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दिल्ली के विज्ञान भवन में सम्पन्न हुआ हंसराज कॉलेज (दिल्ली विश्वविद्यालय) का दो दिवसीय समागम कार्यक्रम

सेंट्रल डेस्क संपादक – वैद्य पण्डित प्रमोद कौशिक।
ब्यूरो चीफ – डॉ. गोपाल चतुर्वेदी

दिल्ली,17 जनवरी : हंसराज कॉलेज द्वारा विज्ञान भवन के अंतर्राष्ट्रीय मंच पर आयोजित ‘विकसित भारत और युवा’ विषयक द्विदिवसीय समागम कार्यक्रम संपन्न हुआ।
महाविद्यालय की प्राचार्या प्रो. रमा शर्मा ने मीडिया को संबोधित करते हुए कहा कि अत्यंत गर्व, संतोष और भावनात्मक तृप्ति का विषय रहा। विशेष रूप से यह तथ्य हम सभी के लिए गौरवपूर्ण है कि विज्ञान भवन में हंसराज कॉलेज का यह तीसरा भव्य आयोजन था,जो इस संस्थान की अकादमिक विश्वसनीयता, बौद्धिक परंपरा और राष्ट्रीय स्तर पर सुदृढ़ उपस्थिति को सशक्त रूप से रेखांकित करता है। उन्होंने कहा कि भारत की आशाओं, आकांक्षाओं और संकल्पों के वाहक मेरे प्रिय विद्यार्थियों और हमारे टीचिंग और नॉन-टीचिंग स्टाफ ने जिस अनुशासन, प्रतिबद्धता और सामूहिक चेतना के साथ इस विराट आयोजन को सफल बनाया, वो हंसराज कॉलेज की महान परंपरा और मूल्यबोध का जीवंत उदाहरण है। यह समागम विचार, संवाद, शोध और राष्ट्रचिंतन का ऐसा संगम बन गया, जिसकी स्मृतियाँ दीर्घकाल तक हमारे मन में जीवित रहेंगी।
मुख्य अतिथि के रूप में हंसराज कॉलेज के पूर्व छात्र व केंद्रीय संसदीय कार्य एवं अल्पसंख्यक कार्य मंत्री, भारत सरकार किरेन रिजिजू की उपस्थिति ने कार्यक्रम की राष्ट्रीय गरिमा प्रदान की।कार्यक्रम की अध्यक्षता दिल्ली विश्वविद्यालय के माननीय कुलपति प्रो. योगेश सिंह ने की।साथ ही बीज वक्तव्य राज्य आयुक्त (मध्य प्रदेश) मनोज श्रीवास्तव द्वारा प्रस्तुत किया गया।
इससे पूर्व प्रथम सत्र की अध्यक्षता उत्तर प्रदेश के पूर्व शिक्षा मंत्री डॉ. रवींद्र शुक्ल ने की। जिसमें मुख्य अतिथि के रूप में सर्बानंद सोनोवाल जी, केंद्रीय पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्री, भारत सरकार की गरिमामयी उपस्थिति रही। मुख्य वक्ता प्रो. पवन सिन्हा ‘गुरुजी’, आध्यात्मिक गुरु, चिंतक एवं शिक्षाविद् के विचारों ने श्रोताओं को आत्मचिंतन, मूल्यबोध और जीवन-दृष्टि के गहरे स्तर तक ले जाने का कार्य किया। द्वितीय सत्र में रवींद्रनाथ टैगोर विश्वविद्यालय के अंतरराष्ट्रीय हिंदी केंद्र,भोपाल के निदेशक डॉ. जवाहर कर्णावट, दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग के अवर सचिव मनमीत कौर नंदा (सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय, भारत सरकार), शोभित विश्वविद्यालय, मेरठ के कुलपति कुंवर शेखर विजेंद्र, राष्ट्रीय मूल्यांकन एवं प्रत्यायन परिषद (NAAC) की कार्यकारी समिति के अध्यक्ष एवं पूर्व AICTE चेयरमैन प्रो.