं स्टार्टअप विकास में सहयोग को और सुदृढ़ करने की प्रतिबद्धता व्यक्त की तथा इस संगोष्ठी को नवाचार को बढ़ावा देने वाला महत्वपूर्ण प्रयास बताया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए कुलपति प्रो. (डॉ.) विनोद कुमार वर्मा ने कहा कि लुवास शिक्षा, अनुसंधान एवं उद्योग के बीच एक सशक्त सेतु के रूप में कार्य कर रहा है। उन्होंने डेयरी एवं फूड इंजीनियरिंग में तेजी से हो रहे तकनीकी परिवर्तनों को अपनाने पर बल देते हुए विद्यार्थियों को नवाचार, अनुसंधान आधारित सोच एवं स्टार्टअप संस्कृति अपनाने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने इस संगोष्ठी को ज्ञानवर्धन एवं उद्योग-शिक्षा समन्वय का उत्कृष्ट उदाहरण बताया।
विशिष्ट अतिथि श्रीमती निवेदिता तिवारी (सीजीएम, नाबार्ड, हरियाणा) ने डेयरी क्षेत्र को ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ बताते हुए नाबार्ड की योजनाओं एवं उद्यमिता विकास कार्यक्रमों की जानकारी दी तथा युवाओं को डेयरी आधारित स्टार्टअप्स की ओर अग्रसर होने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजन युवाओं को नई संभावनाओं से जोड़ने में सहायक होते हैं।
मुख्य वक्ता डॉ. एन.सी. राठौड़ (पूर्व डीडीजी, आईसीएआर) ने अपने संबोधन में डेयरी एवं फूड इंजीनियरिंग में नवीनतम तकनीकों, ऑटोमेशन, गुणवत्ता नियंत्रण एवं वैल्यू एडिशन पर प्रकाश डालते हुए अनुसंधान को किसानों एवं उद्योग तक पहुँचाने की आवश्यकता पर बल दिया।
आई.डी.ई.ए. के अध्यक्ष ई. आर. सुमेर अग्रवाल ने संस्था की भूमिका पर प्रकाश डालते हुए बताया कि यह संगठन देशभर के विशेषज्ञों, शिक्षाविदों एवं उद्योग जगत के बीच एक सशक्त मंच के रूप में कार्य कर रहा है तथा यह संगोष्ठी तकनीकी सहयोग एवं नवाचार को नई दिशा प्रदान करेगी।
डेयरी विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी महाविद्यालय के अधिष्ठाता डॉ. शरणगौड़ा बी. पाटिल ने स्वागत भाषण में संगोष्ठी को विद्यार्थियों एवं शोधार्थियों के लिए ज्ञानवर्धन का महत्वपूर्ण अवसर बताया। वहीं, आई.डी.ई.ए. के उपाध्यक्ष डॉ. आई. के. साहनी ने कार्यक्रम की रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए बताया कि इस आयोजन का उद्देश्य नवीनतम शोध एवं तकनीकों को एक मंच पर लाना है।
कार्यक्रम के दौरान संगोष्ठी स्मारिका का विमोचन किया गया तथा आई.डी.ई.ए. आजीवन उपलब्धि सम्मान से विशिष्ट व्यक्तियों को सम्मानित किया गया। यह सम्मान डॉ. एन. एस. राठौड़ (पूर्व डीडीजी, इंजीनियरिंग एवं शिक्षा, आईसीएआर), प्रो. (डॉ.) पी. सुधीर बाबू, श्री श्याम कोहली तथा श्री वीरेन्द्र शर्मा को प्रदान किया गया।
अंत में आयोजन सचिव डॉ. इन्दु ने धन्यवाद प्रस्ताव प्रस्तुत करते हुए सभी अतिथियों एवं प्रतिभागियों का आभार व्यक्त किया।
यह संगोष्ठी डेयरी एवं फूड इंजीनियरिंग के क्षेत्र में नवाचार को बढ़ावा देने, उद्योग-शिक्षा सहयोग को सुदृढ़ करने तथा विकसित भारत @2047 के लक्ष्य की दिशा में एक महत्वपूर्ण एवं प्रेरणादायक पहल सिद्ध हुई।


