पवित्र सरस्वती नदी हरियाणा ही नहीं पूरे भारत वर्ष को बांधती है सांस्कृतिक एकता के पवित्र बंधन में : नायब सिंह सैनी

मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने 63 करोड़ 86 लाख की 26 परियोजनाओं का किया उद्घाटन व शिलान्यास। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने मां सरस्वती मंदिर में की पूजा अर्चना, मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने बसंत पंचमी के पावन पर्व पर नेता जी सुभाष चंद्र बोस व दीन बंधू सर छोटू राम की जयंती पर नागरिकों को दी बधाई और शुभकामनाएं।
मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी पहुंचे सरस्वती महोत्सव 2026 के समापन समारोह में।
कुरुक्षेत्र पिहोवा, (प्रमोद कौशिक) 23 जनवरी : मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि पवित्र सरस्वती नदी हरियाणा के साथ-साथ पूरे भारत वर्ष को सांस्कृतिक एकता के पवित्र बंधन में बांधती है। इसलिए प्रदेश सरकार नदियों को जोडक़र व सरस्वती सरोवरों और जलाश्यों का निर्माण करके सरस्वती को फिर से प्रवाहित करने का काम कर रही है। इतना ही नहीं सरकार सरस्वती से जुड़े प्रमुख तीर्थों को सरस्वती तीर्थ के रूप में विकसित करने की योजना पर काम कर रही है।
मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी शुक्रवार को पिहोवा सरस्वती तीर्थ पर हरियाणा सरस्वती धरोहर विकास बोर्ड की तरफ से बसंत पंचमी के पावन पर्व पर आयोजित सरस्वती महोत्सव 2026 के समापन समारोह में बोल रहे थे। इससे पहले मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने हरियाणा सरस्वती धरोहर विकास बोर्ड की सरस्वती नदी के पुन उद्धार के लिए 63 करोड़ 86 लाख रुपए की लागत से 26 परियोजनाओं का उदघाटन एवं शिलान्यास किया। इनमें से 27 करोड़ 59 लाख रुपए की लागत से 16 परियोजनाओं का उद्घाटन और 36 करोड़ 27 लाख रुपए की लागत से 10 परियोजनाओं का शिलान्यास शामिल है। मुख्यमंत्री ने सरस्वती तीर्थ को विकसित करने के लिए एक मास्टर प्लान का भी शिलान्यास किया है।
मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी, गीता मनीषी स्वामी ज्ञानानंद जी महाराज, मुख्यमंत्री के ओएसडी भारत भूषण भारती, बोर्ड के उपाध्यक्ष धुमन सिंह किरमच, चेयरमैन धर्मवीर मिर्जापुर, भाजपा के जिला अध्यक्ष तिजेन्द्र सिंह गोल्डी,भाजपा के वरिष्ठ नेता जयभगवान शर्मा डीडी, जिप चेयरमैन कवलजीत कौर ने मां सरस्वती मंदिर में पूजा अर्चना करने के उपरांत कार्यक्रम स्थल पर मां सरस्वती, नेता जी सुभाष चंद्र बोस व दीन बंधू सर छोटू राम की तस्वीर पर पुष्प अर्पित कर नमन किया। मुख्यमंत्री ने प्रदेशवासियों को बसंत पंचमी, नेताजी सुभाष चंद्र जी के पराक्रम दिवस व दीन बंधू सर छोटू राम की जयंती पर बधाई और शुभकामनाएं देते हुए कहा कि यह एक सौभाग्य है कि आज के दिन 23 जनवरी को कुरुक्षेत्र जिला भी करनाल से अलग होकर अपने अलग स्वरूप में आया। इस जिले का निर्माण 23 जनवरी 1973 को हुआ। इस जिले को 3 गुणा तेज गति के साथ विकसित किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि सरस्वती महोत्सव प्राचीन सभ्यता और संस्कृति के पुन: जागरण का पर्व है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के राष्ट्र गौरव अभियान को आगे बढ़ाने की पहल है। इस बसंत पंचमी पावन पर्व पर ऋतु परिवर्तन हो रहा है। आज ही सरस्वती नगर, यमुनानगर, कैथल के पोलड व किसौल तीर्थ तथा जींद के हसं डहर तीर्थ पर भी कार्यक्रमों का आयोजन किया जा रहा है। सरस्वती नदी के महत्ता को देखते हुए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने गुजरात को मुख्यमंत्री रहते हुए सरस्वती को नर्मदा और साबरमती के जल के साथ जोडक़र पुर्न जीवित करने के प्रयास किए थे। उसी प्रकार हरियाणा में भी सरकार नदियों को जोडक़र व सरस्वती सरोवरों और जलाश्यों का निर्माण करके सरस्वती को फिर से प्रवाहित करने का काम कर रहे है। इस कार्यक्रम में हरियाणा सरस्वती धरोहर विकास बोर्ड के सीईओ कुमार सुप्रवीण ने मेहमानों का आभार व्यक्त किया। इस कार्यक्रम के अंत में मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी, गीता मनीषी स्वामी ज्ञानानंद महाराज, महंत बंसी पुरी जी महाराज, महंत शेरनाथ को भाजपा जिला अध्यक्ष तिजेन्द्र सिंह गोल्डी, पूर्व जिला अध्यक्ष एवं संयोजक सुशील राणा, जिप चेयरमैन कंवलजीत कौर, नपा अध्यक्ष आशीष चक्रपाणि, चेयरमैन तरुण सिंह वडैच, चेयरमैन बलजीत राणा, युद्घिष्ठïर बहल, रामधारी शर्मा, प्रिंस मंगला, मंडल अध्यक्ष सुखबीर, वाईस चेयरमैन विजय व बाबू राम तथा प्रदीप शर्मा ने पगड़ी पहनाकर व स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया गया। इस कार्यक्रम में मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने सरस्वती बोर्ड के सोबिनियर का विमोचन भी किया।