अनिल सहस्रबुद्धे, भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता गोपाल कृष्ण अग्रवाल तथा नीदरलैंड्स ने शिक्षा प्राप्त प्रवासी भारतीय व साहित्य-संस्कृति सेवी अश्विनी केगांवकर ने भाषा, नीति, अर्थव्यवस्था, संस्कृति और सामाजिक दायित्व जैसे विषयों पर अत्यंत विचारोत्तेजक वक्तव्य दिए। तृतीय सत्र में डॉ. अभिषेक टंडन जी, संयुक्त मुख्य कार्यकारी अधिकारी, उदमोद्य फाउंडेशन, ओमप्रकाश धनखड़, पूर्व मंत्री, हरियाणा सरकार एवं राष्ट्रीय सचिव (भाजपा), प्रो. के. जी. सुरेश, निदेशक, इंडिया हैबिटेट सेंटर तथा रवि शंकर , संपादक, गगनांचल, भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद (ICCR), विदेश मंत्रालय की उपस्थिति ने समागम को बौद्धिक गहराई और समकालीन संदर्भ प्रदान किया। चतुर्थ सत्र में ईरा सिंघल, आईएएस, (उप सचिव, भारत सरकार) तथा बिनय सिंह, निदेशक, डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी फाउंडेशन ने प्रशासन, संवेदनशीलता और राष्ट्रसेवा के मूल्यों पर प्रेरक विचार साझा किए। पंचम सत्र में अतुल कोठारी, राष्ट्रीय सचिव, शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास ने समाज, संस्कृति और शिक्षा के अंतर्संबंधों पर सारगर्भित दृष्टि प्रस्तुत की। षष्ठ सत्र में विजेंद्र गुप्ता, अध्यक्ष, दिल्ली विधानसभा, जितेन जैन, साइबर विशेषज्ञ तथा डॉ. गुरु प्रकाश पासवान, राष्ट्रीय प्रवक्ता, भारतीय जनता पार्टी ने समकालीन राजनीतिक, तकनीकी और वैचारिक विषयों पर गहन विमर्श किया। मुख्य अतिथि के रूप में दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता की गरिमामयी उपस्थिति सभी प्रतिभागियों के लिए अत्यंत प्रेरणादायी रही। कार्यक्रम की अध्यक्षता पूर्व केंद्रीय शिक्षा मंत्री डॉ. रमेश पोखरियाल ‘निशंक’ ने की। मुख्य वक्ता के रूप में केंद्रीय राज्य मंत्री (PMO) डॉ. जितेन्द्र सिंह ने समागम को दूरदर्शी राष्ट्रीय दृष्टि प्रदान की। विशिष्ट अतिथि के रूप में पूज्य प्रदीप महाराज की उपस्थिति ने वातावरण को आध्यात्मिक ऊँचाई और शांति से भर दिया।
हजारों विद्यार्थियों की सक्रिय सहभागिता, सैकड़ों शोध पत्रों का वाचन और विचारों का निर्भीक आदान–प्रदान इस समागम की ऐतिहासिक उपलब्धि रहे। कार्यक्रम का समापन कवि सम्मेलन के साथ हुआ।जिसमें जगदीश मित्तल की अध्यक्षता और राजेश चेतन के सशक्त और प्रभावशाली संचालन में प्रियांशु गजेन्द्र, राजेश अग्रवाल, शंभू शिखर, डॉ. कीर्ति काले, योगेन्द्र शर्मा तथा पद्मश्री डॉ. सुनील जोगी ने अपनी कविताओं से सभागार को भाव- विभोर कर दिया।
यह समागम स्मृतियों का संकलन नहीं, आने वाली पीढ़ियों के लिए संस्कार, प्रेरणा और दिशा देने वाला एक ऐतिहासिक अध्याय है। हंसराज कॉलेज को विज्ञान भवन जैसे राष्ट्रीय मंच पर बार–बार अपनी वैचारिक उपस्थिति दर्ज कराने का अवसर मिला, यही हमारी सबसे बड़ी उपलब्धि और प्रेरणा है। प्राचार्या प्रो रमा शर्मा ने सभी अतिथियों, वक्ताओं, विद्यार्थियों, शोधार्थियों और अपने समर्पित सहयोगियों के प्रति मैं हृदय से कृतज्ञता व्यक्त की।

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