ब्रह्मा बाबा की पुण्यतिथि पर विश्व शांति धाम में मनाया गया विश्व शांति दिवस

मौन योग साधना में लीन रहे साधक, शांति व पवित्रता से गूंजा वातावरण।
कुरुक्षेत्र, (संजीव कुमारी) 18 जनवरी : प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय के संस्थापक एवं आध्यात्मिक युग प्रवर्तक श्रद्धेय ब्रह्मा बाबा की पुण्यतिथि के अवसर पर विश्व शांति धाम में विश्व शांति दिवस श्रद्धा, साधना और संकल्प के साथ मनाया गया। कार्यक्रम में सेवा केंद्र से जुड़े सैकड़ों बहन- भाइयों ने सहभागिता कर राजयोग मेडिटेशन के माध्यम से ब्रह्मा बाबा को श्रद्धांजलि अर्पित की। विश्व शांति दिवस के उपलक्ष्य में 1 जनवरी से ही विश्व शांति धाम में प्रतिदिन राजयोग साधना कराई जा रही थी। पुण्य स्मृति दिवस पर विशेष मौन योग सत्र का आयोजन किया गया, जिसमें उपस्थित साधक गहन शांति की अनुभूति में लीन रहे। साधना के दौरान पूरा परिसर शांति, पवित्रता और दिव्यता के आध्यात्मिक वातावरण से ओत-प्रोत रहा।
इस अवसर पर सेवा केंद्र की इंचार्ज राजयोगिनी ब्रह्माकुमारी सरोज बहन जी ने उपस्थित जनसमूह को संबोधित करते हुए कहा कि पुण्य स्मृति दिवस केवल स्मरण का अवसर नहीं, बल्कि आत्मिक उन्नति और श्रेष्ठ जीवन निर्माण का संकल्प दिवस है। उन्होंने बताया कि सन 1936–37 में निराकार शिव परमात्मा के दिव्य साक्षात्कार के पश्चात दादा लेखराज जी ने अपना संपूर्ण जीवन मानव कल्याण हेतु समर्पित कर दिया और वही दिव्य कार्य आगे चलकर प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय के रूप में विश्वभर में फैल गया।
उन्होंने कहा कि ब्रह्मा बाबा ने त्याग, तपस्या और दृढ़ संकल्प के बल पर राजयोग ज्ञान के माध्यम से मानवता को आत्मिक शांति, नैतिक मूल्यों और विश्व बंधुत्व का संदेश दिया। आज यह संस्था विश्व के 140 से अधिक देशों में आध्यात्मिक, सामाजिक और नैतिक मूल्यों के उत्थान हेतु कार्य कर रही है। राजयोगिनी सरोज बहन जी ने कहा कि ब्रह्मा बाबा ने मातृशक्ति को समाज के नेतृत्व में आगे बढ़ाया। ब्रह्माकुमारी संस्था विश्व की एकमात्र ऐसी आध्यात्मिक संस्था है, जो पूर्णतः नारी शक्ति के नेतृत्व में संचालित है। उन्होंने बताया कि 18 जनवरी 1969 को 93 वर्ष की आयु में ब्रह्मा बाबा अव्यक्त हो गए, इसके पश्चात दादी प्रकाशमणि जी के नेतृत्व में संस्था ने वैश्विक स्तर पर नई ऊँचाइयाँ प्राप्त कीं।
कार्यक्रम के दौरान बी.के. आरती एवं बी.के. पूनम ने भावपूर्ण गीत “अंबर में हैं तारे, जब तक सागर में है पानी” के माध्यम से ब्रह्मा बाबा के जीवन और त्याग को स्वरांजलि दी। वहीं बी.के. विमला, बी.के. गीता एवं बी.के. रघुवीर भाई ने परमात्मा स्मृति गीत प्रस्तुत कर उपस्थित जनसमूह को शांति और सेवा के संदेश से प्रेरित किया।
कार्यक्रम का समापन “शांति की शक्ति से शांति जग में लानी है” गीत के साथ हुआ, जिसमें उपस्थित सभी बहन-भाइयों ने राजयोग को जीवन में अपनाकर समाज में शांति और सद्भाव स्थापित करने का संकल्प लिया।