सरकार का संकल्प सरस्वती नदी की ऐतिहासिक पहचान फिर होगी स्थापित
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार का संकल्प है कि सरस्वती नदी का पुन: उद्घार करके ऐतिहासिक पहचान को पुन स्थापित करना है ताकि आने वाली पीढिय़ा गर्व से कह सके कि वे उस भूमि के निवासी है जहां मानव सभ्यता ने पहले कदम बढ़ाए थे।
75 से अधिक संगठनों के साथ मिलकर सरकार कर रही है कार्य
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार इसरों, भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण, ओएनजीसी, भाभा परमाणु अनुसंधान केन्द्र और केन्द्रीय भूजल बोर्ड जैसे 75 से अधिक प्रतिष्ठित अनुसंधान संगठनों के साथ मिलकर काम कर रही है। इन संस्थाओं के वैज्ञानिक अध्ययनों ने यह साबित कर दिया कि सरस्वती कोई काल्पनिक नदी नहीं है अपितु आदि बद्री के गुजरात के कच्छ के रण तक प्राचीन नदी के चैनल आज भी मौजूद है। इसका भूजल 5 हजार से 14 हजार वर्ष पुराना है और इसका संबंध हिमाचल के ग्लेशियरों से है।
प्रमुख तीर्थों को किया जाएगा सरस्वती तीर्थ के रूप में विकसित
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार का लक्ष्य है कि सरस्वती से जुड़े प्रमुख तीर्थों को सरस्वती तीर्थ के रूप में विकसित किया जाए। सरकार आदि बद्री से लेकर सिरसा तक के पूरे क्षेत्र को एक राष्ट्रीय पर्यटन सर्किट के रूप में विकसित कर रही है। इसमें कुरुक्षेत्र, पिहोवा, कैथल, हिसार, राखीगढ़ी,फतेहबाद और सिरसा जैसे ऐतिहासिक स्थल शामिल है। यह सर्किट इतिहास और संस्कृति के प्रेमियों को आकर्षित करेगा तथा युवाओं के लिए रोजगार और व्यापार के नए द्वार भी खोलेगा।
10 वर्षों में सरस्वती नदी के रास्तों पर किया 18 नए पुलों का निर्माण
मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि हिमाचल प्रदेश के साथ एक ऐतिहासिक समझौता किया है। सोमनदी पर एक बांध और सोम सरस्वती बैराज का निर्माण किया जा रहा है। सरकार ने पिछले 10 वर्षों में सरस्वती नदी के रास्तों पर 18 नए पुलों का निर्माण किया है। इसके अलावा नदी के तट पर स्थित 111 विरासत स्थलों का जीर्णोद्धार किया गया। इसके साथ ही पिहोवा सरस्वती जंगल में सरस्वती वाटिका की स्थापना भी की गई है। इसके अलावा सरकार ने एनसीईआरटी की पाठ्य पुस्तकों में भी सरस्वती नदी का अध्याय शुरू किया गया है।
सरकार सरस्वती नदी के पुन उद्धार के संकल्प को दोहराया : स्वामी ज्ञानानंद।
गीता मनीषी स्वामी ज्ञानानंद महाराज ने प्रदेशवासियों को बसंत पंचमी के पावन पर्व के साथ-साथ नेता जी सुभाष चंद्र बोस और दीन बंधू सर छोटू राम की जयंती पर बधाई और शुभकामनाएं देते हुए कहा कि बसंत पंचमी का पावन पर्व मां सरस्वती की वंदना का विशेष दीन है। इस पावन पर्व पर आम जन में एक नई ऊर्जा का संचार होता है। एक ओर हम ज्ञान की देवी मां सरस्वती की पूजा कर रहे है वहीं सरकार सरस्वती नदी के पुन उद्धार के संकल्प को दोहरा रही है। मां सरस्वती की स्तुति वेदों में भी की गई है।
सरस्वती नदी पर 100 करोड़ रुपए के किए जा रहे है विकास कार्य: धुमन सिंह।
हरियाणा सरस्वती धरोहर विकास बोर्ड के उपाध्यक्ष धुमन सिंह किरमच ने कहा कि सरस्वती बोर्ड का बजट केवल 6 करोड़ रुपए का है लेकिन मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के प्रयासों से सरस्वती नदी पर विकास कार्यों पर लगभग 100 करोड़ रुपए का बजट खर्च किया जा रहा है। यह लगातार तीसरा बड़ा महोत्सव है। इस महोत्सव की शुरुआत वर्ष 2017 में की गई थी। उन्होंने कहा कि सरस्वती नदी के किनारों पर तीर्थों, तलाबों व घाटों का निर्माण किया जा रहा है।




